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जीव विज्ञान और पर्यावरण

‘फिलामेंट-फ्री केरल’

  • 10 Feb 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये:

कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लैंप, फिलामेंट बल्ब, फिलामेंट-फ्री केरल

मेन्स के लिये:

केरल द्वारा कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लैंप, फिलामेंट बल्ब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के निहितार्थ

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केरल सरकार द्वारा सीएफएल (CFL-Compact Fluorescent Lamps) और फिलामेंट बल्ब (Filament Bulbs) की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की घोषणा की गई है।

मुख्य बिंदु:

  • केरल सरकार के अनुसार, यह प्रतिबंध नवंबर 2020 से सतत् उर्जा नीति (Sustainable Energy Policy) के तहत लगाया जाएगा।
  • केरल इस प्रकार के प्रतिबंध की घोषणा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
  • केरल सरकार द्वारा हाल ही में पेश किये गए अपने बजट में ऊर्जा क्षेत्र के लिये 1,765 करोड़ रुपए आवंटित किये गए हैं, वहीं केरल सरकार को सौर ऊर्जा उपकरणों से 500MW बिजली उत्पादन की उम्मीद है।

पृष्ठभूमि:

  • सरकार द्वारा यह घोषणा वर्ष 2018 में राज्य के ‘उर्जा केरल मिशन’ (Urja Kerala Mission) के हिस्से के रूप में परिकल्पित ‘फिलामेंट-फ्री केरल’ (Filament-free Kerala) नामक सरकारी योजना को प्रारंभ करने के लिये की गई है।

योजना का कार्यान्वयन:

  • ‘फिलामेंट-फ्री केरल’ नामक योजना का कार्यान्वयन केरल राज्य विद्युत बोर्ड (Kerala State Electricity Board-KSEB) और ऊर्जा प्रबंधन केंद्र, केरल (Energy Management Centre, Kerala) द्वारा किया जाएगा।
  • इस योजना के तहत सभी उपभोक्ताओं को LED बल्ब (Light-Emitting Diode- LED) प्रदान किये जाएंगे।
  • राज्य में उपभोक्ता मौजूदा फिलामेंट बल्ब के बदले KSEB वेबसाइट पर LED बल्ब के लिये ऑर्डर दे सकते हैं।
  • LED बल्ब के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिये सरकार द्वारा नौ वॉट के बल्ब को काफी कम कीमत पर बेचा जा रहा है।
  • केरल सरकार के अनुसार, राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों तथा स्ट्रीट लाइट्स (Streetlights) में प्रयुक्त बल्बों को LED बल्बों में परिवर्तित किया जाएगा।

योजना प्रारंभ करने की घोषणा का उद्देश्य:

  • यह योजना पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता को कम करने और नवीकरणीय स्रोतों जैसे-सौर और जल-विद्युत की अधिकतम क्षमता स्थापित करने के लिये केरल सरकार की दीर्घकालिक सतत् ऊर्जा नीति का हिस्सा है।
  • LED बल्ब फिलामेंट या सीएफएल बल्ब की तुलना में ऊर्जा-कुशल होते हैं, इसलिये यह कम अपशिष्ट का उत्पादन करते हैं।
  • इसके अतिरिक्त फिलामेंट बल्ब में पारा तत्त्व होता है, जो टूटने पर प्रकृति में प्रदूषक का कार्य करता है।

योजना से संबंधित अन्य तथ्य:

  • KSEB द्वारा घरों और आवासीय परिसरों की छतों पर सौर पैनल स्थापित करने की योजना फिलामेंट-फ्री केरल योजना की दिशा में एक बढाया गया एक कदम है।
  • वर्ष 2019 में कासरगोड (Kasaragod) जिले की पीलीकोड (Peelikode) पंचायत पूरी तरह से फिलामेंट-मुक्त देश की पहली पंचायत बन गई है।
  • केरल सरकार द्वारा पीलीकोड पंचायत को ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में पहल के लिये वित्तीय सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।
  • केरल सरकार के अनुसार, सार्वजनिक खपत के लिये राज्य में बड़े पैमाने पर लगभग 2.5 करोड़ LED बल्बों का उत्पादन किया गया है।

भारत में LED बल्ब के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिये किये गए अन्य प्रयास:

  • उजाला योजना:
    (Unnat Jeevan by Affordable LED and Appliances for All -UJALA):
    • उजाला योजना की शुरुआत वर्ष 2015 में ‘राष्ट्रीय एल.ई.डी. कार्यक्रम’ (National LED Programme) के रूप में की गई थी। इस योजना का उद्देश्य कम लागत पर LED बल्ब उपलब्ध कराकर ऊर्जा की बचत करना और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना है।
  • राष्ट्रीय सड़क प्रकाश कार्यक्रम:
    (Street Lighting National Programme-SLNP):
    • SLNP देश में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के लिये सरकार द्वारा चलाई गई एक योजना है। इसकी शुरुआत 5 जनवरी, 2015 को की गई थी तथा इसके तहत सरकार का लक्ष्य देश में 3.5 करोड़ पारंपरिक स्ट्रीट लाइटों को ऊर्जा कुशल LED लाइट्स से बदलना है।
  • सौभाग्य योजना:
    • इस योजना को सर्वप्रथम सितंबर 2017 में आरंभ किया गया था और इसे दिसंबर 2018 तक पूरा किया जाना था, लेकिन बाद में इसकी समयावधि को 31 मार्च, 2019 तक बढ़ा दिया गया।
    • सौभाग्य योजना का शुभारंभ ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण सुनिश्चित करने के लिये किया गया था।
    • इस योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा बैटरी सहित 200 से 300 वॉट क्षमता का सोलर पावर पैक दिया गया, जिसमें हर घर के लिये 5 LED बल्ब, एक पंखा भी शामिल था।

आगे की राह:

केरल सरकार द्वारा घोषित ‘फिलामेंट-फ्री केरल’ जैसी योजनाओं को देश के अन्य राज्यों द्वारा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में प्रयोग के लिये व्यापक तौर पर स्वीकार किया जाना चाहिये क्योंकि इससे ऊर्जा की कम खपत के साथ-साथ लोगों को अच्छी रोशनी भी प्राप्त होगी।

स्रोत- इंडियन एक्सप्रेस

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