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क्षुद्रग्रह से खतरा

  • 05 Sep 2019
  • 8 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में नासा ने यह संभावना व्यक्त की है कि दो विशाल क्षुद्रग्रह 2000 QW7 और 2010 CO1 14 सितंबर को 24 घंटे की अवधि के भीतर पृथ्वी के पास से गुज़र सकते हैं।

प्रमुख बिंदु:

  • नासा के सेंटर फॉर नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट स्टडीज़ (Centre for Near Earth Object Studies - CNEOS) द्वारा दोनों क्षुद्रग्रहों को नियर अर्थ ऑब्जेक्ट (Near Earth Object ) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • क्षुद्रग्रह 2000 QW7 23000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से परिक्रमा कर रहा है। इस क्षुद्रग्रह के 290 मीटर लंबे, 650 मीटर चौड़े और 828 मीटर ऊँचे होने का अनुमान लगाया गया है। इस क्षुद्रग्रह की खगोलीय इकाई (Astronomical Units- AU) 0.035428 होगी, जो पृथ्वी से लगभग 5.3 मिलियन किलोमीटर दूर है। उल्लेखनीय है कि एक खगोलीय इकाई सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी के बराबर होती है।
  • क्षुद्रग्रह 2010 CO1 दूसरा खगोलीय पिंड है जिसकी खोज जनवरी 2010 में की गई थी। इस क्षुद्रग्रह के 260 मीटर चौड़े और 120 मीटर लंबे होने की संभावना व्यक्त की गई है साथ ही यह 51,696 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से सूर्य की परिक्रमा कर रहा है। इस क्षुद्रग्रह को नासा द्वारा अपोलो क्षुद्रग्रह (Apollo Asteroid) के रूप में वर्गीकृत किया गया है क्योंकि यह एक निकट-पृथ्वी क्षुद्रग्रह (Near-Earth asteroid ) है और इसकी कक्षा विस्तृत है।

क्षुद्रग्रह (Asteroid):

  • क्षुद्रग्रह सूर्य की परिक्रमा करने वाले छोटे चट्टानी पदार्थ होते हैं। क्षुद्रग्रह द्वारा सूर्य की परिक्रमा ग्रहों के समान ही की जाती है लेकिन इनका आकार ग्रहों की तुलना में बहुत छोटा होता है।
  • हमारे सौरमंडल में बहुत सारे क्षुद्रग्रह हैं। उनमें से ज़्यादातर क्षुद्रग्रह मुख्य क्षुद्रग्रह बेल्ट (Main Asteroid Belt) में पाए जाते हैं। यह मुख्य क्षुद्रग्रह बेल्ट मंगल और बृहस्पति ग्रहों की कक्षाओं के बीच के क्षेत्र में स्थित है।
  • कुछ क्षुद्रग्रह ग्रहों के कक्षीय पथ में पाए जाते हैं। इसका तात्पर्य यह है कि ये क्षुद्रग्रह, ग्रह की कक्षा में प्रवेश कर खतरा उत्पन्न कर सकते हैं।
  • नासा द्वारा दी गई चेतावनी में इसी समस्या की ओर इंगित किया गया है कि क्षुद्रग्रह पृथ्वी की परिक्रमण कक्षा में प्रवेश कर गए हैं।

क्षुद्रग्रह (Asteroid) पर अनुसंधान के निहितार्थ:

  • हमारे सौरमंडल की अन्य वस्तुओं के निर्माण के दौरान ही क्षुद्रग्रहों का निर्माण हुआ है, इसलिये ये अंतरिक्ष चट्टान वैज्ञानिकों को ग्रहों के इतिहास और सूर्य के बारे में बहुत सारी जानकारी दे सकते हैं।
  • उल्कापिंडों और क्षुद्रग्रहों का निर्माण पृथ्वी के निर्माण के दौरान ही हुआ, इसलिये इनके अध्ययन के माध्यम से पृथ्वी की आंतरिक और बाह्य रासायनिक और भौतिक संरचना की बेहतर समझ विकसित की जा सकती है।
  • पृथ्वी की तुलना में इनका आकार छोटा होने से इनकी बाह्य और आंतरिक दोनों भागों में आसानी से अनुसंधान किया जा सकता है। कई क्षुद्रग्रहों का आकार बहुत ही छोटा यानि कंकड़ जितना होता है।
  • अधिकांश क्षुद्रग्रह विभिन्न प्रकार की चट्टानों से बने होते हैं लेकिन कुछ क्षुद्रग्रह निकेल और लोहे जैसी धातुओं से बने हैं।
  • नासा ने क्षुद्रग्रहों पर अनुसंधान के लिये कई अंतरिक्ष मिशनों को लॉन्च किया है। शूमेकर अंतरिक्षयान (Shoemaker Spacecraft) वर्ष 2001 में पृथ्वी के पास स्थित क्षुद्रग्रह एरोस (Eros) पर उतरा था।
  • इसके पश्चात् डॉन अंतरिक्षयान (Dawn Spacecraft) को वर्ष 2011 में क्षुद्रग्रह बेल्ट की परिक्रमा के लिये भेजा गया था, वहाँ पर इस अंतरिक्षयान ने वेस्टा (Vesta) क्षुद्रग्रह का अध्ययन किया। वेस्टा का आकार एक एक छोटे ग्रह के समान है।
  • डॉन अंतरिक्षयान (Dawn Spacecraft) ने वर्ष 2012 में वेस्टा के बाद इस क्षुद्रग्रह बेल्ट के बौने ग्रह सेरेस (Dwarf Planet Ceres) की परिक्रमण कक्षा में प्रवेश किया था।

क्षुद्रग्रह (Asteroid) के पृथ्वी से टकराने का प्रभाव:

  • एपोफिस 99942 (Apophis 99942) क्षुद्रग्रह एक खगोलीय वस्तु है जिसकी पृथ्वी के पास से गुजरने की भविष्यवाणी की गई है। इस क्षुद्रग्रह द्वारा पृथ्वी को कोई खतरा नहीं है लेकिन इस घटना को लेकर वैज्ञानिक समुदाय में उत्सुकता पैदा हो गई है।
  • अगर भविष्य में क्षुद्रग्रह पृथ्वी से टकराता है तो बड़े स्तर पर नुकसान हो सकता है।
  • क्षुद्रग्रह के पृथ्वी से टकराने के कारण पहले भी बहुत से भौगोलिक परिवर्तन हुए हैं वर्तमान में पृथ्वी पर बहुत सारी ऐसी झीलें विद्यमान हैं।
  • एक अध्ययन के अनुसार डायनासोर के विलुप्ति के कारणों में से क्षुद्रग्रह के टकराने को भी एक कारण माना गया था इसलिये भविष्य में इस प्रकार की घटनाएँ विनाशकारी हो सकती हैं।
  • वर्तमान समय में परमाणु संयंत्रों की बड़ी संख्या पृथ्वी पर मौज़ूद है इसलिये यदि छोटे आकार का क्षुद्रग्रह भी पृथ्वी से टकराता है तो इसके विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।

क्षुद्रग्रहों (Asteroid) को पृथ्वी से टकराने से रोकने हेतु प्रयास:

  • क्षुद्रग्रह टकराव विक्षेपण आकलन (Asteroid Impact Deflection Assessment- AIDA) मिशन नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का संयुक्त एक प्रयास है।
  • इस मिशन के तहत अंतरिक्ष यान को डबल डिडिमोस क्षुद्रग्रहों (Double Didymos Asteroids) से टकराया जाएगा। इसके बाद दूसरे अंतरिक्षयान द्वारा दुर्घटना स्थल का सर्वेक्षण किया जाएगा।
  • 11-13 सितंबर, 2019 को विश्वभर के क्षुद्रग्रह शोधकर्त्ता और अंतरिक्षयान इंजीनियर इस मिशन की प्रगति पर रोम में चर्चा करेंगे।
  • इसी मिशन की तरह नासा एक अन्य मिशन, डबल क्षुद्रग्रह टकराव परीक्षण (Double Asteroid Impact Test- DART) को वर्ष 2021 में प्रक्षेपित करने की योजना बना रहा है।

हाल ही में स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क ने कहा है कि इस प्रकार के विशाल क्षुद्रग्रह के टकराने से पृथ्वी पर भारी नुकसान होगा, साथ ही अब तक इसके बचाव करने का कोई स्थायी तरीका नहीं निकला जा सका है। इसलिये बदलते भौगोलिक परिवेश के मद्देनज़र इस प्रकार की घटनाओं से निपटने के लिये कुछ स्थायी समाधान निकाले जाने चाहिये।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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