हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:
झारखण्ड संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य प्रतियोगिता परीक्षा 2016 -परीक्षाफलछत्तीसगढ़ पीसीएस प्रश्नपत्र 2019छत्तीसगढ़ पी.सी.एस. (प्रारंभिक) परीक्षा, 2019 (महत्त्वपूर्ण अध्ययन सामग्री).छत्तीसगढ़ पी.सी.एस. प्रारंभिक परीक्षा – 2019 सामान्य अध्ययन – I (मॉडल पेपर )
हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स (Hindi Literature: Pendrive Course)
मध्य प्रदेश पी.सी.एस. (प्रारंभिक) परीक्षा , 2019 (महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री)मध्य प्रदेश पी.सी.एस. परीक्षा मॉडल पेपर.Download : उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (प्रवर) प्रारंभिक परीक्षा 2019 - प्रश्नपत्र & उत्तर कुंजीअब आप हमसे Telegram पर भी जुड़ सकते हैं !यू.पी.पी.सी.एस. परीक्षा 2017 चयनित उम्मीदवार.UPSC CSE 2020 : प्रारंभिक परीक्षा टेस्ट सीरीज़

डेली अपडेट्स

सामाजिक न्याय

पर्यावरण संरक्षण और महिलाएँ

  • 16 Mar 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये:

यू.एन. वीमेन

मेन्स के लिये:

पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की भूमिका

चर्चा में क्यों?

‘यू.एन. वीमेन’ (UN Women) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु आपातकाल, संघर्ष और बहिष्कार की राजनीति के बढ़ते चलन ने भविष्य में लैंगिक समानता की प्रगति को खतरे में डाल दिया है।

प्रमुख बिंदु

  • रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु संकट की आर्थिक लागतों के साथ-साथ, विस्थापन तथा ज़बरन पलायन में वृद्धि, गरीबी और असुरक्षा का महिलाओं तथा लड़कियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिसके कारण दुरुपयोग और हिंसा का जोखिम काफी अधिक बढ़ जाता है।
  • आँकड़ों के अनुसार, हालाँकि वर्तमान में विश्व की 39 प्रतिशत महिलाएँ कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन क्षेत्र में कार्य कर रही हैं, किंतु फिर भी मात्र 14 प्रतिशत महिलाएँ ही कृषि भूमि धारक हैं। 
  • रिपोर्ट में प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, लगभग 75 प्रतिशत सांसद पुरुष हैं, 73 प्रतिशत प्रबंधकीय पदों पर पुरुष कार्यरत हैं और तकरीबन 70 प्रतिशत जलवायु वार्ताकार भी पुरुष ही हैं।
    • इस लिहाज़ से विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की स्थिति काफी चिंताजनक है।

महिलाएँ और पर्यावरण 

  • विभिन्न विद्वान महिलाओं को भूमि तथा जैव विविधता संसाधनों के प्रबंधन और स्थायी उपयोग के लिये महत्त्वपूर्ण मानते हैं।
  • लैंगिक समानता के क्षेत्र में कार्य करना सतत् विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिये काफी महत्त्वपूर्ण है।
  • UNEP के ग्लोबल जेंडर एंड एन्वायरनमेंट आउटलुक 2016 (GGEO) में लैंगिक असमानता को स्थायी विकास के पर्यावरणीय आयाम को आगे बढ़ाने हेतु मुख्य चुनौतियों में से एक के रूप में प्रस्तुत किया है।
    • GGEO में स्थायी विकास की बाधाओं को संबोधित करने में जेंडर रेस्पाॅन्सिव अप्रोच (Gender Responsive Approaches) को अपनाने की बात की गई है।
  • ‘यू.एन. वीमेन’ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, जेंडर रेस्पाॅन्सिव अप्रोच में न केवल महिलाओं के विविध और विशिष्ट हितों तथा ज़रूरतों को पहचाना जाना चाहिये, बल्कि प्रतिक्रिया कार्यों के विकास, कार्यान्वयन और निगरानी में उनकी भागीदारी तथा नेतृत्व भी सुनिश्चित करना चाहिये।
  • ‘यू.एन. वीमेन’ के अनुसार, प्रणालीगत और स्थायी परिवर्तन को प्रेरित करने के लिये लैंगिक समानता हेतु वित्तपोषण में बहुत अधिक वृद्धि करने की आवश्यकता है, ताकि प्रौद्योगिकी और नवाचार की क्षमता का दोहन किया जा सके तथा यह सुनिश्चित किया जा सके कि विकास महिलाओं के समावेशी हो।

‘यू.एन. वीमेन’ (UN Women)

  • वर्ष 2010 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा ‘यू.एन. वीमेन’ (UN Women) का गठन किया गया था। यह संस्था महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण के क्षेत्र में कार्य करती है।
  • इसके तहत संयुक्त राष्ट्र तंत्र के 4 अलग-अलग प्रभागों के कार्यों को संयुक्त रूप से संचालित किया जाता है:
    • महिलाओं की उन्नति के लिये प्रभाग (Division for the Advancement of Women -DAW)
    • महिलाओं की उन्नति के लिये अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (International Research and Training Institute for the Advancement of Women -INSTRAW)
    • लैंगिक मुद्दों और महिलाओं की उन्नति पर विशेष सलाहकार कार्यालय (Office of the Special Adviser on Gender Issues and Advancement of Women-OSAGI)
    • महिलाओं के लिये संयुक्त राष्ट्र विकास कोष (United Nations Development Fund for Women-UNIFEM)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

एसएमएस अलर्ट
 

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

प्रोग्रेस सूची देखने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

आर्टिकल्स को बुकमार्क करने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close