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भारत-विश्व

भारत सरकार और विश्व बैंक में 50 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त वित्तीय सहायता हेतु समझौता

  • 02 Jun 2018
  • 9 min read

चर्चा में क्यों ?

भारत सरकार और विश्व बैंक के बीच प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत ऋण उपलब्ध कराने के लिये एक समझौते पर हस्ताक्षर किये गए। पीएमजीएसवाई के अंतर्गत ग्रामीण सड़क परियोजना को अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिये विश्व बैंक 50 करोड़ डॉलर का ऋण उपलब्ध कराएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित इस परियोजना के अंतर्गत 7,000 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जानी हैं, जिसमें से 3,500 किलोमीटर का निर्माण हरित प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से किया जाएगा।

  • विश्व बैंक वर्ष 2004 के शुरुआत से ही पीएमजीएसवाई को सहयोग दे रहा है। अभी तक इसके तहत बिहार, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मेघालय, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे आर्थिक रूप से कमज़ोर और पहाड़ी राज्यों में 180 करोड़ डॉलर के कर्ज के माध्यम से निवेश किया जा चुका है।
  • इसके अंतर्गत लगभग 35,000 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण और सुधार किया जा चुका है, जिससे लगभग 80 लाख लोगों को फायदा हुआ है।
  • इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (आईबीआरडी) से 50 करोड़ डॉलर के कर्ज़ के साथ 3 वर्ष की अतिरिक्त अवधि (ग्रेस पीरियड) और 10 वर्ष की परिपक्वता अवधि जुड़ी हुई है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana-PMGSY)

  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का प्राथमिक उद्देश्य हर मौसम के अनुकूल सड़कों का निर्माण कर सम्पर्क स्थापित करना है।
  • इस कार्यक्रम के अतंर्गत खेत से बाज़ार तक सम्पर्क सुनिश्चित करने के लिये उन्नयन-घटक भी हैं, जिसमें मौजूदा ग्रामीण सड़कों के बेहतरीकरण का लक्ष्य है। 
  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-II का उद्देश्य मौजूदा चयनित ग्रामीण सड़कों का उन्नयन कर सड़क नेटवर्क को जीवंत बनाने के मापदंड पर आधारित है। 
  • ग्रामीण अवसंरचना के निर्माण द्वारा निर्धनता निवारण की सम्पूर्ण रणनीति में ग्रामीण-हब एवं वृद्धि-केंद्रों का विकास अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। वृद्धि केंद्र/ग्रामीण-हब बाज़ार, बैंकिंग एवं अन्य सेवा संबंधी सुविधाएँ मुहैया करवाते हैं जिनसे स्वरोज़गार एवं जीविकोपार्जन के अवसर सृजित होते हैं।
  • प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत ग्रामीण सड़कों के निर्माण में अपारंपरिक सामग्रियों जैसे- बेकार प्लास्टिक, कोल्ड-मिक्स, फ्लाई एश, तांबे एवं लोह की धातु इत्यादि का उपयोग किया जा रहा है एवं हरित प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
  • प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत तय कुल सड़कों के 15% सड़कों का निर्माण नवीन हरित प्रौद्योगिकी के ज़रिये किया जा रहा है, जैसे बेकार प्लास्टिक, कोल्ड-मिक्स, फ्लाई एश, तांबे एवं लोहे की धातु इत्यादि।
  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सड़कों की गुणवत्ता एवं निर्माण की गति के संबंध में नागरिक शिकायतों के पंजीकरण के लिये “मेरी सड़क” नाम से एक मोबाइल एप्लीकेशन की शुरुआत की गई है।

वर्तमान स्थिति : समस्याएँ एवं समाधान

  • अतिरिक्त वित्तपोषण से हरित प्रौद्योगिकी और कम कार्बन वाली डिज़ाइन व सड़क निर्माण की जलवायु अनुकूल तकनीकों से निर्माण की प्रौद्योगिकी में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। अब ज़्यादा ग्रामीण समुदायों की आर्थिक अवसरों और सामाजिक सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित होगी।
  • 46 लाख किलोमीटर की मौजूदा सड़क का पर्याप्त रखरखाव भी एक बड़ी चुनौती के तौर पर उभर रहा है। मौजूदा सड़क नेटवर्क के कई हिस्से या तो कमज़ोर स्थिति में हैं या बाढ़, भारी बारिश, अचानक बादल फटने और भू-स्खलन जैसी घटनाओं से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था और ग्रामीण आजीविका पर निर्भर समुदायों व परिवारों को सहयोग देने के लिये यह सुनिश्चित करना अहम होगा कि बुनियादी ढाँचे का निर्माण किया जाए और जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुइ इनका रखरखाव हो।
  • इस परियोजना से यह सुनिश्चित होगा कि कैसे ग्रामीण सड़कों की रणनीति और योजना के साथ जलवायु अनुकूल निर्माण को एकीकृत किया जा सकता है।

