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शासन व्यवस्था

निशुल्क खाद्यान्न योजना

  • 31 Dec 2022
  • 10 min read

प्रिलिम्स के लिये:

राष्ट्रीय खाद्य और सुरक्षा अधिनियम, 2013, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना

मेन्स के लिये:

राष्ट्रीय खाद्य और सुरक्षा अधिनियम, 2013, सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने 1 जनवरी, 2023 से एक वर्ष के लिये राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत सभी पात्र परिवारों को निशुल्क खाद्यान्न (चावल, गेहूँ तथा मोटे अनाज) प्रदान करने के लिये एक अधिसूचना जारी की।

मोटे अनाज (Coarse Cereals):

  • मोटे अनाज पारंपरिक रूप से देश के अल्प संसाधन वाले कृषि-जलवायु क्षेत्रों में उगाए जाते हैं।
    • कृषि-जलवायु क्षेत्र फसलों और किस्मों की एक निश्चित श्रेणी के लिये उपयुक्त प्रमुख जलवायु के संदर्भ में भूमि की एक इकाई है। 
  • ज्वार, बाजरा, मक्का, जौ, रागी (Finger millet) और अन्य छोटे कदन्न जैसे कोदो (Kodo), कंगनी या टांगुन (Foxtail), चेना  (Proso) एवं सावाँ (Barnyard) एक साथ मोटे अनाज (Coarse Cereals) कहलाते हैं।
    • ज्वार, बाजरा, मक्का, जौ, रागी और अन्य छोटे कदन्न (कोदो, कंगनी या टांगुन, चेना एवं सावाँ) पोषक अनाज (Nutri-cereals) भी कहलाते हैं। 
  • मोटे अनाज पोषक तत्त्वों से भरपूर सामग्री के लिये जाने जाते हैं और इनमें सूखा सहिष्णु, प्रकाश-असंवेदनशीलता और जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन आदि जैसी विशेषताएँ विद्यमान होती हैं।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013:

  • अधिसूचित
    • 10 सितंबर, 2013
  • उद्देश्य
    • इसका उद्देश्य एक गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिये लोगों को वहनीय मूल्‍यों पर उचित गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्‍न की पर्याप्‍त मात्रा उपलब्‍ध कराते हुए उन्‍हें खाद्य और पोषण सुरक्षा प्रदान करना है।
  • कवरेज
    • लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) के तहत रियायती दर पर खाद्यान्न प्राप्त करने के लिये ग्रामीण आबादी के 75 प्रतिशत और शहरी आबादी के 50 प्रतिशत का कवरेज किया गया है।
    • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) समग्र तौर पर देश की 81.35 करोड़ आबादी को कवर करता है।
  • पात्रता:
    • राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्राथमिकता वाले परिवारों को TPDS के तहत कवर किया जाना है।
    • अंत्योदय अन्न योजना के तहत आने वाले परिवार।
  • प्रावधान:
    • प्रतिमाह प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम खाद्यान्न, जिसमें चावल 3 रुपए किलो, गेहूँ 2 रुपए किलो और मोटा अनाज 1 रुपए किलो दिया जाता है।
    • हालाँकि अंत्योदय अन्न योजना के तहत मौजूदा प्रतिमाह प्रति परिवार 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्रदान करना जारी रहेगा।
    • गर्भवती महिलाओं और स्‍तनपान कराने वाली माताओं को गर्भावस्‍था के दौरान तथा बच्चे के जन्‍म के 6 माह बाद भोजन के अलावा कम-से-कम 6000 रुपए का मातृत्त्व लाभ प्रदान किये जाने का प्रावधान है।
    • 14 वर्ष तक के बच्चों के लिये भोजन की व्यवस्था।
    • खाद्यान्न या भोजन की आपूर्ति नहीं होने की स्थिति में लाभार्थियों को खाद्य सुरक्षा भत्ता।
    • ज़िला और राज्य स्तर पर शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना। 

इस संबंध में सरकार की पहलें:

