दृष्टि ज्यूडिशियरी का पहला फाउंडेशन बैच 11 मार्च से शुरू अभी रजिस्टर करें
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स


शासन व्यवस्था

गन्ने हेतु अतिरिक्त भुगतान

  • 07 Aug 2023
  • 10 min read

प्रिलिम्स के लिये:

गन्ना, उचित और लाभकारी मूल्य (Fair and Remunerative Price- FRP)

मेन्स के लिये:

कृषि मूल्य निर्धारण, भारतीय अर्थव्यवस्था में चीनी उत्पादन, गन्ना उद्योग के समक्ष चुनौतियाँ

चर्चा में क्यों? 

भारत सरकार ने सहकारी चीनी मिलों द्वारा किसानों को गन्ना हेतु किये गए अतिरिक्त मूल्य भुगतान को "व्यावसायिक व्यय" के रूप में दावा करने की अनुमति प्रदान करके एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाया है।

गन्ने हेतु अतिरिक्त भुगतान का मुद्दा:

  • गन्ना भारत में एक प्रमुख फसल है, खासकर महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में।
  • केंद्र प्रत्येक वर्ष गन्ने के लिये उचित और लाभकारी मूल्य निर्धारित करता है, यह चीनी मिलों द्वारा किसानों को उनके गन्ने की खरीद के लिये भुगतान की जाने वाली न्यूनतम राशि है।
  • हालाँकि कुछ सहकारी चीनी मिलें, विशेष रूप से महाराष्ट्र में किसानों को प्रोत्साहन अथवा बोनस के रूप में FRP से अधिक का भुगतान करती हैं। इसे अतिरिक्त गन्ना भुगतान (Excess Cane Payment) कहा जाता है।
  • इस अतिरिक्त गन्ना भुगतान के कारण सहकारी चीनी मिलों और आयकर विभाग के बीच कर विवाद खड़ा हो गया है।
    • ये मिलें अतिरिक्त भुगतान का दावा व्यावसायिक व्यय के रूप में करती हैं, जबकि विभाग इसे मुनाफे का वितरण मानता है और इन पर किसी भी प्रकार की छूट की अनुमति नहीं देता है।

विवाद निपटान की प्रक्रिया:

  • भारत सरकार ने वित्त अधिनियम में संशोधन करते हुए वर्ष 2015-16 के केंद्रीय बजट में सहकारी चीनी मिलों को अपनी व्यावसायिक आय की गणना के लिये कटौती के रूप में अतिरिक्त गन्ना भुगतान का दावा करने की अनुमति दी। हालाँकि यह 2016-17 मूल्यांकन वर्ष से लागू किया गया था।
  • भारत सरकार ने सत्र 2023-24 के केंद्रीय बजट में सत्र 2015-16 से पहले के सभी वित्तीय वर्षों के लिये कटौती के लाभ में वृद्धि की है। यह आयकर अधिनियम की धारा 155 में संशोधन कर किया गया था।
  • इस कदम से वित्तीय वर्ष 2015-16 से पहले किये गए भुगतान के संबंध में लंबित कर मांगों और मुकदमेबाज़ी के विरुद्ध सहकारी चीनी मिलों को लगभग 10,000 करोड़ रुपए की राहत मिलने की उम्मीद है।

उचित और लाभकारी मूल्य (FRP):

  • परिचय:
    • यह सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य है, चीनी मिलें किसानों से गन्ने की खरीद इस मूल्य पर करने को बाध्य हैं।
  • भुगतान और समझौता:
    • मिलों को कानूनी तौर पर किसानों से खरीदे गए गन्ने के लिये उन्हें FRP का भुगतान करना आवश्यक है।
    • मिलें किसानों के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने का विकल्प चुन सकती हैं, जिससे उन्हें किश्तों में FRP का भुगतान करने की अनुमति मिल सके।
    • विलंबित भुगतान पर प्रतिवर्ष 15% तक का ब्याज शुल्क लग सकता है और चीनी आयुक्त, मिलों की संपत्तियों को संलग्न करके भुगतान न किये गये FRP की वसूली कर सकते हैं।
  • शासी विनियम:
    • गन्ने का मूल्य निर्धारण आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA), 1955 के तहत जारी गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 के वैधानिक प्रावधानों द्वारा नियंत्रित होता है।
    • नियमों के मुताबिक, FRP का भुगतान गन्ना डिलीवरी के 14 दिनों के अंदर किया जाना चाहिये।
  • निर्धारण एवं घोषणा:
    • FRP का निर्धारण कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर किया जाता है।
    • आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने FRP की घोषणा की।
    • FRP की घोषणा आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) द्वारा की जाती है।
  • विचारणीय कारक:
    • FRP में विभिन्न कारकों को ध्यान में रखा जाता है जिसमें गन्ना उत्पादन की लागत, वैकल्पिक फसलों से प्राप्त निधि, कृषि वस्तुओं की कीमतों में रुझान, उपभोक्ताओं को चीनी की उपलब्धता, चीनी का बिक्री मूल्य, गन्ने से चीनी की रिकवरी और गन्ना उत्पादकों के लिये आय सीमा शामिल है।

