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जैवविविधता और पर्यावरण

गिल-ऑक्सीजन परिसीमन सिद्धांत

  • 08 Nov 2019
  • 3 min read

प्रीलिम्स के लिये:

गिल-ऑक्सीजन सीमा सिद्धांत,प्रभाव

मेन्स के लिये:

गिल-ऑक्सीजन सीमा सिद्धांत, प्रभाव

चर्चा में क्यों?

हाल ही में वैज्ञानिकों ने महासागरों में मछलियों के वितरण को गिल-ऑक्सीजन परिसीमन सिद्धांत (Gill-Oxygen Limitation Theory-GOLT) के आधार पर स्थापित किया है।

गिल-ऑक्सीजन सीमा सिद्धांत

  • यह सिद्धांत मछली की श्वसन क्रिया पर आधारित है जिसे गिल-ऑक्सीजन परिसीमन सिद्धांत के रूप में वर्णित किया गया है।
  • जलवायु परिवर्तन पृथ्वी पर जीवन को विभिन्न तरीकों से प्रभावित करता है जिनमें से एक महासागरों में मछलियों की स्थिति तथा उनका महासागरों में वितरण भी शामिल है।
  • वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मछलियाँ ध्रुवों (Poles) की ओर विस्थापित होंगी। इस सिद्धांत के द्वारा मछलियों के ध्रुवों की ओर विस्थापन हेतु उत्तरदायी जैविक कारकों की व्याख्या की गई है।

यह कैसे कार्य करता है?

  • इस सिद्धांत के अनुसार, गर्म जल में ऑक्सीजन की कमी होती है, इस कारण मछलियों को ऐसे परिवेश में साँस लेने में कठिनाई होती है
  • गर्म जल मछलियों के उपापचय (Metabolism) में भी बढ़ोतरी करता है जिसके कारण मछली की ऑक्सीजन की मांग बढ़ जाती है।
  • मछली की आयु में वृद्धि होने के साथ ही उनकी ऑक्सीजन की मांग में भी वृद्धि होती है।
  • गलफड़ों का पृष्ठीय क्षेत्र (द्विआयामी) शरीर के बाकी हिस्सों (त्रिआयामी) के साथ समान गति से नहीं बढ़ता है।
  • बड़ी मछली का पृष्ठीय क्षेत्र उसके शरीर के आयतन के सापेक्ष छोटा होता है।
  • परिणामतः मछलियाँ ऑक्सीजन की आवश्यकता की पूर्ति हेतु अपने मूल निवास के समान तापमान वाले जल की ओर विस्थापित हो जाती हैं।

प्रभाव

  • पिछले 100 वर्षों में वैश्विक स्तर पर समुद्री सतह के तापमान में लगभग 0.13 ° C प्रति दशक की दर से वृद्धि हुई है, इसलिये मछलियों के लिये उपयुक्त जल ध्रुवों की ओर एवं अधिक गहराई पर पाया जाने लगा है।
  • यह स्थिति कुछ मछली प्रजातियों के उनके मूल निवास में विस्थापित होने का कारण हो सकता है। विस्थापन की यह प्रक्रिया 50 किलोमीटर प्रति दशक की दर से भी अधिक हो सकती है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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