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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

व्यावसायिक सुरक्षा तथा स्वास्थ्य पर विज़न ज़ीरो कांफ्रेंस

  • 16 Mar 2017
  • 8 min read

विजन जीरो और व्‍यावसायिक सुरक्षा तथा स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति एक तीन दिवसीय इंटरनेशनल कांफ्रेंस का आयोजन 15 से 17 मार्च, 2017 को नई दिल्‍ली में किया जा रहा है। भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय ने अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग के माध्‍यम से देश में श्रम मानकों को और मजबूत करने के लिये यह कदम उठाया है।

प्रमुख बिंदु 

  • ‘विजन जीरो’ की अवधारणा को अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍वीकृति प्रदान है। 

  • इस तीन दिवसीय इंटरनेशनल कांफ्रेंस का आयोजन सलाह सेवा और श्रम संस्‍थान महानिदेशालय (Directorate General Factory Advice and Labour Institutes-DGFASLI), भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय (Government of India, Ministry of Labour and Employment) और जर्मनी के जर्मन सोशल एक्‍सीडेंट इंश्‍योरेंस  (German Social Accident Insurance- DGUV) द्वारा इंटरनेशनल सोशल सिक्‍यूरिटी एसोसिएशन (International Social Security Association-ISSA)- मैन्‍यूफैक्‍चरिंग, कंस्‍ट्रक्शन तथा माइनिंग के सहयोग से किया जा रहा है ।

  • भारत सरकार को उम्‍मीद है कि इससे देश में व्‍यावसायिक सुरक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य ( Occupational Safety and Health - OSH) मानकों को बढ़ाने के लिए स्‍वास्‍थ्‍य की स्थिति में सुधार हो सकेगा। 

  • इस सम्‍मेलन में राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर सर्वोत्तम अभ्‍यासों के जरिये लोगों को अपने अनुभव साझा करने का मौका दिया जाएगा । 

  • दूसरी तरफ अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय को भारत में व्‍यावसायिक सुरक्षा तथा स्‍वास्‍थ्‍य के स्‍तर को मूल्‍यांकित करने का मौका मि‍लेगा ।

  • यह कांफ्रेंस ज्ञान, अभ्‍यास तथा अनुभव का आदान-प्रदान करके कार्य के दौरान सुरक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करेगी । 

  • व्‍यावसायिक सुरक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र के विशेषज्ञ संबंधों और आपसी हितों को मजबूत बनाने के लिए एक मजबूत नेटवर्क का निर्माण सुनिश्चित होगा । 

  • इस कांफ्रेंस में 1200 से अधिक राष्‍ट्रीय तथा अंतर्राष्‍ट्रीय स्तर के प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्‍मीद है, जिसमें विनिर्माण, खनन तथा निर्माण क्षेत्र से संबंधित और स्‍वास्‍थ्‍य पेशेवर शामिल हैं। 

  • कांफ्रेंस के दौरान जर्मनी, फ्राँस, चिली तथा कई यूरोपीय देशों के अंतर्राष्‍ट्रीय वक्‍ता अपना वक्तव्य देंगे। भारत की तरफ से ओएसएच ( Occupational Safety and Health-OSH) क्षेत्र में शीर्ष ओएसएच अधिकारी और पेशेवर, सरकारी अधिकारी तथा विशेषज्ञ प्रमुख वक्‍ता होंगे।

  • इस सम्‍मेलन के दौरान ओएसएच-आईएनओएसएच एक्‍सपो ( OSH – INOSH EXPO ) 2017 पर भी एक प्रदर्शनी का आयोजन कि‍या जा रहा है जिसमें व्‍यक्तिगत सुरक्षात्‍मक उपकरणों (personal protective equipment-PPEs), व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य संवर्द्धन, उच्‍च जोखिम प्रबंधन,पर्यावरण संरक्षण तकनीक का प्रदर्शन एक ही छत के नीचे किया जायेगा । 

  • इस प्रदर्शनी में तकनीकी संचार एवं कारोबारी व्यापार में वृद्धि के लिए एक सक्षम मंच उपलब्‍ध कराया गया है। 

  • भारत और यूरोप के लगभग 100 प्रमुख निर्माता एवं आपूर्तिकर्ता  ‘आईएनओएसएच एक्‍सपो’ में भाग ले रहे हैं।  

पृष्ठभूमि

  • देश के श्रमबल की पेशेगत सुरक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य एवं कामकाज की स्थितियों को निरंतर बेहतर करना श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की प्राथमिकता रहा है। 

  • देश में बदलते सामाजिक-आर्थिक परिदृश्‍य और वैश्विक स्‍तर पर हुए तकनीकी बदलावों के अनुरूप भारत सरकार श्रम सुधारों की दिशा में गंभीरतापूर्वक प्रयास कर रही है, ताकि श्रम मानकों का उच्‍च स्‍तर हासिल किया जा सके। 

  • सरकार ‘मेक इन इंडिया’ अभियान पर अपने वैश्विक एजेंडे की दिशा में काम करते हुए देश में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए दृढ़प्रतिज्ञ है। 

  • इन कानूनों पर अमल में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग के जरिए और ज्‍यादा पारदर्शिता  सुनिश्चित करते हुए श्रम कानूनों में सुधार किये जा रहे हैं। इस युक्तिकरण प्रक्रिया से कामगारों के कामकाज की स्थितियां बेहतर होंगी और इसके साथ ही निवेशक देश में निवेश के लिए प्रोत्‍साहित होंगे।

  • डीजीएफएएसएलआई द्वारा एकत्रित की गई सूचनाओं के मुताबिक फैक्‍टरी अधिनियम, 1948 के तहत पंजीकृत कारखानों में घातक दुर्घटनाओं में निरंतर कमी देखी जा रही है। 

  • वर्ष 2014 में घातक दुर्घटनाओं की संख्‍या 1211 रही,जबकि यह संख्‍या वर्ष 2013 में 1417, वर्ष 2012 में 1383 और वर्ष 2011 में 1433 आँकी गई थी। 

  • इसी अवधि के दौरान कारखानों की संख्‍या में बढ़ोतरी होने के बावजूद दुर्घटनाओं की संख्‍या में कमी आई है| विदित हो कि कारखानों की संख्‍या वर्ष 2011 में 325209, वर्ष 2012 में 353684, वर्ष 2013 में 340226 और वर्ष 2014 में 361994 थी।

  • सभी आर्थिक क्षेत्रों में कार्यरत कामगारों की पेशेगत सुरक्षा एवं स्‍वास्‍थ्‍य (ओएसएच) के लिए सरकार प्रतिबध्य नज़र आ रही हैं। वर्ष 2009 में ‘कार्यस्‍थल पर सुरक्षा,स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिदृश्‍य पर राष्‍ट्रीय नीति’ को अपनाने के बाद सरकार की प्रतिबद्धता में वृद्धि हुई है।

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