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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

जॉर्डन-इज़राइल शांति संधि का अंत 

  • 14 Nov 2019
  • 8 min read

प्रीलिम्स के लिये

बखूरा (नहराईम/Naharayim ) तथा अल घमर (ज़ोफर/Tzofar) की भौगोलिक स्थिति

मेन्स के लिये 

अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में इज़राइल-जॉर्डन संबंध

चर्चा में क्यों?

हाल ही में जॉर्डन ने इज़राइल के साथ हुए 25 वर्ष पुराने शांति संधि (Peace treaty) के एक प्रावधान का अंत कर दिया।

  • मुख्य बिंदु:
  • 26 अक्तूबर, 1994 में जॉर्डन तथा इज़राइल के मध्य एक संधि हुई थी जिसके द्वारा दोनों देशों के मध्य स्थित सीमावर्ती क्षेत्र ‘बखूरा’ (हिब्रू में नहराईम) तथा ‘अल घमर’ (ज़ोफर) के लिये विशेष प्रावधान किये गए थे।
  • इज़राइल-जॉर्डन शांति संधि में बखूरा तथा अल घमर से संबंधित मुख्य प्रावधान निम्नलिखित थे:
    • बखूरा तथा अल घमर के क्षेत्र पर जॉर्डन की प्रभुसत्ता बनी रहेगी परंतु इज़राइल को इस क्षेत्र के निजी उपयोग का अधिकार प्राप्त होगा।
    • इन अधिकारों के तहत इज़राइल के नागरिक इस क्षेत्र में बिना किसी रोक-टोक के आवाजाही कर सकेंगे तथा कृषि, पर्यटन व अन्य संबंधित कार्यों के लिये उन्हें छूट प्रदान की जाएगी।
    • इन क्षेत्रों में दोनों देशों में से किसी भी देश के आप्रवासन (Immigration) तथा सीमा शुल्क से (Custom) संबंधित नियम नहीं लागू होंगे।
    • इस क्षेत्र पर इज़राइल का अधिकार आगामी 25 वर्षों के लिये लागू रहेगा तथा इस अवधि के पूरा होने के बाद इसे स्वतः ही नवीकृत (Renewed) मान लिया जाएगा।
    • इस संधि के नवीकरण को लेकर यदि किसी देश को आपत्ति होगी तो वह इसके समाप्ति के एक वर्ष पूर्व सूचित कर सकता है तथा इस स्थिति में आपसी विचार-विमर्श द्वारा निर्णय लिया जाएगा।
  • वर्ष 2019 में इस संधि की अवधि समाप्त होने के बाद जॉर्डन ने इज़राइल को पट्टे (Lease) पर दिये गए बखूरा तथा अल घमर के इलाके को दुबारा देने से मना कर दिया। इस संबंध में वर्ष 2018 में ही जॉर्डन ने इज़राइल को सूचित कर दिया था।
  • ये दोनों ही क्षेत्र जॉर्डन-इज़राइल की सीमा पर बसे हैं जिसमें ‘बखूरा’ गैलिली समुद्र (Sea of Galilee) के किनारे व जॉर्डन नदी (Jordan river) के तट पर तथा ‘अल घमर’ मृत सागर (Dead sea) के दक्षिण में स्थित है।

jordan

जॉर्डन का संधि से अलग होने का कारण:

