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भारतीय पशु कल्याण बोर्ड : प्रमुख पहल

  • 15 Jun 2018
  • 13 min read

पृष्ठभूमि

वर्ष 1962 में पशु क्रूरता निवारण कानून, 1960 के खण्ड चार के तहत भारतीय पशु कल्याण बोर्ड का गठन किया गया था। बोर्ड पशु कल्याण से संबंधित कानूनों का देश में सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करता है और इस कार्य से जुड़ी संस्थाओं की मदद करता है तथा केंद्र और राज्य सरकारों को इस संबंध में परामर्श देता है। कानून के मुताबिक बोर्ड में 28 सदस्य हैं जिसमें 6 सांसद हैं (4 लोकसभा से और 2 राज्यसभा से)। बोर्ड का उद्देश्य है कि मनुष्यों को छोड़कर सभी प्रकार के जीवों की पीड़ा से बचाव करना। सरकार ने भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) का मुख्यालय चेन्नई, तमिलनाडु से हरियाणा के फरीदाबाद ज़िले के बल्लभगढ़ में स्थानांतरित कर दिया है।

बोर्ड के प्रमुख कार्य

  • निरंतर अध्ययन के तहत पशुओं के खिलाफ हिंसा रोकने वाले भारत में प्रवृत्त कानूनों से अद्यतन रहना और समय-समय पर इनमें संशोधन करने का सरकार को सुझाव देना।
  • केंद्र सरकार को पशुओं की अनावश्यक पीड़ा या परेशानी रोकने के संदर्भ में नियम बनाने का परामर्श देना।
  • भार ढोने वाले पशुओं के बोझ को कम करने के लिये केंद्र सरकार या स्थानीय प्राधिकरण या अन्य व्यक्ति के माध्यम से पशुओं द्वारा चालित वाहनों के डिज़ाइन में सुधार करना।
  • केंद्र सरकार को पशुओं के अस्पताल में प्रदान की जाने वाली चिकित्सकीय देखभाल एवं ध्यान रखने से सम्बद्ध मामलों पर परामर्श देना और जब कभी बोर्ड ज़रूरी समझे पशु अस्पतालों को वित्तीय एवं अन्य मदद मुहैया कराना।
  • वित्तीय मदद एवं अन्य तरीके से पिंजरा, शरणगाहों, पशु शेल्टर, अभयारण्य इत्यादि के निर्माण या अवस्थापना को बढ़ावा देना जहाँ पशुओं एवं पक्षियों को उस दौरान शरण मिल सके जब वे वृद्ध हो जाते हैं एवं बेकार हो जाते हैं या जब उन्हें संरक्षण की जरूरत होती है।
  • किसी भी ऐसे मामले पर जो पशु कल्याण या पशुओं को अनावश्यक पीड़ा देने एवं हिंसा से संबद्ध हों, केंद्र सरकार को परामर्श देना।

बोर्ड की प्रमुख पहलें 
गोचर/ चरागाह भूमि

  • बोर्ड के सामने सबसे बड़ी चुनौती चरागाहों की घटती संख्या है जिसकी वज़ह से पशुओं को सबसे ज़्यादा तकलीफ सहन करनी पड़ती है क्योंकि उन्हें चारे से लेकर सभी मौलिक आवश्यकताओं का अभाव हो जाता है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि सभी प्रकार के चरागाहों का संरक्षण किया जाना चाहिये और इन्हें केवल पशु कल्याण के लिये प्रयोग किया जाना चाहिये।
  • बोर्ड ने इस संबंध में सभी राज्यों और संघीय क्षेत्रों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किये हैं।

राज्य पशु कल्याण बोर्ड एवं पशुओं के प्रति क्रूरता के निवारण के लिये समितियाँ 

डबलिन सोसाइटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ़ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (DSPCA)

  • पशुओं के प्रति क्रूरता के निवारण के लिये बोर्ड का ज़मीनी स्तर पर अपना नेटवर्क है।
  • 2008 में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य एवं ज़िला स्तर पर ऐसे त्रिस्तरीय बोर्डों और समितियों के गठन का  आदेश दिया था।
  • लेकिन बोर्ड पशुओं के प्रति क्रूरता को रोकने के लिये एक बड़े कार्यक्रम की शुरुआत करने जा रहा है। जिसके तहत बोर्ड राज्य से लेकर ज़िला स्तर पर नेटवर्क तैयार करेगा।
  • पशुओं के प्रति क्रूरता को नियंत्रित करने वाले इस नेटवर्क पर बोर्ड का नियंत्रण होगा और इसे राज्यों से मदद प्राप्त होगी।

