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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

ब्लैक सी ग्रेन डील को पुनः शुरू करने पर वार्ता

  • 09 Sep 2023
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

ब्लैक सी ग्रेन डील पर चर्चा, संयुक्त राष्ट्र (यूएन), खाद्य संकट, नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन)

मेन्स के लिये:

ब्लैक सी ग्रेन डील पर चर्चा

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों?  

हाल ही में तुर्किये के राष्ट्रपति ने ब्लैक सी ग्रेन डील पर पुनः चर्चा करने के लिये रूस के राष्ट्रपति से मुलाकात की,  यह जानना जरुरी है कि रूस ने जुलाई 2023 में खुद को इस समझौते से बाहर कर लिया था।

ब्लैक सी ग्रेन पहल:

  • परिचय:
    • ब्लैक सी ग्रेन पहल का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर 'ब्रेडबास्केट' में रूसी कार्रवाइयों के कारण आपूर्ति शृंखला में होने वाले व्यवधानों से उत्पन्न खाद्य कीमतों में वृद्धि से निपटने का प्रयास करना है।
    • संयुक्त राष्ट्र और तुर्किये की मध्यस्थता में इस्तांबुल ने इस समझौते पर जुलाई 2022 में हस्ताक्षर किये थे।
    • यह पहल विशेषतः काला सागर में तीन प्रमुख यूक्रेनी पत्तनों- ओडेसा, चोर्नोमोर्स्क, युज़नी/पिवडेनी से वाणिज्यिक खाद्य और उर्वरक (अमोनिया सहित) निर्यात की अनुमति देती है।
  • उद्देश्य:
    • यह समझौता, जिसे शुरू में 120 दिनों की अवधि के लिये स्थापित किया गया था, का उद्देश्य यूक्रेनी निर्यात (विशेष रूप से खाद्यान्न) को एक सुरक्षित समुद्री मानवीय गलियारा प्रदान करना था।
    • इसका मुख्य लक्ष्य अनाज की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए खाद्य कीमतों में वृद्धि को रोककर बाज़ार की अस्थिरता को नियंत्रित करना था।
  • संयुक्त समन्वय केंद्र (JCC) की भूमिका:
    • JCC की स्थापना काला सागर अनाज पहल के कार्यान्वयन की निगरानी के लिये की गई थी।
    • JCC की मेज़बानी इस्तांबुल में की गई है और इसमें रूस, तुर्किये, यूक्रेन और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र केंद्र के लिये सचिवालय के रूप में भी कार्य करता है।
    • उचित निगरानी, ​​निरीक्षण और सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिये सभी वाणिज्यिक जहाज़ों को सीधे JCC के साथ पंजीकृत होना आवश्यक है। आने वाले और बाहर जाने वाले जहाज़ (निर्दिष्ट गलियारे तक) निरीक्षण के बाद JCC  द्वारा तय कार्यक्रम के अनुसार पारगमन करते हैं।
      • ऐसा इसलिये किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जहाज़ पर कोई अनधिकृत कार्गो या कर्मी न रहे।
      • इसके बाद उन्हें निर्दिष्ट गलियारे के माध्यम से लोडिंग के लिये यूक्रेनी बंदरगाहों तक जाने की अनुमति दी जाती है।

अनाज सौदे से रूस के बाहर होने के पीछे के कारण: 

  • रूस का दावा है कि समझौते के तहत उससे किये गए वादे पूरे नहीं किये गए हैं और पश्चिम द्वारा उस पर लगाए गए कई प्रतिबंधों के कारण उसे अभी भी अपने कृषि उत्पादों और उर्वरकों के निर्यात में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
  • हालाँकि रूस के कृषि उत्पादों पर कोई सीधा प्रतिबंध नहीं है, देश का कहना है कि भुगतान प्लेटफाॅर्म, बीमा, शिपिंग और अन्य रसद पर बाधाएँ उसके निर्यात में बाधा डाल रही हैं।
  • रूस ने यह भी कहा है कि वह वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद के लिये अनाज सौदे पर सहमत हुआ था, लेकिन यूक्रेन तब से मुख्य रूप से उच्च और मध्यम आय वाले देशों को निर्यात करता है
  • रूस ने अपनी वापसी का कारण एक समानांतर समझौते को बनाए रखने में विफलता का हवाला दिया, जिसमें उसके भोजन एवं उर्वरक के निर्यात में बाधाओं को दूर करने का वादा किया गया था।
  • रूस ने दावा किया कि हाल के वर्षों में रिकॉर्ड गेहूँ निर्यात के बावजूद शिपिंग और बीमा प्रतिबंधों ने उसके कृषि व्यापार में बाधा उत्पन्न की है।