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स: 

प्रश्न. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत किये गए प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2018)

  1. केवल 'गरीबी रेखा से नीचे (BPL) की श्रेणी में आने वाले परिवार ही सब्सिडी वाले खाद्यान्न प्राप्त करने के पात्र हैं। 
  2. परिवार में 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र की सबसे अधिक उम्र वाली महिला ही राशन कार्ड निर्गत किये जाने के प्रयोजन से परिवार की मुखिया होगी।
  3. गर्भवती महिलाएँ एवं दुग्ध पिलाने वाली माताएँ गर्भावस्था के दौरान और उसके छह महीने बाद तक प्रतिदिन 1600 कैलोरी वाला राशन घर ले जाने की हकदार हैं। 

उपर्युत्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? 

(a) केवल 1 और 2    
(b) केवल 2 
(c) केवल 1 और 3    
(d) केवल 3  

उत्तर: (b) 

व्याख्या:  

  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली और लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) के माध्यम से सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर बल दिया गया है। 5 जुलाई, 2013 को अधिनियमित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) ने खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण को कल्याण से अधिकार आधारित दृष्टिकोण में बदलाव को चिह्नित किया। 
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 की मुख्य विशेषताएँ: 
  • 75% ग्रामीण आबादी और 50% शहरी आबादी को TPDS के तहत प्रतिमाह 5 किलोग्राम प्रति व्यक्ति की समान पात्रता के साथ कवर किया जाएगा। 
  • गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और 6 महीने से 14 वर्ष की आयु के बच्चे एकीकृत बाल विकास सेवाओं (ICDS) तथा मध्याह्न भोजन (MDM) योजनाओं के तहत निर्धारित पोषण मानदंडों के अनुसार भोजन के हकदार होंगे। 6 वर्ष तक के कुपोषित बच्चों के लिये उच्च पोषण मानदंड निर्धारित किये गए हैं। 
  • गर्भवती महिलाएंँ और स्तनपान कराने वाली माताएंँ भी कम-से-कम 6,000 रुपए का मातृत्व लाभ पाने की हकदार होंगी। 
  • NFSA के कार्यान्वयन से पहले राज्य सरकारों द्वारा मुख्य रूप से तीन प्रकार के राशन कार्ड जारी किये जाते थे जैसे कि गरीबी रेखा से ऊपर (APL), गरीबी रेखा से नीचे (BPL) और अंत्योदय (AAY) राशन कार्ड अलग-अलग रंगों के होते हैं। NFSA, 2013 के अनुसार, APL और BPL समूहों को फिर से दो श्रेणियों- गैर-प्राथमिकता और प्राथमिकता में वर्गीकृत किया गया है। अतः कथन 1 सही नहीं है। 
  • राशन कार्ड जारी करने के उद्देश्य से परिवार की 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की सबसे बड़ी महिला को घर की मुखिया होगी। अत: कथन 2 सही है। 
  • गर्भवती महिलाएँ और स्तनपान कराने वाली माताएँ 600 कैलोरी ऊर्जा तथा प्रतिदिन 18-20 ग्राम प्रोटीन के पूरक आहार के रूप में माइक्रोन्यूट्रिएंट फोर्टिफाइड फूड और/या एनर्जी डेंस फूड के रूप में राशन प्राप्त करने की हकदार हैं। अत: कथन 3 सही नहीं है।  

अतः विकल्प (b) सही है। 


मेन्स:

प्रश्न. अब तक भी भूख और गरीबी भारत में सुशासन के समक्ष सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं। मूल्यांकन कीजिये कि इन भारी समस्याओं से निपटने में क्रमिक सरकारों ने किस सीमा तक प्रगति की है। सुधार के लिये उपाय सुझाइए। (2017)

प्रश्न. खाद्यान्न वितरण प्रणाली को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिये सरकार द्वारा कौन से सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं?  (2019)

प्रश्न. भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं? इसे प्रभावी और पारदर्शी कैसे बनाया जा सकता है? (2022)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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