गन्ना:

  • तापमान: गर्म और आर्द्र जलवायु के साथ 21-27°C के बीच।
  • वर्षा: लगभग 75-100 सेमी.।
  • मिट्टी का प्रकार: गहरी समृद्ध दोमट मिट्टी।
  • शीर्ष गन्ना उत्पादक राज्य: उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, बिहार।
  • ब्राज़ील के बाद भारत गन्ने का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
  • इसे बलुई दोमट से लेकर चिकनी दोमट मिट्टी तक सभी प्रकार की मृदा में उगाया जा सकता है क्योंकि इसके लिये अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी की आवश्यकता होती है।
  • इसमें बुवाई से लेकर कटाई तक शारीरिक श्रम की आवश्यकता होती है।
  • यह चीनी, खांडसारी, गुड़ और शीरे का मुख्य स्रोत है।
  • चीनी उपक्रमों को वित्तीय सहायता बढ़ाने की योजना (SEFASU) और जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति, गन्ना उत्पादन एवं चीनी उद्योग को समर्थन देने के लिये सरकार की दो योजनाएँ हैं।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रारंभिक परीक्षा:

प्रश्न. भारत में गन्ने की खेती के वर्तमान रुझान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:(2020)

  1. जब 'बड चिप सेटिंग' को नर्सरी में उगाया जाता है और मुख्य खेत में प्रत्यारोपित किया जाता है, तो बीज सामग्री में पर्याप्त बचत होती है।
  2. जब सेटों का सीधा रोपण किया जाता है, तो कई कलियों वाले सेटों की तुलना में एकल कलियों वाले सेटों में अंकुरण प्रतिशत बेहतर होता है।
  3. यदि पौधों को सीधे रोपने पर खराब मौसम की स्थिति बनी रहती है, तो बड़े पौधों की तुलना में एकल-कली वाले पौधों की उत्तरजीविता बेहतर होती है।
  4. गन्ने की खेती टिशू कल्चर से तैयार सेटिंग्स का उपयोग करके की जा सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 3
(C) केवल 1 और 4
(D) केवल 2, 3 और 4

उत्तर: (C)

व्याख्या:

  • ऊतक संवर्द्धन प्रौद्योगिकी:
    • टिशू कल्चर एक ऐसी तकनीक है जिसमें पौधों के टुकड़ों को प्रयोगशाला में संवर्द्धित और विकसित किया जाता है।
    • यह मौजूदा व्यावसायिक किस्मों के रोग-मुक्त बीज, गन्ने का तेज़ी से उत्पादन और आपूर्ति करने का एक नया तरीका प्रदान करता है।
    • यह मदर प्लांट का क्लोन बनाने के लिये मेरिस्टेम का उपयोग करता है।
    • यह आनुवंशिक पहचान को भी सुरक्षित रखता है।
    • टिश्यू कल्चर तकनीक, अपने आवरण एवं संरचना की सीमाओं के कारण अलाभकारी साबित हो रही है।
  • बड चिप प्रौद्योगिकी:
    • टिशू कल्चर के एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में यह द्रव्यमान को कम करता है और बीजों के त्वरित गुणन को सक्षम बनाता है।
    • यह विधि दो से तीन कलियों के रोपण की पारंपरिक विधि की तुलना में अधिक किफायती और सुविधाजनक साबित हुई है।
    • रोपण के लिये उपयोग की जाने वाली बीज सामग्री पर पर्याप्त बचत के साथ रिटर्न अपेक्षाकृत बेहतर प्राप्त होता है। अतः कथन 1 सही है।
    • शोधकर्त्ताओं ने पाया है कि दो कलियों वाले सेट बेहतर उपज के साथ लगभग 65 से 70% अंकुरण दे रहे हैं। अतः कथन 2 सही नहीं है।
    • बड़े सेट खराब मौसम में बेहतर रूप से सुरक्षित रहते हैं, लेकिन एकल कलिका वाले सेट भी रासायनिक उपचार से संरक्षित होने पर 70% अंकुरण देते हैं। अतः  कथन 3 सही नहीं है।
    • टिशू कल्चर का उपयोग गन्ने के अंकुरण के लिये किया जा सकता है जिसे बाद में खेत में प्रत्यारोपित किया जा सकता है। अतः कथन 4 सही है। इसलिये विकल्प (C) सही उत्तर है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

close
एसएमएस अलर्ट
Share Page
images-2
images-2