विश्व बैंक के सहयोग से क्या लाभ प्राप्त होंगे?

  • इस अतिरिक्त वित्तपोषण के अंतर्गत पीएमजीएसवाई और बैंक की भागीदारी से महज वित्तपोषण के अलावा हरित तकनीक, कम कार्बन वाली डिज़ाइन और नई तकनीकों के इस्तेमाल से हरित और जलवायु अनुकूल निर्माण के माध्यम से ग्रामीण सड़क नेटवर्क के प्रबंधन पर ज़ोर दिया जाएगा। ऐसा निम्नलिखित उपायों के माध्यम से किया जाएगाः
    ♦ बाढ़, जलभराव, बादल फटने, तूफान, भूस्खलन, खराब जल निकासी, अत्यधिक कटाव, भारी बारिश और ऊँचे तापमान से प्रभावित प्रमुख क्षेत्रों की पहचान के लिये डिज़ाइन की प्रक्रिया के दौरान जलवायु जोखिम का आकलन करना।
    ♦ जल की सुगम निकासी के लिये पर्याप्त जलमार्गों और सबमर्सिबल सड़कों, कंकरीट ब्लॉक पेवमेंट्स के इस्तेमाल, जल निकासी में सुधार के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का विशेष रखरखाव।
    ♦ पर्यावरण अनुकूल सड़कों के डिज़ाइन और नई तकनीकों के उपयोग, जिनमें टूटे हुए पत्थरों के स्थान पर स्थानीय सामग्री और रेत, स्थानीय मिट्टी, फ्लाई ऐश, ब्रिक क्लिन वेस्ट तथा अन्य सामग्रियों जैसे औद्योगिक उपोत्पादों का इस्तेमाल किया जाता है।
    ♦ सड़कों और पुलों के लिये प्री-फैब्रिकेटेड/प्री-कास्ट यूनिट्स के उपयोग के माध्यम से नवीन पुलों और पुलियों का निर्माण, जो भूकंप और पानी के दबाव की स्थिति में टिके रहने में सक्षम होते हैं।
    ♦ पहाड़ी इलाकों की सड़कों के निर्माण में पहाड़ों की कटाई हेतु सामग्री का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने और उनके निस्तारण की समस्या का समाधान के लिये जैव अभियांत्रिकी उपायों के इस्तेमाल, निकासी में सुधार और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों के लिये अन्य उपाय तथा पर्याप्त ढाल सुरक्षा उपलब्ध कराना।
  • अतिरिक्त वित्तीय सहायता से निर्माण और रखरखाव में महिलाओं के लिये रोजगार के अवसर तैयार करके लिंग भेद भी कम किया जाएगा।
  • पिछली परियोजना में उत्तराखंड, मेघालय और हिमाचल प्रदेश में 200 किलोमीटर पीएमजीएसवाई सड़कों के नियमित रखरखाव के लिये महिला स्व-सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से समुदाय आधारित रखरखाव अनुबंध की योजना बनाई गई थी। 
  • एसएचजी द्वारा नियंत्रित रखरखाव अनुबंधों को 5 राज्यों की 500 किलोमीटर सड़कों तक बढ़ाया जाएगा।

परियोजना के सभी भाग जलवायु के लिहाज से खासे लाभकारी और भारत में जीएचजी उत्सर्जन को न्यूनतम करने के लिये सड़क एजेंसियों के वास्ते मददगार हैं। सड़कों में सुधार से ही वार्षिक तौर पर जीएचजी उत्सर्जन में 26.8 लाख टन की कमी आएगी और सड़क संपदा मूल्य में 9 अरब डॉलर की वार्षिक बचत होगी व वाहन परिचालन की ऊँची लागत के रूप में इतनी ही धनराशि की बचत होगी।

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