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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

हाइड्रोजन सेल तकनीकी आधारित कारें

  • 18 Dec 2019
  • 8 min read

प्रीलिम्स के लिये

ईंधन सेल, हाइड्रोजन सेल तकनीकी क्या है?

मेन्स के लिये

जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में ईंधन सेल की भूमिका

चर्चा में क्यों?

वर्ष 2020 में टोक्यो ओलंपिक से पहले जापान हज़ारों हाइड्रोजन सेल तकनीकी (Hydrogen Cell Technology) या ईंधन सेल (Fuel Cell) आधारित कारों को बाज़ार में लाने के लिये तैयार है।

  • जापान ईंधन सेल तकनीकी के प्रयोग के क्षेत्र में एक अग्रणी देश है। वायु प्रदूषण के नियंत्रण के संदर्भ में यह आवश्यक है कि भारत स्वच्छ उर्जा के प्रयोग हेतु जापान की तकनीक से सीख ले।

fuel-cell

हाइड्रोजन ईंधन सेल कैसे कार्य करता है?

  • ईंधन सेल विद्युत वाहन (Fuel Cell Electric Vehicles-FCEV) एक ऐसा यंत्र है जो कि ईंधन स्रोत के तौर पर हाइड्रोजन तथा एक ऑक्सिकारक के प्रयोग से विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया (Electrochemical) द्वारा विद्युत का निर्माण करता है।
  • ईंधन सेल हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन को समिश्रित कर विद्युत धारा का निर्माण करता है तथा इस प्रक्रिया में जल उपोत्पाद (Byproduct) होता है।
  • परंपरागत बैटरियों की भाँति ही हाइड्रोजन ईंधन सेल भी रासायनिक उर्जा को विद्युत उर्जा में परिवर्तित करता है परंतु FCEV लंबे समय तक वहनीय है तथा भविष्य की इलेक्ट्रिक कारों के लिये एक आधार है।

क्या FCEV एक परंपरागत वाहन या विद्युत वाहन है?

  • हालाँकि ईंधन सेल भी एक साधारण बैटरी की भाँति रासायनिक उर्जा को विद्युत उर्जा में परिवर्तित करता है परंतु यह उर्जा को संचय नहीं करता।
  • इसके विपरीत यह आतंरिक दहन इंजन (Internal Combustion Engine-IC Engine) की भाँति, जिसमें लगातार पेट्रोल, डीज़ल तथा ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन की आपूर्ति पर निर्भर है।
  • लेकिन आतंरिक दहन इंजन की भाँति ईंधन सेल के अंदर कोई गतिमान (Movable) हिस्सा नहीं होता तथा इसमें कोई आतंरिक दहन नहीं होता। इस लिहाज़ से यह परंपरागत IC-Engine से अधिक दक्ष और विश्वसनीय है।
  • अभी तक इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles-EV) को मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया जाता है जो कि इस प्रकार है:
    • बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (Battery Electric Vehicles-BEV): ये वाहन पूर्ण रूप से रिचार्जेबल बैटरी द्वारा जनित विद्युत उर्जा से चलते हैं।
    • हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन (Hybrid Electric Vehicle-HEV): इन परंपरागत वाहनों में आतंरिक दहन इंजन के साथ ही विद्युत प्रणोदन प्रणाली (Electric Propulsion System) का उपयोग किया जाता है।
    • इस प्रकार के हाइब्रिड इंजन में IC-Engine के कार्य करने के दौरान बैटरी चार्ज होती रहती है। इस प्रकार के वाहन में ईंधन की बचत होती है।
    • प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन (Plug-in Hybrid Vehicles-PHEV): इन वाहनों में भी HEV की भाँति IC-Engine तथा बैटरी द्वारा जनित इलेक्ट्रिक पॉवर का प्रयोग होता है लेकिन इसमें बैटरी को किसी बाहरी स्रोत (चार्जिंग पॉइंट) से चार्ज किया जाता है।
  • इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक में FCEVs एक नई पीढ़ी की शुरुआत है। इसके अंतर्गत इलेक्ट्रिक मोटर को चलाने के लिये हाइड्रोजन का प्रयोग किया जाता है।
  • यद्यपि FCEVs को इलेक्ट्रिक वाहन ही माना जाता है परंतु उनमें ईंधन भरने की प्रक्रिया तथा उनकी दूरी तय करने की क्षमता पारंपरिक कारों और ट्रकों के सामान ही है।
  • हाइड्रोजन तकनीकी के विकास से यातायात तथा विद्युत ऊर्जा के निर्माण में मदद मिलेगी। इसके अलावा विश्व में हाइड्रोजन के निर्माण के लिये आवश्यक तत्त्वों की उपलब्धता भी पर्याप्त मात्रा में है।
  • जापान द्वारा हाइड्रोजन ईंधन सेल को दो रूपों में विकसित किया जा रहा है जिसके माध्यम से स्वच्छ तथा विश्वसनीय उर्जा का विकास किया जा सके। इसके तहत अस्पतालों, बैंकों तथा हवाई अड्डों पर स्थैतिक ईंधन सेल (Stationary Fuel Cell) तथा वाहनों में वहनीय ईंधन सेल (Portable Fuel Cell) का प्रयोग किया जाएगा।