  • इज़राइल द्वारा जेरुसलम की अल-अक्सा (Al-Aqsa Mosque) मस्जिद पर अवैध कब्ज़ा तथा जॉर्डन के नागरिकों को इज़राइल में नज़रबंद (Detention) किये जाने से दोनों देशों के मध्य तनाव बढ़ा है।
  • अमेरिका द्वारा जेरुसलम को इज़राइल की राजधानी घोषित किये जाने के बाद अरब देशों में इज़राइल के प्रति असंतोष की स्थिति बनी है। अतः जॉर्डन ने इज़राइल का विरोध करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया है।
  • पिछले एक दशक से इज़राइल लगातार दोनों देशों के मध्य स्थित वेस्ट बैंक (West Bank) तथा जॉर्डन घाटी (Jordan Valley) में अवैध निर्माण तथा कब्ज़ा कर रहा है। इज़राइल इस पूरे क्षेत्र पर अपनी संप्रभुता चाहता है जबकि जॉर्डन चाहता है कि इस क्षेत्र पर एक संप्रभु देश फिलिस्तीन (Palestine) बनाया जाए।
  • इज़राइल तथा जॉर्डन के मध्य पिछले एक दशक से वैचारिक तथा आर्थिक विवाद की स्थिति बनी हुई हैं।
  • संधि के समाप्त होने से प्रभाव:
  • पिछले 25 वर्षों से इज़राइल के किसान इन दोनों क्षेत्रों में खेती करते आ रहे थे। इस संधि की समाप्ति के बाद वर्षों से चले आ रहे उनकी आजीविका के साधन समाप्त हो जाएंगे।
  • जॉर्डन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार इज़राइली किसान अपनी बची हुई फसलों की कटाई कर सकते हैं लेकिन अब उस क्षेत्र में प्रवेश के लिये उन्हें वीज़ा लेना होगा।

इज़राइल-जॉर्डन संबंध: पृष्ठभूमि

  • द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद ब्रिटिश संरक्षित क्षेत्र (Brititsh Mandate) फिलिस्तीन (आधुनिक इज़राइल, जॉर्डन तथा फिलिस्तीन) को विभाजित करके इज़राइल का निर्माण किया गया। विश्व युद्ध के दौरान यूरोप से विस्थापित हुए यहूदियों (Jews) को यहाँ बसाया गया तथा वर्ष 1947 में इज़राइल एक स्वतंत्र देश बना।
  • प्रारंभ में जॉर्डन इज़राइल के संबंध, इज़राइल तथा अन्य अरब देशों से भिन्न थे। दोनों देश एक लंबी भौगोलिक सीमा साझा करते हैं तथा वर्ष 1947 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रस्तावित बँटवारे को जॉर्डन ने स्वीकार कर लिया था। इसके तहत यह तय किया गया था कि इज़राइल तथा जॉर्डन में क्रमशः यहूदी तथा मुसलमान अलग-अलग रहेंगे।
  • इज़राइल की स्थापना के समय से ही अन्य अरब देशों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया क्योंकि मुस्लिमों के पवित्र स्थल जेरुसलम पर इज़राइल का अधिकार हो गया था।
  • इज़राइल के गठन के बाद ही वर्ष 1948 में अरब देशों ने संयुक्त रूप से इज़राइल पर आक्रमण कर दिया तथा अरब देशों के दबाव में जॉर्डन को भी युद्ध में हिस्सा लेना पड़ा। युद्ध के बाद जॉर्डन ने पूर्वी जेरुसलम तथा वेस्ट बैंक पर कब्ज़ा कर लिया।
  • वर्ष 1967 में हुए तीसरे अरब-इज़राइल युद्ध (छः दिवसीय युद्ध) में इज़राइल की जीत हुई तथा गाजा पट्टी (Gaza Strip), वेस्ट बैंक तथा पूर्वी जेरुसलम पर इज़राइल  का पुनः अधिकार हो गया।
  • फिलिस्तीन के हक में जॉर्डन ने इज़राइल से बातचीत के माध्यम से समझौता करने का प्रयास किया परंतु इसका कोई हल नहीं निकल सका।
  • अंततः 25 जुलाई, 1994 को संयुक्त राज्य अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डी. सी. में हुए समझौते के बाद जॉर्डन-इज़राइल  के बीच लंबे अरसे से चली आ रही युद्ध जैसी स्थिति के बाद शांति स्थापित हो सकी।
  • उसी वर्ष 26 अक्तूबर, 1994 में दोनों देशों में यारमूक (Yarmouk) तथा जॉर्डन (Jordan) नदियों के जल प्रयोग के साथ ही बखूरा एवं अल घमर के इलाकों से संबंधित अधिकार को लेकर संधि हुई।

स्रोत : द हिंदू 

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