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भारतीय जीनोम डेटासेट: इंडीजेन

  • 28 Oct 2020
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये:

इंडीजेन कार्यक्रम, जीनोम अनुक्रमण, जीनोम रेफरेंस कंसोर्टियम (GRCh38)  

मेन्स के लिये:

मानव जीनोम प्रोजेक्ट 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद’ (Council of Scientific and Industrial Research- CSIR) के वैज्ञानिकों द्वारा  1029 भारतीयों के ‘जीनोम अनुक्रमण’ (Genome Sequencing) पर व्यापक संगणना विश्लेषण परिणाम जारी किये गए।

प्रमुख बिंदु:

  • प्रोजेक्ट पर शोध कार्य CSIR– 'जिनोमिकी और समवेत जीव विज्ञान संस्थान,, दिल्ली (CSIR-Institute of Genomics and Integrative Biology - IGIB) तथा 'कोशिकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र’ हैदराबाद (CSIR-Centre for Cellular and Molecular Biology, CCMB) द्वारा किया गया है। 
  • यह शोध कार्य ‘इंडीजेन’ (IndiGen) जीनोम अनुक्रमण कार्यक्रम का ही एक भाग है।  
    • जीनोम अनुक्रमण (Genome Sequencing) के तहत डीएनए अणु के भीतर न्यूक्लियोटाइड के सटीक क्रम का पता लगाया जाता है। 
    • इसके अंतर्गत डीएनए में मौज़ूद चारों तत्त्वों- एडानीन (A), गुआनीन (G), साइटोसीन (C) और थायामीन (T) के क्रम का पता लगाया जाता है।

इंडीजेन जीनोम प्रोजेक्ट: 

1000-Genome-Project

  • भारत 1.3 बिलियन से अधिक जनसंख्या के साथ विश्व का दूसरा सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है। समृद्ध आनुवंशिक विविधता के बावजूद भारत की वैश्विक जीनोम अध्ययनों में बहुत कम भागीदारी है। 
  • इस अंतराल को भरने की दिशा में CSIR  द्वारा अप्रैल 2019 में ‘इंडीजेन’ (IndiGen) कार्यक्रम शुरू किया गया है। 
  • इंडीजेन जीनोम परियोजना (IndiGen Genome Project) के तहत 1000 से अधिक लोगों के जीनोम अनुक्रमण का अध्ययन किया गया है।
  • कार्यक्रम के तहत देश भर से 1029 स्वस्थ भारतीयों के संपूर्ण 'जीनोम अनुक्रमण' का कार्य पूरा किया गया है।

प्रोजेक्ट का महत्त्व:

आनुवंशिक विभेदता/वेरिएंट का संग्रह: 

  • इंडीजीनोम प्रोजेक्ट के तहत संग्रहीत डेटा संसाधन, संपूर्ण भारतीय आबादी की  आनुवंशिक विभेदता के संबंध में जानकारी प्रदान करते हैं।
  • ये संसाधन न केवल आबादी के स्तर पर बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी आनुवंशिकी में शोधकर्त्ताओं और चिकित्सकों के लिये उपयोगी अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकते हैं।

चिकित्सकीय अनुप्रयोग:

  • आनुवंशिक विभेदता वर्गीकरण का अनुप्रयोग सटीक दवा देने तथा दवाओं के परिणामों में सुधार करने में किया जा सकेगा।
  • आनुवंशिक डेटा संसाधन का उपयोग रोग वाहकों की स्क्रीनिंग में बायोमार्करों की पहचान करने, आनुवंशिक रोगों के कारकों को निर्धारित करने, बेहतर नैदानिक प्रणाली का विकास करने, फार्माकोजेनेटिक वेरिएंट डेटा के माध्यम से बेहतर थेरेपी चिकित्सा प्रदान करने में किया जा सकता है।

महामारी प्रबंधन:

  • इंडीजेन कार्यक्रम वर्तमान और भविष्य की महामारियों के प्रति देश की प्रतिक्रिया को मज़बूती प्रदान करने वाले जीनोमिक्स और भारत की जीनोमिक विविधता को समझने की क्षमता में वृद्धि करेगा।

विशिष्ट जीनोम डेटासेट: 

  • जीनोम डेटा संसाधन का उपयोग शोधकर्त्ताओं को भारतीय-विशिष्ट संदर्भ में जीनोम डेटासेट का निर्माण करने और कुशलता से हेप्लोटाइप (युग्म विकल्पियों का विशिष्ट संयोजन) जानकारी प्रदान करने में किया जा सकेगा।
  • यह शोध कार्य जीनोम रेफरेंस कंसोर्टियम (GRCh38) के मानकों के अनुरूप है।

जीनोम रेफरेंस कंसोर्टियम (GRCh38):

  • सर्वप्रथम वर्ष 2001 में 'मानव जीनोम प्रोजेक्ट' के तहत ' ह्यूमन जीनोम रेफरेंस’ को संग्रहीत किया गया था।
    • मानव जीनोम अनुक्रमण आधारित जैव चिकित्सा अनुसंधान के लिये 'ह्यूमन रेफरेंस जीनोम' (HRG) मूलभूत आवश्यकता है।
  • वर्ष 2009 में जीनोम रेफरेंस कंसोर्टियम (GRC) द्वारा 19वें 'ह्यूमन रेफरेंस जीनोम' संस्करण में ‘जीनोम रेफरेंस कंसोर्टियम’-37 (GRCh37) जारी किया गया था जिसे अक्सर ह्यूमन जीनोम 19 (HG19) के रूप में भी संदर्भित किया जाता है।
  • GRCh37 रेफरेंस का जीनोम डेटा विश्लेषण में कई वर्षों तक बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया था।
  • GRCh38 वर्तमान में उपलब्ध सबसे सटीक ‘मानव जीनोम अनुक्रम’ रेफरेंस है।  इसका उपयोग अंतर्राष्ट्रीय जीनोम अनुक्रमण शोध कार्यों में एक मानक के रूप में किया जा रहा है। 

आगे की राह:

  • मानव जीनोम प्रोजेक्ट का पूरी तरह से लाभ हासिल करने के लिये भारत को अपनी आबादी की आनुवंशिक जानकारी को संग्रहीत करने और अगली पीढ़ी के जीनोमिक्स पर शोध करने में सक्षम मानव शक्ति को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है।
  • सरकार को जीनोम अनुक्रम से जुड़ी नैतिकता संबंधी, पेटेंट संबंधी और डेटा सुरक्षा संबंधी चिंताओं का निराकरण करने की दिशा में आवश्यक उठाने की दिशा में काम करना चाहिये।

स्रोत: द हिंदू

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