ईंधन सेल के लाभ:

  • पारंपरिक दहन आधारित तकनीकी के विपरीत ये अत्यंत कम मात्रा में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करते हैं तथा इनके द्वारा उत्सर्जित वायु से स्वास्थ्य को भी कोई नुकसान नहीं होता है।
  • ईंधन सेल में प्रयोग किये गए हाइड्रोजन से ऊष्मा तथा उतोत्पाद के तौर पर जल का निर्माण होता है और ये पारंपरिक दहन इंजनों से अधिक दक्ष हैं।
  • अन्य बैटरी द्वारा संचालित वाहनों के विपरीत FCEVs को किसी चार्जिंग पॉइंट की आवश्यकता नहीं होती बल्कि इनमें ईंधन के तौर पर हाइड्रोजन भरी जाएगी तथा एक बार पूरा टैंक भरने पर ये 300 किलोमीटर की दूरी तय कर सकेंगे।

ईंधन सेल की समस्याएँ:

  • हालाँकि FCEVs किसी ऐसी गैस का उत्सर्जन नहीं करते जिससे भूमंडलीय ऊष्मन (Global Warming) की समस्या उत्पन्न हो परंतु हाइड्रोजन के निर्माण में जीवाश्म ईंधन का प्रयोग किया जाता है जो कि परोक्ष रूप से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को बढ़ावा देगा।
  • सुरक्षा के लिहाज़ से भी हाइड्रोजन को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं क्योंकि हाइड्रोजन पेट्रोल से भी अधिक ज्वलनशील होता है तथा इसके कारण विस्फोट होने की संभावना जताई जाती है।
  • इसके अलावा हाइड्रोजन आधारित वाहनों की कीमत पारंपरिक वाहनों की कीमत से काफी अधिक होगी तथा इसके लिये ईंधन केंद्र भी मात्र कुछ ही स्थानों पर मौजूद हैं।

भारत में ईंधन सेल का भविष्य:

  • भारत इलेक्ट्रिक कारों के मामले में अभी शुरूआती स्तर पर है तथा इलेक्ट्रिक वाहनों की श्रेणी में केवल BEV को ही शामिल किया जाता है।
  • BEV इलेक्ट्रिक वाहनों पर सरकार द्वारा 12 प्रतिशत टैक्स निर्धारित किया गया है लेकिन अन्य HEV तथा FCEVs पर IC-Engine वाले वाहनों की भाँति ही 43 प्रतिशत टैक्स लागू है।
  • भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय उर्जा मंत्रालय के अंतर्गत कई संस्थानों के साथ मिलकर विभिन्न शोध कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा आई.आई.टी. बॉम्बे तथा अलौह पदार्थ तकनीकी विकास केंद्र, हैदराबाद के नेतृत्त्व में दो हाइड्रोजन स्टोरेज नेटवर्क का समर्थन किया गया है। इस परियोजना में 10 अन्य संस्थान शामिल हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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