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सामाजिक न्याय

एकलव्य मॉडल आवासीय तथा डे बोर्डिंग विद्यालय

  • 27 Mar 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये:

EMRS, EMDBS, JNV विद्यालय

मेन्स के लिये:

जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs- MTA) ने COVID- 19 महामारी के चलते उत्पन्न आकस्मिक स्वास्थ्य स्थिति के मद्देनज़र राज्य सरकारों को एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (Eklavya Model Residential Schools- EMRS) एवं एकलव्य मॉडल डे बोर्डिंग स्कूल (Eklavya Model Day Boarding Schools- EMDBS) में अवकाश के पुनर्निर्धारण करने के लिये पत्र लिखा है।

मुख्य बिंदु: 

  • अवकाश पुनर्निर्धारण का निर्णय COVID- 19 महामारी के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली संवेदनशील स्वास्थ्य स्थितियों को देखते हुए लिया गया है।
  • स्थानीय प्रशासन ने संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिये अवकाश की घोषणा सहित अनेक निवारक उपाय अपनाने के लिये निर्देश जारी किये हैं। कुछ मामलों में, जारी किये गए निर्देश निर्धारित वार्षिक परीक्षाओं को पूरा करने की अनुमति देते हैं।

EMRS योजना:

  • एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) योजना की शुरुआत वर्ष 1998 में की गई थी तथा इस तरह के प्रथम विद्यालय का शुभारंभ वर्ष 2000 में महाराष्‍ट्र में हुआ था। 
  • EMRS आदिवासी छात्रों के लिये उत्‍कृष्‍ट संस्‍थानों के रूप में कार्यरत हैं। राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में 480 छात्रों की क्षमता वाले EMRS की स्थापना भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 275 (1) के अंतर्गत अनुदान द्वारा विशेष क्षेत्र कार्यक्रम (Special Area Programme- SAP) के तहत की जा रही है। 
  • अनुसूचित जनजाति के बच्‍चों को अच्‍छी शिक्षा प्रदान करने के लिये EMRS एक उत्‍कृष्‍ट दृष्टिकोण है। EMRS में छात्रावासों और स्टाफ क्‍वार्टरों सहित विद्यालय की इमारत के निर्माण के अलावा खेल के मैदान, छात्रों के लिये कंप्यूटर लैब, शिक्षकों के लिये संसाधन कक्ष आदि का भी प्रावधान किया गया है।

एकलव्य मॉडल डे-बोर्डिंग विद्यालय (EMDBS):

  • जिन उप-ज़िला (Sub-District) क्षेत्रों की 90% या इससे अधिक जनसंख्या  अनुसूचित जनजातीय समुदाय से संबंधित है, उन क्षेत्रों में प्रयोगात्मक आधार पर एकलव्य मॉडल डे-बोर्डिंग विद्यालय  स्थापित करने का प्रस्ताव है। 
  • इन विद्यालयों का उद्देश्य, बिना आवासीय सुविधा के ST छात्रों को विद्यालय शिक्षा का लाभ देना है।

जवाहर नवोदय विद्यालय

(Jawahar Navodaya Vidyalayas- JNV): 

  • JNV की स्थापना के पीछे मुख्य उद्देश्य परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को देखे बिना सांस्कृतिक मूल्यों युक्त, पर्यावरण शिक्षा, साहसिक गतिविधियों एवं शारीरिक शिक्षा के साथ प्रतिभाशाली ग्रामीण छात्रों को अच्छी गुणवत्ता वाली आधुनिक शिक्षा प्रदान करना है।  

नवीन संशोधन:

  • वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (Cabinet Committee on Economic Affairs- CCEA) ने 50 प्रतिशत से ज़्यादा जनजातीय आबादी एवं 20,000 जनजातीय जनसंख्या वाले प्रत्येक प्रखंड (block) में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय अथवा एकलव्य मॉडल रेज़िडेंशियल स्कूल (Eklavya Model Residential Schools- EMRSs) खोलने को सैद्धांतिक मंज़ूरी प्रदान की थी। 
  • पहले से स्‍वीकृत EMRS में प्रति स्‍कूल 5 करोड़ रुपए तक की अधिकतम राशि की लागत के आधार पर आवश्‍यकता के अनुसार सुधार कार्य किया जाएगा। 
  • 163 जनजातीय बहुल ज़िलों में प्रति 5 करोड़ रुपए लागत वाली खेल सुविधाएँ (Sports Facilities) स्थापित की जाएंगी, इसमें से प्रत्‍येक का निर्माण वर्ष 2022 तक पूरा कर लिया जाएगा। 

संशोधन का प्रभाव:

  • 50 प्रतिशत से अधिक जनजातीय आबादी और 20,000 जनजातीय जनसंख्या वाले 102 प्रखंडों में पहले से ही EMRS का संचालन किया जा रहा है। इस प्रकार देश भर में इन प्रखंडों में 462 नए EMRS की स्‍थापना की जाएगी।
  • पूर्वोत्‍तर (North East), पर्वतीय क्षेत्रों (Hilly Areas), दुर्गम क्षेत्रों (difficult areas) तथा वामपंथी उग्रवाद से ग्रसित क्षेत्रों (areas affected by Left Wing Extremisma) में निर्माण के लिये 20 प्रतिशत अतिरिक्‍त राशि उपलब्‍ध कराई जाएगी।

अनुसूचित जनजाति के बच्‍चों को अच्‍छी शिक्षा प्रदान करने के लिये EMRS एक उत्‍कृष्‍ट दृष्टिकोण है। जनजातीय लोगों की शिक्षा संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने हेतु विशेष हस्‍तक्षेपों पर ध्‍यान केंद्रित किये जाने से उनके जीवन में सुधार लाने के साथ ही उनके अन्‍य सामाजिक समूहों के समकक्ष आने की संभावना है। 

स्रोत: पीआईबी

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