आवारा पशु

  • आवारा पशुओं की समस्या भले ही वे गाय, कुत्ते, बिल्लियाँ और बंदरों की हो, हमारे देश में सर्वव्याप्त है।
  • इसलिये सभी राज्यों और संघीय क्षेत्रों को सलाह दी गई है कि इन आवारा पशुओं को शरणस्थल, भोजन एवं जल उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करें अन्यथा इसे क्रूरता माना जाएगा।
  • इसके अलावा बंदरों एवं कुत्तों द्वारा काटे जाने की घटनाओं को रोकने के लिये इनकी जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिये इनके बधियाकरण के कार्यक्रम भी चलाए जाने चाहिये।

बेहतर तालमेल के लिये सलाह

  • बोर्ड ने सभी राज्यों एवं संघीय क्षेत्रों को पशु तालाबों एवं कांजी हाउसों को दोबारा चालू करने और उनकी क्षमता से ज़्यादा पशु वहाँ पर नहीं रखने के निर्देश दिये हैं।
  • बोर्ड इन आदेशों के अनुपालन के लिये निरीक्षण भी करेगा।

केस प्रापर्टी एनिमल रूल्स, 2017 को लागू करना

  • क्योंकि राज्य सरकारों ने इन नियमों को लागू नहीं किया है इसलिये बोर्ड ने सभी राज्यों एवं संघीय क्षेत्रों को इन नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिये लिखा है, साथ ही न्यूनतम दर तय करने की सलाह भी दी है कि पशुओं को क्रूरता का सामना ना करना पड़े।

स्मार्ट शहरों एवं महानगरों में पशु संरक्षण गृह एवं पशुओं के लिये शरणस्थली स्थापित करना 

  • सभी नगरों को पर्यावरण के लिये अनुकूल तरीके से विकसित करने एवं माननीय प्रधानमंत्री की संकल्पना के अनुसार वहां पर पशुओं की सुरक्षा और देखभाल किये जाने हेतु बोर्ड ने सभी राज्यों एवं सभी क्षेत्रों को संवेदनशील बनाने का निर्णय लिया है।
  • इसके लिये बोर्ड ने केंद्रीय नगर विकास मंत्रालय के साथ इन मामलों को राज्यों और संघीय क्षेत्रों के साथ उठाया है।
  • AWBI बनाम ए. नागराज, 2014 मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार बोर्ड उन सभी विभागों एवं संस्थाओं के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करेगा जो कि न्यायालय के निर्देशों एवं बोर्ड के परामर्श का पालन नहीं करेंगे।

बोर्ड की मौजूदा योजनाओं में सुधार

A. AWBI योजना कार्यक्रम (नियमित)

  • गोशालाओं एवं पिंजरा केंद्रों को आर्थिक मदद।
  • संरक्षण, चरा, भोजन, दवाइययाँ और पानी तथा निकास की व्यवस्था के विकास एवं संरक्षण गृह की मरम्मत जैसे मामले मदद के योग्य।
  • न्यूनतम 50 एकड़ के चरागाह के विकास के लिये 50 लाख रुपए तक की मदद।
  • सराहनीय कार्य करने वालों का पुरस्कृत करना।
  • 2018-19 के बजट में 22 करोड़ रुपए की मांग।

B. प्राकृतिक आपदा से प्रभावित पशु

  • प्राकृतिक आपदा में बचाए गए पशुओं की देखभाल के लिये वित्तीय मदद।
  • अवैध तस्करी एवं वध से बचाए गए पशुओं की मदद के लिये वित्तीय सहायता प्रस्तावित।
  • राज्य बोर्डों इत्यादि के लिये अस्थायी संरक्षण गृह, भोजन, चारे की व्यवस्था के लिये तत्काल सहायता।
  • 2018-19 के बजट में 10 करोड़ रुपए की मांग।

