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राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अधिनियम

  • 21 Jan 2020
  • 11 min read

प्रीलिम्स के लिये:

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अधिनियम, National Investigation Agency, अनुच्छेद 131, FBI, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (संशोधन) अधिनियम 2019, उच्चतम न्यायालय

मेन्स के लिये:

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण का राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान, केंद्र बनाम राज्य का मुद्दा, उच्चतम न्यायालय की शक्तियाँ

चर्चा में क्यों?

हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अधिनियम, 2008 (National Investigation Agency Act, 2008) की वैधानिकता को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • छत्तीसगढ़ राज्य ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत इस केंद्रीय कानून को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने की मांग की है।
  • ध्यातव्य है कि संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत सर्वोच्च न्यायालय के पास यह मूल क्षेत्राधिकार है कि वह केंद्र और राज्य के बीच, केंद्र एवं राज्य और राज्य/राज्यों के बीच तथा दो या अधिक राज्यों के बीच किसी विवाद की सुनवाई कर सकता है।
  • छत्तीसगढ़ सरकार के अनुसार, यह कानून संविधान का उल्लंघन करता है और राज्य की पुलिस के कार्यों में हस्तक्षेप करता है जो कि असंवैधानिक है।
  • यह दूसरा उदाहरण है जब किसी राज्य ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत एक केंद्रीय कानून को चुनौती देने की मांग की है। गौरतलब है कि इसके पहले केरल सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम को उच्चतम न्यायालय में अनुच्छेद 131 के तहत चुनौती दी थी।
  • यह कानून भारत की प्रमुख आतंकवाद विरोधी एजेंसी के कामकाज को नियंत्रित करता है। ध्यातव्य है कि वर्ष 2008 के 26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद इस कानून को पारित किया गया था।

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अधिनियम के बारे में

(National Investigation Agency- NIA)

  • राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी भी कहा जाता है।
  • यह अधिनियम सही मायने में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण को संयुक्त राज्य अमेरिका के एफबीआई (Federal Bureau of Investigation- FBI) की तर्ज़ पर देश की एकमात्र संघीय एजेंसी बनाता है, जो सीबीआई से भी अधिक शक्तिशाली है।
  • यह अधिनियम NIA को भारत के किसी भी हिस्से में आतंकी गतिविधियों पर संज्ञान लेने और राज्य सरकार की अनुमति के बिना किसी भी राज्य में प्रवेश करने तथा लोगों की जाँच एवं गिरफ्तारी के लिए मुकदमा दायर करने की शक्ति देता है।

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अधिनियम के संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य की शिकायतें

  • छत्तीसगढ़ सरकार के अनुसार, यह अधिनियम केंद्र सरकार को जाँच के लिये एक एजेंसी के गठन की अनुमति देता है, जो कि राज्य पुलिस का कार्य है।
  • याचिका में कहा गया है कि यह अधिनियम राज्य को पुलिस के माध्यम से जाँच कराने की उसकी शक्ति का अतिक्रमण करता है, जबकि केंद्र की विवेकाधीन और मनमानी शक्तियों का उल्लेख करता है और राज्य की संप्रभुता का उल्लंघन करता है।
  • गौरतलब है कि राज्य ने अधिनियम की धारा 6 (4), 6 (6), 7, 8 और 10 के प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई है।

NIA अधिनियम, 2008 की वे धाराएँ जिन्हें उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई है-

  • धारा 6 : अनुसूचित अपराधों का अन्वेषण-
    • धारा 6 की उपधारा 4 के अनुसार, यदि केंद्र सरकार की यह राय है कि अपराध अनुसूचित अपराध की श्रेणी में आता है और यह NIA द्वारा जाँच के लिये उपयुक्त मामला है तो केंद्र सरकार NIA को अपराध की जाँच करने का निर्देश देगी।
    • उपधारा 6 के अनुसार, जहाँ कोई निर्देश उपधारा (4) या उपधारा (5) के अधीन दिया गया है वहाँ राज्य सरकार और अपराध की जाँच करने वाला राज्य सरकार का कोई भी पुलिस अधिकारी आगे जाँच नहीं करेगा और तत्काल संबंधित दस्तावेज़ों और अभिलेखों को एजेंसी को प्रेषित करेगा।
  • धारा 7 : अन्वेषण राज्य सरकार को अंतरित करने की शक्ति- इस अधिनियम के अधीन किसी भी अपराध का अन्वेषण करते समय, अभिकरण, अपराध की गंभीरता और अन्य सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए-
    • यदि ऐसा करना समीचीन है, तो राज्य सरकार को यह अनुरोध कर सकेगा कि वह स्वयं जाँच से संबद्ध हो; या
    • केंद्र सरकार के पूर्व अनुमोदन से मामले को अपराध के अन्वेषण और विचारण के लिये राज्य सरकार को अंतरित कर सकेगा।
  • धारा 8 : संसक्त अपराधों की जाँच करने की शक्ति- किसी भी अनुसूचित अपराध की जांच करते समय एजेंसी किसी अन्य अपराध की भी जांच कर सकती है, यदि वह अपराध अनुसूचित अपराध के साथ जुड़ा हुआ है।
  • धारा 10 : अनुसूचित अपराधों का अन्वेषण करने की राज्य सरकार की शक्ति- इस अधिनियम में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय इस अधिनियम की कोई बात किसी विधि के अधीन अन्य अपराधों का अन्वेषण और अभियोजन करने की राज्य सरकार की शक्तियों पर प्रभाव नहीं डालेगी।

