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मोंट्रेक्स कन्वेंशन

  • 03 Mar 2022
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये:

मोंट्रेक्स कन्वेंशन, काला सागर की अवस्थिति, बोस्पोरस और डार्डानेल्स जलडमरूमध्य।

मेन्स के लिये:

यूक्रेन-रूस युद्ध, भारत के हितों पर अन्य देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव।

चर्चा में क्यों?

यूक्रेन पर रूस के युद्ध के जवाब में तुर्की ‘मोंट्रेक्स कन्वेंशन’ को लागू करने को तैयार है।

  • यह घोषणा कि यूक्रेन में युद्ध जैसी स्थिति बन गई है, तुर्की को ‘मोंट्रेक्स कन्वेंशन को लागू करने की अनुमति देती है, जिससे वह रूसी युद्ध जहाज़ों को ‘बोस्पोरस’ और ‘डार्डानेल्स’ जलडमरूमध्य के माध्यम से काला सागर में प्रवेश करने से रोक सकता है।

‘बोस्पोरस’ और ‘डार्डानेल्स’ जलडमरूमध्य की अवस्थिति:

  • बोस्पोरस’ और ‘डार्डानेल्स’ जलडमरूमध्य, जिसे तुर्की जलडमरूमध्य या काला सागर जलडमरूमध्य के रूप में भी जाना जाता है, ‘एजियन सागर’ और काला सागर’ को ‘मरमारा सागर’ से जोड़ते हैं।
  • यह एकमात्र मार्ग है जिसके माध्यम से काला सागर में मौजूद बंदरगाह से भूमध्यसागरीय और उससे आगे अन्य बंदरगाहों तक पहुँचा जा सकता है।
  • लगभग तीन मिलियन बैरल से अधिक तेल, जो कि दैनिक वैश्विक आपूर्ति का लगभग 3% है और जिसका अधिकतर उत्पादन रूस, अज़रबैजान और कज़ाखस्तान में होता है, प्रतिदिन इस जलमार्ग से गुज़रता है।
  • यह मार्ग काला सागर तट से यूरोप और बाकी दुनिया में बड़ी मात्रा में लोहा, इस्पात एवं कृषि उत्पादों को भेजने में भी सहायक है।

‘मोंट्रेक्स कन्वेंशन’ के विषय में:

  • इस अंतर्राष्ट्रीय समझौते पर ऑस्ट्रेलिया, बुल्गेरिया, फ्राँस, ग्रीस, जापान, रोमानिया, यूगोस्लाविया, यूनाइटेड किंगडम, सोवियत संघ और तुर्की द्वारा हस्ताक्षर किये गए थे और यह नवंबर 1936 से प्रभावी हुआ था।
  • जलडमरूमध्य के शासन से संबंधित मोंट्रेक्स कन्वेंशन तुर्की को काला सागर के बीच जल मार्ग पर नियंत्रण प्रदान करता है।
    • क्रीमिया प्रायद्वीप पर सेवस्तोपोल में रूस का एक प्रमुख नौसैनिक अड्डा है।
    • हालाँकि जहाज़ों को भूमध्य सागर और उससे आगे जाने के लिये मोंट्रेक्स कन्वेंशन के तहत तुर्की द्वारा नियंत्रित दो जलडमरूमध्य से गुज़रना पड़ता है।
  • यह डार्डानेल्स और बोस्पोरस जलडमरूमध्य के माध्यम से जहाज़ों और सैन्य युद्धपोतों के गुज़रने की सीमा निर्धारित करता है। मोंट्रेक्स कन्वेंशन में शामिल प्रमुख तत्त्व हैं:
    • युद्ध की स्थिति में यह समझौता तुर्की को नौसैनिक युद्धपोतों के आवागमन को विनियमित करने और संघर्ष में शामिल देशों के युद्धपोतों के लिये जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करने का अधिकार देता है।
    • काला सागर के तटवर्ती देश रोमानिया, बुल्गारिया, जॉर्जिया, रूस या यूक्रेन को जलडमरूमध्य के माध्यम से युद्ध जहाज़ों को भेजने से आठ दिन पहले तुर्की को सूचित करने की आवश्यकता होती है।
      • अन्य देश जिनकी सीमा काला सागर से नहीं लगती है, उन्हें तुर्की को 15 दिनों की अग्रिम सूचना देनी होगी।
  • तुर्की ने पहले भी कन्वेंशन की शक्तियों का इस्तेमाल किया है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान तुर्की ने धुरी शक्तियों को सोवियत संघ पर हमला करने हेतु युद्धपोत भेजने से रोका तथा सोवियत नौसेना को भूमध्य सागर में युद्ध में भाग लेने से रोक दिया था।

वर्तमान संकट में तुर्की की भूमिका:

  • वर्तमान स्थिति में तुर्की सरकार के लिये यह एक कठिन स्थिति है क्योंकि यूक्रेन और रूस दोनों ही उसके लिये ऊर्जा तथा सैन्य व्यापार समझौतों में महत्त्वपूर्ण भागीदार हैं।
  • वर्ष 1952 से तुर्की नाटो का सदस्य है जो रूस को परेशान न करते हुए पश्चिम के साथ अपने संबंधों को मज़बूत करना चाहता है। इन प्रमुख जलडमरूमध्य पर नियंत्रण इसके संतुलनकारी प्रवृत्ति की परीक्षा होगी।
  • इस संदर्भ में तुर्की का मानना है वह इस संधि के एक खंड के आधार पर काला सागर में पहुँचने वाले उन सभी रूसी युद्धपोतों के प्रवेश को नही रोक सकता जो कि इसके तहत पंजीकृत हैं।
  • संधि का अनुच्छेद 19 काला सागर से लगे देशों के लिये एक अपवाद है जो रूसी युद्धपोतों को काला सागर में प्रवेश करने या बाहर निकलने से रोकने की तुर्की की शक्ति को प्रभावी ढंग से कम कर सकता है।
    • युद्ध में शामिल देशों के युद्धपोत जो अपने जल क्षेत्र में न हों और चाहे काला सागर उनके क्षेत्राधिकार में आता हो या न आता हो, वे सभी काला सागर में प्रवेश कर सकते हैं।
  • यह अपवाद रूस को मोंट्रेक्स कन्वेंशन का फायदा उठाने का एक वैकल्पिक तरीका प्रदान करता है, जो कि इसके कुछ जहाज़ों को काला सागर में प्रवेश करने का अवसर प्रदान कर सकता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस  

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