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जैव विविधता और पर्यावरण

केरल में चारु मुसेल का प्रसार

  • 28 May 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये:

चारु मुसेल, अष्टमुडी झील

मेन्स के लिये:

केरल में चारु मुसेल के प्रसार से संबंधित मुद्दे 

चर्चा में क्यों?

मूल रूप से दक्षिण और मध्य अमेरिकी तटों पर पाए जाने वाले आक्रमणशील ‘चारु मुसेल’ (Charru Mussel) का केरल में बहुत तेज़ी से प्रसार हो रहा है, जो एक चिंता का विषय बना हुआ है। 

प्रमुख बिंदु:

  • गौरतलब है कि इस प्रजाति के पारिस्थितिक तंत्र पर पड़ने वाले प्रभाव के साक्ष्य मौजूद नहीं हैं लेकिन फ्लोरिडा में इसके द्वारा विद्युत ऊर्जा संयंत्र प्रणाली को प्रभावित कर आर्थिक नुकसान पहुँचाने के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
  • एक हालिया सर्वेक्षण में कडिनमकुलम, परावुर, एडवा-नादायरा, अष्टमुडी, कायमकुलम इत्यादि स्थानों पर चारु मुसेल काफी अधिक संख्या में पाए गए हैं।
  • कोल्लम ज़िले में स्थित अष्टमुडी झील चारु मुसेल से अत्यधिक प्रभावित है। यहाँ प्रति वर्ग किलोमीटर में इनकी संख्या 11384 है।
  • वर्ष 2018-2019 के बीच अष्टमुडी झील में चारु मुसेल की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई थी।
  • ‘एक्वेटिक बॉयोलॉज़ी एंड फिशरीज़’ (Aquatic Biology and Fisheries) पत्रिका में प्रकाशित एक शोधपत्र के अनुसार, वर्ष 2017 में चक्रवात ओखी (Ockhi) के कारण चारु मुसेल का तेज़ी से प्रसार हुआ है। 
  • संभावना यह भी जताई जा रही है कि चारु मुसेल समुद्री जहाजों से चिपक कर भारतीय तटों पर आए हैं।

चारु मुसेल (Charru Mussel):

Charru-Mussel

  • चारु मुसेल को ‘मायटेला चर्रुअना’ (Mytella Charruana) के रूप में भी जाना जाता है। 
  • चारु मुसेल छोटे और पतले कवच का होता है जिसकी कवच की सतह पर पसलियाँ नहीं होती हैं।  
  • कवच का बाहरी हिस्सा हल्के हरे तथा काले रंग का होता है, जबकि कवच की आंतरिक सतह बैंगनी रंग की होती है।
  • आमतौर पर इसकी लंबाई 20-25 mm होती है, जबकि अब तक इसकी अधिकतम लंबाई 48.7 mm दर्ज की गई है। 
  • वर्ष 1986 में पहली बार फ्लोरिडा में पाए गए चारु मुसेल वर्तमान में मध्य फ्लोरिडा से मध्य जॉर्जिया के तटों तक पाए जाते हैं। 
  • यह अत्यधिक खारे जल में रह सकते हैं परंतु कम तापमान में इनकी सहनशीलता सीमित होती है।

अष्टमुडी झील (Ashtamudi Lake):

  • ‘अष्टमुडी झील’ केरल के कोल्लम ज़िले में स्थित है। इसका आकार आठ-भुजाओं वाला है।
  • झील का पारिस्थितिकी तंत्र अनूठा है और यह भारत के महत्त्वपूर्ण आर्द्रभूमि क्षेत्रों में से एक है। यह झील रामसर (Ramsar) स्थल भी है।
  • अष्टमुडी झील केरल की दूसरी सबसे बड़ी एस्चुरीन प्रणाली (Estuarine System) है। ‘एस्चुरीन प्रणाली’ नदी का वह जलमग्न मुहाना होती है जहाँ स्थल से आने वाले जल और सागरीय खारे जल का मिलन होता है तथा ज्वारीय लहरें क्रियाशील रहती हैं।

आगे की राह:

  • अष्टमुडी झील में लगभग 3000 लोग मत्स्य पालन का कार्य करते हैं। ऐसी स्थिति में चारु मुसेल की संख्या में वृद्धि की वज़ह से लोगों के सामने जीवन-यापन की समस्या उत्पन्न हो सकती है। अतः इस गंभीर समस्या का समाधान शीघ्रता से किया जाना चाहिये।
  • भारत के अन्य भागों में ‘चारु मुसेल’ की उपस्थिति की पहचान शीघ्रता से की जानी चाहिये।
  • एक समिति का गठन कर समग्र आर्थिक नुकसान और जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जाना चाहिये।
  • समुद्री आक्रामक प्रजातियों पर अध्ययन को बढ़ावा देने के साथ ही लोगों को जागरूक किया जाना चाहिये। 

स्रोत: द हिंदू

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