NIA की शक्तियों के संदर्भ में हाल में किये गए संशोधन

  • हाल ही में वर्ष 2008 के मूल अधिनियम में संशोधन करते हुए संसद द्वारा राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2019 पारित किया गया।
  • इस विधेयक में NIA को निम्नलिखित अतिरिक्त आपराधिक मामलों की भी जाँच करने की अनुमति देने का प्रावधान है:
    • जाली मुद्रा या बैंक नोटों से संबंधित अपराध
    • प्रतिबंधित हथियारों का निर्माण या बिक्री
    • साइबर आतंकवाद
    • विस्फोटक पदार्थ अधिनियम (Explosive Substances Act), 1908 के तहत अपराध।
  • NIA का क्षेत्राधिकार
    • NIA के अधिकारियों को पूरे देश में ऐसे अपराधों की जाँच करने के संबंध में अन्य पुलिस अधिकारियों के समान ही शक्तियाँ प्राप्त हैं।
    • NIA को भारत के बाहर घटित ऐसे सूचीबद्ध अपराधों की जाँच करने का अधिकार होगा, जो अंतर्राष्ट्रीय संधियों और अन्य देशों के घरेलू कानूनों के अधीन हैं।
    • केंद्र सरकार NIA को ऐसे मामलों की जाँच के निर्देश दे सकती है जो भारत में ही अंजाम दिये गए हों।
    • ऐसे मामलों पर नई दिल्ली स्थित विशेष न्यायालय का न्यायाधिकार होगा।
  • यह संशोधन केंद्र सरकार को NIA परीक्षणों के लिये सत्र अदालतों को विशेष अदालतों के रूप में नामित करने में सक्षम बनाता है।
  • गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन अधिनियम (UAPA), 2019 किसी राज्य के पुलिस महानिदेशक की पूर्व अनुमति के बिना एक NIA अधिकारी को छापा मारने और उन लोगों की संपत्तियों को ज़ब्त करने की अनुमति देता है जिनके आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े होने की आशंका है। जाँच अधिकारी को केवल NIA के महानिदेशक से मंज़ूरी की आवश्यकता होती है।

हाल के संशोधनों से जुड़े मुद्दे

  • संविधान की अनुसूची VII के तहत सार्वजनिक व्यवस्था और पुलिस बल का रखरखाव राज्य सूची का विषय है।
    • यद्यपि आपराधिक कानून समवर्ती सूची और राष्ट्रीय सुरक्षा संघ सूची में शामिल विषय हैं।
  • केंद्र सरकार के पास यह अधिकार है कि वह मानव तस्करी, विस्फोटक अधिनियम के अंतर्गत शामिल अपराध और शस्त्र अधिनियम के दायरे में किये गए कुछ अपराधों की जाँच का उत्तरदायित्व NIA को सौंप सकती है।
    • यद्यपि उपरोक्त अधिनियम के दायरे में आने वाले प्रत्येक अपराध राष्ट्रीय सुरक्षा व संप्रभुता के लिये खतरा नहीं होते और राज्यों के पास इनसे निपटने की क्षमता मौजूद है।
  • संशोधन विधेयक सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act) की धारा 66F को अपराधों का सूचीकरण करते हुए अनुसूची में शामिल करता है।
    • धारा 66F साइबर आतंकवाद से संबंधित है।
    • लेकिन भारत में कोई डेटा सुरक्षा अधिनियम प्रवर्तित नहीं है और साइबर आतंकवाद की कोई परिभाषा तय नहीं की गई है।
  • NIA अधिनियम में लाया गया संशोधन एजेंसी को व्यक्तियों द्वारा किये गए उन अपराधों की जाँच का भी अधिकार देता है जो भारतीय नागरिकों के विरुद्ध हैं या ‘भारत के हित को प्रभावित करने’ वाले हैं।
    • हालाँकि ‘भारत के हित को प्रभावित करने’ वाले वाक्यांश को परिभाषित नहीं किया गया है और सरकारों द्वारा भाषण एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के लिये इसका दुरुपयोग किया जा सकता है।
      • इसके अतिरिक्त जिस विधान के तहत NIA को जाँच करने का अधिकार प्राप्त है, स्वयं वहाँ "भारत के हित को प्रभावित करने" वाले वाक्यांश का अपराध के रूप में उल्लेख नहीं है।

स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस

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