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शासन व्यवस्था

बंदरगाहों को सशक्त बनाने के लिये CSR दिशा-निर्देश

  • 28 Jun 2023
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, सागर सामाजिक सहयोग, बंदरगाह, प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण अधिनियम, 2021

मेन्स के लिये:

कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व का महत्त्व

चर्चा में क्यों?

हाल ही में पत्तन,पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (Ministry of Ports, Shipping & Waterways) ने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के लिये नए दिशा-निर्देश- 'सागर सामाजिक सहयोग' जारी किये हैं, जिसका उद्देश्य स्थानीय समुदाय के मुद्दों को अधिक सहयोगात्मक और त्वरित तरीके से संबोधित करने के लिये बंदरगाहों को सशक्त बनाना है।

दिशा-निर्देश संबंधी प्रमुख बिंदु:

  • CSR फंडिंग:
    • भारत में बंदरगाह अपने निवल वार्षिक लाभ का एक विशिष्ट प्रतिशत CSR गतिविधियों के लिये आवंटित करेंगे। बंदरगाहों के लिये CSR बजट उनके वार्षिक राजस्व पर आधारित होगा, विभाजन इस प्रकार होगा:
      • 100 करोड़ रुपए से कम वार्षिक राजस्व वाले बंदरगाह CSR पर 3-5% खर्च करेंगे।
      • यदि बंदरगाहों का वार्षिक राजस्व 500 करोड़ रुपए से अधिक है तो वे 0.5-2% हिस्सा निवेश करेंगे।
      • संबंधित CSR परियोजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी को सुनिश्चित करने के लिये कुल सीएसआर व्यय का 2% बंदरगाहों द्वारा परियोजना निगरानी के लिये प्रदान किया जाएगा।
  • CSR समिति:
    • प्रत्येक प्रमुख बंदरगाह CSR पहलों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने के लिये प्रमुख बंदरगाह के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व समिति की स्थापना करेगा।
    • समिति में दो अन्य सदस्य शामिल होंगे। CSR परियोजनाओं को प्रमुख बंदरगाहों की व्यावसायिक योजनाओं में लागू किया जाना चाहिये, जिससे उनके संचालन से संबंधित सामाजिक और पर्यावरणीय चिंताओं का समाधान किया जा सके।
    • प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिये एक CSR योजना भी तैयार करनी होगी।
  • आवंटन और केंद्रित क्षेत्र:
    • CSR परियोजनाएँ और कार्यक्रम प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण अधिनियम, 2021 की धारा 70 में निर्दिष्ट गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
      • अधिनियम की धारा 70 के अनुसार, संगठन धनराशि का उपयोग अपने कर्मचारियों, ग्राहकों आदि के लिये शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, कौशल विकास, प्रशिक्षण और मनोरंजक गतिविधियों के क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे के विकास सहित सामाजिक लाभ प्रदान करने के लिये कर सकता है।
    • CSR व्यय का 20% ज़िला स्तर पर सैनिक कल्याण बोर्ड, राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के साथ राष्ट्रीय युवा विकास निधि के लिये भी निर्धारित किया जाना चाहिये।
    • इसके अतिरिक्त 78% धनराशि समुदाय को लाभ पहुँचाने वाली सामाजिक और पर्यावरण कल्याण पहल के लिये निर्देशित की जानी चाहिये।
      • इनमें पेयजल, शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, विद्युत के लिये गैर-पारंपरिक और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों (EWS) हेतु आजीविका संवर्द्धन, सामुदायिक केंद्र तथा छात्रावास से संबंधित परियोजनाएँ शामिल हैं।
    • बंदरगाहों द्वारा CSR कार्यक्रमों के अंतर्गत परियोजना की निगरानी के लिये कुल CSR व्यय का 2% आवंटित किया जाता है।

दिशा-निर्देशों का महत्त्व:

दिशा-निर्देश बंदरगाहों को सामुदायिक कल्याण और विकास को बढ़ावा देने तथा CSR गतिविधियों को प्रत्यक्ष रूप से प्रारंभ करने में सक्षम बनाते हैं।

  • स्थानीय समुदायों को भागीदार के रूप में शामिल करने वाले ढाँचे को अपनाकर CSR में सकारात्मक परिवर्तन लाने तथा प्रगति के लिये एक महत्त्वपूर्ण उत्प्रेरक बनने की क्षमता है।
  • दिशा-निर्देशों का उद्देश्य CSR को सकारात्मक परिवर्तन के लिये एक प्रबल शक्ति बनाना है। यह पहल अधिकतम शासन और समुदाय-केंद्रित विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (Corporate Social Responsibility- CSR):

  • परिचय:
    • कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व की अवधारणा में यह दृष्टिकोण निहित है कि कंपनियों को पर्यावरण एवं सामाजिक कल्याण पर उनके प्रभावों का आकलन करना चाहिये और ज़िम्मेदारी लेनी चाहिये, साथ ही सकारात्मक सामाजिक तथा पर्यावरणीय परिवर्तन को बढ़ावा देना चाहिये।
    • कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के चार मुख्य प्रकार हैं:
      • पर्यावरणीय उत्तरदायित्व
      • नैतिक उत्तरदायित्व
      • परोपकारी उत्तरदायित्व
      • आर्थिक उत्तरदायित्व
    • कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व प्रावधान उन कंपनियों पर लागू होते हैं जिनका वार्षिक कारोबार 1,000 करोड़ रुपए एवं उससे अधिक है, या जिनकी कुल संपत्ति 500 करोड़ रुपए एवं उससे अधिक है, या उनका शुद्ध लाभ 5 करोड़ रुपए एवं उससे अधिक है।
      • इस अधिनियम में कंपनियों द्वारा एक CSR समिति गठित करना आवश्यक है जो निदेशक मंडल को एक कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व नीति की सिफारिश करेगी और समय-समय पर उसकी निगरानी भी करेगी।
  • CSR के अंतर्गत गतिविधियाँ:
    • कंपनी अधिनियम 2013 की अनुसूची VII के तहत निर्दिष्ट कुछ प्रमुख गतिविधियों में निम्नलिखित शामिल हैं:
      • भुखमरी, गरीबी एवं कुपोषण का उन्मूलन करना और शिक्षा, लैंगिक समानता को बढ़ावा देना।
      • एक्वायर्ड इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम (एड्स), ह्यूमन इम्यूनोडेफिसिएंसी वायरस और अन्य विकारों से लड़ना।
      • पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करना।
      • इमारतों और ऐतिहासिक महत्त्व के स्थलों तथा कला के कार्यों की बहाली सहित राष्ट्रीय धरोहर, कला एवं संस्कृति का संरक्षण।
      • सशस्त्र बलों के शहीदों, युद्ध विधवाओं और उनके आश्रितों के लाभ के लिये उपाय करना।
      • ग्रामीण खेलों, राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त खेलों, पैरालंपिक खेलों तथा ओलंपिक खेलों को बढ़ावा देने के लिये प्रशिक्षण देना।
      • प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष या सामाजिक-आर्थिक विकास और राहत के लिये केंद्र सरकार द्वारा स्थापित किसी अन्य कोष में योगदान देना।

 UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न 

प्रश्न. कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व कंपनियों को अधिक लाभदायक तथा चिरस्थायी बनाता है। विश्लेषण कीजिये। (2017)

स्रोत: पी.आई.बी.

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