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‘क्राइस्टचर्च कॉल’ से जुड़ा भारत

  • 25 May 2019
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत ‘क्राइस्टचर्च कॉल’ (Christchurch Call) पहल से जुड़ गया है। गौरतलब है कि ‘क्राइस्टचर्च कॉल’ का उद्देश्य इंटरनेट से आतंकवाद और चरमपंथ से संबंधित हिंसात्मक सामग्रियों को हटाना है।

प्रमुख बिंदु

  • न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री, जैकिंडा अर्डर्न (New Zealand Prime Minister Jacinda Ardern) और फ्राँसीसी राष्ट्रपति, इमैनुएल मैक्रोन (French President Emmanuel Macron) ने तकनीकी क्षेत्र के प्रमुखों और दुनिया भर की सरकारों का ‘क्राइस्टचर्च कॉल’ अपनाने हेतु आह्वान किया था।
  • ‘क्राइस्टचर्च कॉल’ को अपनाते हुए दुनिया भर की कई सरकारों और साथ ही बड़ी तकनीकी कंपनियों ने मिलकर आतंकवाद और चरमपंथ से संबंधित हिंसात्मक सामग्रियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई।

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  • इस सम्मलेन में ब्रिटेन, फ्राँस, कनाडा,आयरलैंड, सेनेगल, इंडोनेशिया,जोर्डन एवं यूरोपियन यूनियन के नेताओं के साथ ही बड़ी तकनीकी कंपनियाँ जैसे- ट्विटर, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट आदि शामिल हुए।

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  • भारत की तरफ से इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology) के सचिव अजय प्रकाश साहनी ने इस सम्मलेन में भाग लिया।

पृष्ठभूमि

  • 15 मार्च, 2019 को दुनिया ने आतंकवाद का एक भयावह रूप देखा जिसमें न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च में दो मस्जिदों पर हुए एक आतंकवादी हमले को 17 मिनट तक फेसबुक समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइव दिखाया गया था। गौरतलब है कि इस हमले में 51 लोग मारे गए और 50 घायल हुए हो गए थे।
  • ‘क्राइस्टचर्च कॉल’ पहल 15 मार्च को मस्जिदों पर हुए इन भयावह हमलों की पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर ही तैयार की गई जिसका उद्देश्य चरमपंथियों द्वारा इंटरनेट के दुरुपयोग को रोकना है।
  • ऐसी हिंसक सामग्रियों से प्रेरित होकर श्रीलंका के चर्च में ईस्टर रविवार (Easter Sunday) की प्रार्थना के दौरान आतंकी हमले किये गए।

‘क्राइस्टचर्च कॉल’ दस्तावेज़ में शामिल प्रतिबद्धताएँ

  • सरकारों से अपेक्षित प्रतिबद्धताएँ
  • शिक्षा एवं अन्य महत्त्वपूर्ण माध्यमों की सहायता से आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के कारकों से निपटना।
  • उपयुक्त कानूनों का प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित करना।
  • नैतिक मानकों को लागू करने हेतु मीडिया आउटलेट को प्रोत्साहित करना।
  • उचित कार्रवाई पर विचार करना इत्यादि।
  • ऑनलाइन सेवा प्रदाताओं से अपेक्षित प्रतिबद्धताएँ
  • सामुदायिक मानकों या सेवा की शर्तों (Community Standards or Terms of Service) को लागू करने हेतु अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
  • ‘रियल टाइम समीक्षा हेतु हिंसक सामग्री की पहचान’ करना।
  • लाइवस्ट्रीमिंग के माध्यम से आतंकवाद और चरमपंथ से संबंधित हिंसात्मक सामग्री को प्रसारित करने से उत्पन्न विशिष्ट जोखिम को कम करने के लिये तत्काल प्रभावी उपायों को लागू करना।
  • नियमित और पारदर्शी सार्वजनिक रिपोर्टिंग व्यवस्था लागू करना।
  • एल्गोरिदम और अन्य प्रक्रियाओं के संचालन की समीक्षा करना जो उपयोगकर्त्ताओं का ध्यान आतंकवाद और चरमपंथ से संबंधित हिंसात्मक सामग्री की ओर ले जाते हैं।
  • क्रॉस-इंडस्ट्री प्रयासों को समन्वित और मज़बूत बनाने हेतु एक साथ काम करना।

निष्कर्ष

  • ‘क्राइस्टचर्च कॉल’ इस धारणा पर आधारित है कि एक मुक्त, पारदर्शी और सुरक्षित इंटरनेट समाज को असाधारण लाभ प्रदान करता है।
  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है किंतु किसी को भी आतंकवाद और चरमपंथ से संबंधित हिंसात्मक सामग्री बनाने और उसे ऑनलाइन साझा करने का अधिकार नहीं है।
  • वास्तव में, क्राइस्टचर्च कॉल फॉर एक्शन एक दुर्लभ उदाहरण है जिस पर सरकारों और निजी क्षेत्र ने एकसमान प्रतिज्ञा ली है।

स्रोत- बिज़नेस स्टैंडर्ड

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