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भारतीय अर्थव्यवस्था

डिजिटल कर और टेक कंपनियाँ

  • 02 Apr 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये

डिजिटल कर

मेन्स के लिये 

डिजिटल कर से संबंधित निर्णय का प्रभाव

चर्चा में क्यों?

गूगल और फेसबुक जैसी दिग्गज अमेरिकी टेक कंपनियाँ भारत के नए डिजिटल कर (Digital Tax) को कुछ समय के लिये टालने की मांग कर रही हैं।

प्रमुख बिंदु

  • बीते सप्ताह आयोजित कॉन्फ्रेंस वार्ता में शीर्ष प्रौद्योगिकी कंपनियों के अधिकारियों ने सरकार से कम-से-कम छह महीने तक यह कर लागू न करने की मांग करने का निर्णय लिया था।
  • ध्यातव्य है कि बीते दिनों भारत सरकार ने घोषणा की थी कि 1 अप्रैल, 2020 से देश में प्रदान की जाने वाली डिजिटल सेवाओं के लिये सभी विदेशी बिलों पर 2 प्रतिशत कर लगाया जाएगा।
    • यहाँ विदेशी बिलों से अभिप्राय उन बिलों से है जिनमें कंपनियाँ भारत में ग्राहकों को प्रदान की जाने वाली सेवाओं की भुगतान राशि विदेश में प्राप्त करती हैं।
  • यह कर ई-कॉमर्स सेवाएँ प्रदान करने वाली कंपनियों पर भी देय होगा। 
  • साथ ही यह कर उन कंपनियों पर भी लागू होगा जो ऑनलाइन विज्ञापन के माध्यम से भारतीय ग्राहकों को लक्षित करती हैं।
    • उल्लेखनीय है कि यह नया कर वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत किये गए बजट का हिस्सा नहीं था, इसे कुछ समय पूर्व बजट 2020-21 में संशोधन के माध्यम से शामिल किया गया था।
    • विशेषज्ञों के अनुसार, नए कर की शुरुआत महामारी के समय राजस्व संग्रहीत करने के एक उपाय के रूप में प्रतीत हो रहा है।
  • उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व फ्रांँस ने भी बड़ी टेक कंपनियों पर कर लागू करने की योजना बनाई थी, किंतु गूगल ने फ्रांँस के इस निर्णय का विरोध किया था।
    • हालाँकि गूगल के विरोध और अमेरिकी सरकार के हस्तक्षेप के पश्चात् फ्रांँस ने इस कर को कुछ समय तक टालने का निर्णय लिया है।

क्यों आवश्यक है कर को टालना?

  • भारत की डिजिटल कर योजना ऐसे समय में आई है जब गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियाँ भारत में अपने व्यवसाय के विस्तार की योजना बना रही हैं, क्योंकि भारत दुनिया के तेज़ी से बढ़ते क्लाउड कंप्यूटिंग बाज़ारों में से एक है।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग के अलावा गूगल का भारत के डिजिटल भुगतान बाज़ार में भी एक विशेष स्थान है। कंपनी ने भारतीय ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए ‘तेज़’ (Tez) नाम से एक विशिष्ट डिजिटल भुगतान एप भी लॉन्च किया था, कुछ समय पश्चात् इस मोबाइल एप का नाम परिवर्तित कर ‘गूगल पे’ (Google Pay) कर दिया गया है।
    • अनुमानानुसार, भारत का मोबाइल भुगतान बाज़ार वर्ष 2023 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच जाएगा, जो कि वर्ष 2018 में 200 बिलियन डॉलर था।
  • भारत का नया डिजिटल कर गूगल जैसी बड़ी कंपनियों की विस्तार परियोजनाओं के समक्ष एक बड़ी बाधा बन सकता है। यह कर ऐसे समय में आया है, जब विश्व की लगभग सभी कंपनियाँ COVID-19 महामारी के कारण संकट का सामना कर रही हैं।

आगे की राह

  • भारत द्वारा शुरू किया गया यह नया कर भले ही कोरोनावायरस (COVID-19) के कारण उत्पन्न आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिये एक उपाय हो, किंतु यह कर भारत के समक्ष कई चुनौतियाँ उत्पन्न करेगा।
  • भारत और अमेरिकी के मध्य बीते कई वर्षों से कर व्यवस्था को लेकर तनाव बना हुआ है और इस नए कर के कारण दोनों देशों के संबंधों पर प्रभाव पड़ेगा।
  • आवश्यक है कि इस विषय को लेकर सभी हितधारकों से वार्ता की जाए और यथासंभव संतुलित उपाय खोजने का प्रयास किया जाए।

स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स

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