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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

इसरो का 2019 में प्रथम सफल अभियान

  • 25 Jan 2019
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?


हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organization-ISRO) ने PSLV C-44 द्वारा दो उपग्रह माइक्रोसैट-R एवं कलामसेट को कक्षा में स्थापित करने में सफलता हासिल की।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • यह PSLV की उत्तम तकनीक को प्रदर्शित करता है, क्योंकि यह सिर्फ दो इंजनों से संलग्न प्रथम प्रक्षेपण था जिसे PSLV-DL, D नाम से संबोधित किया गया।
  • इस प्रक्षेपण से PSLV के सामान्य 6 स्तरीय संलग्न इंजनों (साइड रॉकेट बूस्टर) का विकल्प प्रदान किया गया है जो पहले की तुलना में ज़्यादा पेलोड ले जाने में सक्षम है।

मिशन का महत्त्व

माइक्रोसेट –R

  • माइक्रोसेट-R एक सैन्य इमेजिंग उपग्रह है, जिसका वज़न 130 किलोग्राम है, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (Defence Research and Development Organization-DRDO) द्वारा बनाया गया है।
  • इसे निचली कक्षा में स्थापित किया गया है। ऐसा पहली बार है जब भारतीय उपग्रह को ISRO द्वारा 274 किमी की ऊँचाई से कम कक्षा में रखा गया है।

कलामसैट

  • ISRO ने स्पेस किड्ज इंडिया के विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए एक उपग्रह, ‘कलामसैट’ को भी लॉन्च किया है, जिसका वज़न सिर्फ 1.26 किलोग्राम है।
  • कलामसैट दुनिया का सबसे छोटा और सबसे हल्का संचार उपग्रह है।
  • स्पेस किड्ज इंडिया (Space Kidz India) एक ऐसा संगठन है जो शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों के लिये नवीन अवधारणाओं को विकसित करने के लिए समर्पित है।

चतुर्थ चरण (PS4) की उपयोगिता

  • उपग्रह को कक्षा में प्रवेश कराने के बाद इसरो ने इस प्रक्षेपण का उपयोग रॉकेट के चतुर्थ चरण की उपयोगिता को प्रदर्शित करने के एक अवसर के रूप में किया।
  • रॉकेट का अंतिम यानि चतुर्थ चरण किसी उपग्रह को उचित गंतव्य तक पहुँचाने के बाद सामान्य रूप से मलबे में बदल जाता है।
  • अब अंतरिक्ष में प्रयोग करने की इच्छुक एजेंसी चौथे चरण का उपयोग तब तक कर सकती है जब तक कि वह प्राकृतिक रूप से विघटित न हो जाए। रॉकेट का चौथा चरण छह महीने से एक साल तक अंतरिक्ष में परिक्रमा करता रहेगा।
  • ISRO का लक्ष्य इस समय-सीमा का उपयोग करना है ताकि इच्छुक एजेंसियों को कम समय के प्रयोगों को चलाने में सक्षम बनाया जा सके।
  • कलामसैट (Kalamsat ) चतुर्थ चरण को अंतरिक्ष के कक्षीय मंच के रूप में उपयोग करने वाला पहला उपग्रह होगा।
  • कलामसैट के साथ प्रयोग टेक-ऑफ से लगभग 1.5 घंटे बाद शुरू होगा और लगभग 14 घंटे तक चलेगा। बाद में PS4 के साथ प्रयोगों की अवधि में धीरे-धीरे सुधार किया जाएगा।

स्रोत – द हिंदू

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