डील हेतु मध्यस्थता में तुर्की की हिस्सेदारी:

  • अनाज समझौते को बहाल करने के प्रयास में तुर्की ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसने लगातार उन व्यवस्थाओं को नवीनीकृत करने का वचन दिया है जिससे अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के विभिन्न हिस्सों में खाद्य संकट को रोकने में मदद मिली।
  • यूक्रेन और रूस दोनों विकासशील देशों के लिये गेहूँ, जौ, सूरजमुखी तेल तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं के महत्त्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता हैं।
  • 18 महीने के यूक्रेन संघर्ष के दौरान पुतिन के साथ तुर्की के घनिष्ठ संबंधों ने इसे रूस के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिये एक महत्त्वपूर्ण व्यापारिक भागीदार और लॉजिस्टिक केंद्र के रूप में स्थापित किया है।
  • उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) की सदस्यता के बावजूद तुर्की ने यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रूस पर पश्चिमी प्रतिबंध का समर्थन नहीं किया, जो उसकी अद्वितीय राजनयिक स्थिति को उजागर करता है।

ब्लैक सी ग्रेन पहल का महत्त्व:

  • यूक्रेन विश्व स्तर पर गेहूँ, मक्का, रेपसीड, सूरजमुखी के बीज़ और सूरजमुखी के तेल के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है।
    • काला सागर में गहरे समुद्र तक पहुँच इसे मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के अनाज आयातकों के साथ रूस एवं यूरोप से सीधे संपर्क रखने में सक्षम बनाती है।।
  • इस पहल को वैश्विक स्तर पर संकट के आलोक में जीवन निर्वाह में सहायता करने का श्रेय भी दिया गया है।
    • इस समझौते ने रूस में चल रहे युद्ध के बावजूद तीन यूक्रेनी बंदरगाहों से लगभग 33 मिलियन मीट्रिक टन (36 मिलियन टन) अनाज और अन्य वस्तुओं के सुरक्षित निर्यात की सुविधा प्रदान की।
    • आपूर्ति की कमी के दौरान अनाज को अधिक लाभ में  बेचने की उम्मीद में इसे जमा करने वाले लोग अनाज को बेचने के लिये बाध्य हुए।
  • हालाँकि यह पहल अकेले वैश्विक भूख को संबोधित नहीं कर सकती है, लेकिन यह वैश्विक खाद्य संकट के और बढ़ने की संभावना को टाल सकती है, खासकर जब क्षेत्र विगत वर्ष के स्तर तक नहीं पहुँच पाया हो।

युद्ध के मध्य रूस, यूक्रेन अनाज निर्यात की स्थिति:

  • रूस दुनिया के शीर्ष गेहूँ निर्यातक के रूप में अपनी स्थिति मज़बूत कर रहा है, हालाँकि यूक्रेन की प्रत्याशित शिपमेंट अपने उच्चतम स्तर से आधे से अधिक होने तथा इसका उत्पादन गत 11 वर्ष के निचले स्तर तक गिरने की आशंका है।
  • रूस द्वारा उत्पादित गेहूँ के प्राथमिक गंतव्य मध्य-पूर्व, उत्तरी अफ्रीका और मध्य एशिया हैं, जिनका नेतृत्व मिस्र, ईरान और अल्जीरिया करते हैं। जबकि ब्लैक सी ग्रेन इनिशिएटिव ने यूक्रेन को वर्ष 2022-23 में 16.8 मिलियन टन निर्यात करने में मदद की, इसका लगभग 39% गेहूँ वास्तव में भूमि मार्ग से पूर्वी यूरोप को निर्यात किया गया।
  • शिपमेंट की सुगमता के कारण यूक्रेन के बाज़ार युद्ध से पहले ही एशिया और उत्तरी अफ्रीका से यूरोप की ओर में स्थानांतरित हो गए थे।
    • वास्तव में यूक्रेनी अनाज की बहुतायत के कारण कुछ पूर्वी यूरोपीय देशों में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिन्होंने कहा कि उनकी उपज की कीमत घट गई है।
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