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जम्मू-कश्मीर में होगा पहला निवेशक शिखर सम्मेलन

  • 04 Jul 2019
  • 3 min read

चर्चा में क्यों?

राज्य में निवेश बढ़ाने और राज्य के संबंध में चली आ रही गलत धारणाओं को समाप्त करने के उद्देश्य से जम्मू-कश्मीर इस वर्ष अपने पहले निवेशक शिखर सम्मेलन (Investor Summit) की मेज़बानी करेगा।

मुख्य बिंदु :

  • जम्मू-कश्मीर का यह पहला निवेशक शिखर सम्मेलन श्रीनगर में सितंबर-अक्तूबर के मध्य आयोजित किया जाएगा।
  • आयोजन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इस सम्मेलन में भारत के शेष राज्यों के अतिरिक्त कम-से-कम आठ अन्य देशों की भागीदारी की उम्मीद की जा रही है।
  • जम्मू-कश्मीर के इस पहले शिखर सम्मेलन में उसके मुख्य क्षेत्रकों जैसे - पर्यटन, बागवानी और हस्तशिल्प आदि के अतिरिक्त बिजली और विनिर्माण क्षेत्रों पर भी ज़ोर दिया जाएगा।
  • निवेश विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य में अत्यधिक निवेश न होने का प्रमुख कारण वैश्विक स्तर पर राज्य की नकारात्मक छवि है।
  • इस शिखर सम्मेलन से यह आशा की जा रही है कि यह वैश्विक पटल पर राज्य की नकारात्मक छवि को परिवर्तित करने में मदद करेगा।
  • इस संदर्भ में भूमि संबंधी कानून बाधक बन रहे हैं क्योंकि जम्मू कश्मीर में भूमि के स्वामित्व को नियंत्रित करने वाले कानून राज्य के बाहर से आने वाले किसी भी व्यक्ति को राज्य में भूमि या अचल संपत्ति खरीदने की अनुमति नहीं देते हैं।
  • हालाँकि वर्ष 1978 में पारित भूमि अनुदान विधेयक (the Land Grants Bill) के अनुसार, राज्य सरकार के पास बाहर से आने वाले किसी भी व्यक्ति को राज्य में 99 वर्षों के लिये भूमि पट्टे पर देने की शक्ति है।
  • राज्य सरकार इस चुनौती का सामना करने के लिये राज्य की कुछ भूमि को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में नामांकित कर सकती है और पट्टे पर दी जाने वाली भूमि की अवधि भी बढ़ा सकती है।
  • लेकिन इस प्रकार के सभी सुझाव सदैव ही राज्य में आम नागरिकों की आलोचना और विरोध का शिकार रहे हैं।

वर्तमान में जम्मू-कश्मीर राष्ट्रपति शासन के अधीन है जिसे पिछले सप्ताह संसद में वोटिंग के बाद 6 महीनों के लिये बढ़ा दिया गया है।

स्रोत: द हिंदू

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