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सामाजिक न्याय

हाथ से मैला ढोने की प्रथा

  • 14 Jan 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

मैनुअल स्कैवेंजर्स के रूप में रोज़गार का निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013

मेन्स के लिये:

हाथ से मैला ढोने की प्रथा से संबंधित विधिक उपाय

चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के अनुसार, हाथ से मैला ढोने वाले व्यक्तियों की सीवर की सफाई के दौरान होने वाली मौतों के संदर्भ में महाराष्ट्र और गुजरात राज्य ने सबसे कम संख्या में मुआवज़ा प्रदान किया है।

मुख्य बिंदु:

  • भारत में वर्ष 1993 से 31 दिसंबर, 2019 तक हाथ से मैला ढोने वाले व्यक्तियों की सीवर की सफाई के दौरान होने वाली 926 मौतों में से 172 पीड़ितों के परिवारों को अभी तक मुआवज़ा नहीं मिला है।
  • राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (National Commission for Safai Karamcharis- NCSK) के आँकड़ों के अनुसार, गुजरात में ऐसे सर्वाधिक मामले (48) पाए गए जहाँ राशि का भुगतान या तो किया नहीं गया या अपुष्ट (Unconfirmed) था। जबकि महाराष्ट्र में ऐसे 32 मामले पाए गए।

अन्य तथ्य:

  • मैनुअल स्कैवेंजर्स के रूप में रोज़गार का निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 (Prohibition of Employment as Manual Scavengers and their Rehabilitation Act, 2013) के अंतर्गत गठित केंद्रीय निगरानी समिति ( Central Monitoring Committee) की एक बैठक में उपर्युक्त कानून के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।
  • इस बैठक के दौरान हाथ से मैला ढोने वाले के पुनर्वास में पिछड़ने वाले राज्यों को भी अनुपालन करने के लिये कहा गया।
  • तमिलनाडु में इस तरह की मौतों की संख्या सर्वाधिक थी, इन 234 मामलों में से सात को छोड़कर सभी मामलों में मुआवज़े का भुगतान किया गया था।
  • गुजरात राज्य में दर्ज 162 मैला ढोने वालों की मौतों में से 48 में भुगतान करना या भुगतान की पुष्टि करना बाकी था और 31 मामलों में मुआवज़ा पाने वाले कानूनी उत्तराधिकारी का पता नहीं लगाया जा सका।

हाथ से मैला ढोने की प्रथा से संबंधित तथ्य:

  • NCSK द्वारा वर्ष 2018 में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार, हाथ से मैला ढोने में लगे कुल 53,598 व्यक्तियों में से 29,923 अकेले उत्तर प्रदेश के थे।
  • 35,397 मामलों में एकमुश्त नकद सहायता का वितरण किया गया था जिनमें से 19,385 व्यक्ति केवल उत्तर प्रदेश से थे।
  • 1,007 और 7,383 मैला ढोने वाले व्यक्तियों को क्रमशः सब्सिडी पूंजी और कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया गया था।

क्या है हाथ से मैला ढोने की प्रथा?

  • किसी व्यक्ति द्वारा स्वयं के हाथों से मानवीय अपशिष्टों (Human Excreta) की सफाई करने या सर पर ढोने की प्रथा को हाथ से मैला ढोने की प्रथा या मैनुअल स्कैवेंजिंग (Manual Scavenging) कहते हैं।

मैनुअल स्कैवेंजर्स के रूप में रोज़गार का निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013

(Prohibition of Employment as Manual Scavengers and their Rehabilitation Act, 2013):

  • यह अधनियम हाथ से मैला ढोने वाले व्यक्तियों द्वारा किये जा रहे किसी भी कार्य या रोज़गार का निषेध करता है।
  • यह हाथ से मैला साफ करने वाले और उनके परिवार के पुनर्वास की ज़िम्मेदारी राज्यों पर आरोपित करता है।
  • इस अधिनियम के तहत हाथ से मैला ढोने वाले व्यक्तियों को प्रशिक्षण प्रदान करने, ऋण देने और आवास प्रदान करने की भी व्यवस्था की गई है।
  • इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार 21 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में जिला निगरानी समिति, 21 राज्यों में राज्य निगरानी समिति और 8 राज्यों में राज्य सफाई कर्मचारी आयोग का निर्माण किया गया है।

गौरतलब है कि महात्मा गाँधी और डॉ. अंबेडकर, दोनों ने ही हाथ से मैला ढोने की प्रथा का पुरजोर विरोध किया था। यह प्रथा संविधान के अनुच्छेद 15, 21, 38 और 42 के प्रावधानों के भी खिलाफ है। आज़ादी के 7 दशकों बाद भी इस प्रथा का जारी रहना देश के लिये शर्मनाक है और जल्द से जल्द इसका अंत होना चाहिये।

स्रोत- द हिंदू

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