C. संरक्षण गृह योजना

  • संरक्षण गृह, चिकित्सालय, पानी की टंकी और निकास की व्यवस्था।
  • पशुओं की संख्या के आधार पर बोर्ड या स्थानीय इकाई द्वारा मंजूर किफायती डिज़ाइन।
  • 22,50,000/- रुपए की अधिकतम सहायता।
  • 2018-19 के बजट में 10 करोड़ रुपए की मांग।

D. पशु चिकित्सा वाहन योजना 

  • पशुओं एवं चारे का परिवहन।
  • प्रति पशु कल्याण संस्था को प्रति वाहन अधिकतन 4.5 लाख रुपए की मदद।
  • आपात स्थिति में पशुओं की सहायता के लिये एंबुलेंस की व्यवस्था।
  • प्रत्येक राज्य या विभाग को प्रति एंबुलेंस के लिये अधिकतम 15 लाख रुपए की मदद।
  • आरंभ में प्रत्येक राज्य और संघीय क्षेत्र को कम-से-कम एक एंबुलेंस और हॉटलाइन मुहैया कराना।
  • 2018-19 के बजट में 10 करोड़ रुपए की मांग।

E. एबीसी-एआर विशेष पायलट परियोजना

  • पशुओं की जनसंख्या नियंत्रण और रैबीज प्रतिरोधी वैक्सीन के लिये संबंधित संस्थाओं की मदद।
  • इस पायलट प्रोजेक्ट को प्रत्येक राज्य की 2 नगरपालिकाओं में लागू किया जाएगा।
  • 2018-19 के बजट में 30 करोड़ रुपए की मांग।

F. पीएसी को सुचारु बनाना

  • पारदर्शिता एवं कार्यकुशलता बढ़ाने के लिये पीएसी का पुनर्गठन।
  • अभी पीएसी समितियों में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रतिनिधि, पीसीसीएफ हरियाणा, पशु पालन विभाग हरियाणा के महानिदेशक, फिल्म निर्माता एवं पत्रकार शामिल हैं।
  • प्रदर्शन दिखाने वाले पशुओं के चलचित्रों इत्यादि में फिल्मांकन से पहले की अनुमति, पंजीकरण एवं अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को जल्दी ही ऑनलॉइन किया जाएगा।
  • प्रदर्शन दिखाने वाले पशुओं के संबंध में पूर्व सूचना को अनिवार्य बना दिया गया है ताकि एक जाँच दल द्वारा उनके प्रति किसी प्रकार की क्रूरता की जाँच की जा सके और इसे रोका जा सके।
  • पशुओं के वध स्थलों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनका वध मानवीय तरीके से और कानून के अनुसार किया जा रहा है।

अन्य पहलें

  • सभी तरह के प्रपत्रों का सरलीकरण।
  • ज़िला एवं राज्य स्तर पर संबंधित अधिकारियों का प्रशिक्षण 1 जुलाई 2018 से आरंभ होगा।
  • यदि कोई पशु संरक्षण अधिकारी पाँच वर्ष से ज़्यादा किसी संरक्षण गृह का संचालन कर रहा है तो इसे नियमित बनाया जाएगा या स्थानीय प्रशासन इसकी ज़िम्मेदारी लेगा।

नई पहलें 

  • प्रत्येक जिले में बीमार पशुओं की मदद के लिये टेलीफोन सहायता सेवा स्थापित करना।
  • पशुओं की बलि के विरुद्ध अभियान चलाना।
  • सभी स्मार्ट शहरों एवं महानगरों में पशुओं के लिये संरक्षण गृह एवं चरागाहों के विकास के लिये नगरीय विकास मंत्रालय के साथ मिलकर इस मामले को सभी राज्य सरकारों एवं संघीय क्षेत्रों के साथ उठाना ताकि पशुओं को शहर के बाहर न फेंका जाए या उनका वध ना किया जाए।
  • चारगाहों से जुड़े मुद्दों को उठाने एवं आवारा पशुओं के लिये भोजन एवं संरक्षण की व्यवस्था करने के लिये प्रमुख सचिवों एवं अतिरिक्त प्रमुख सचिवों (राजस्व) के साथ मामले को उठाना ताकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
  • जलीकट्टू का सफलतापूर्वक आयोजन जिसमें पशुओं के प्रति क्रूरता की कोई भी घटना सामने नहीं आई।
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