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सामाजिक न्याय

खनन क्षेत्र में कार्यरत बाल श्रमिक

  • 26 Aug 2019
  • 3 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (National Commission for Protection of Child Rights-NCPCR) द्वारा किये गए सर्वे के अनुसार अभ्रक खनन क्षेत्र में 6-14 वर्ष की आयु वर्ग के 5000 से अधिक बच्चे शिक्षा से वंचित हैं।

प्रमुख बिंदु

  • सर्वे के अनुसार, झारखंड और बिहार के अभ्रक खनन क्षेत्र (Mica Mining Areas) में कार्यरत 6-14 वर्ष की आयु के 5000 से अधिक बच्चे शिक्षा का त्याग कर चुके हैं। ये बच्चे पारिवारिक आय में सहयोग करने के लिये खनन क्षेत्र में मज़दूरी का कार्य कर रहे हैं।
  • यह सर्वे बिहार और झारखंड में स्थित अभ्रक खनन क्षेत्र में कार्यरत बच्चों की शिक्षा और कल्याण को आधार बना कर किया गया।
  • सर्वे के अनुसार, बच्चों द्वारा स्कूल छोड़ने के कारणों में बच्चों को शिक्षित करने के प्रति अभिभावकों की कम रूचि और अभ्रक के स्क्रैप को इकट्ठा करने के कार्य में बच्चों की संलग्नता शामिल है।
  • इस क्षेत्र में अभ्रक के कबाड़ का एकत्रीकरण और बिक्री अनेक परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन है। इसलिये कई परिवार अपने बच्चों को स्कूल भेजने के स्थान पर उनसे कबाड़ एकत्र करने के कार्य को प्राथमिकता देते हैं।
  • NCPCR ने इन बच्चों में कुपोषण (Malnourishment) की समस्या की भी पहचान की है।

सर्वे का उद्देश्य

  • सर्वे का उद्देश्य इस क्षेत्र के बच्चों में शिक्षा की स्थिति, स्कूल न जाने वाले बच्चों की संख्या, अभ्रक के स्क्रैप को एकत्र करने के कार्य में संलग्नता, व्यावसायिक प्रशिक्षण तक किशोरों की पहुँच और गैर-सरकारी संगठनों (NGO) की भूमिका की संभावनाओं का पता लगाना था।

NCPCR द्वारा दिये गए सुझाव

  • अभ्रक खनन और उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला को बाल श्रम (Child Labour) से मुक्त बनाया जाना चाहिये।
  • अभ्रक खनन प्रक्रिया की किसी भी गतिविधि और स्क्रैप इकट्ठा करने के कार्य में बच्चों को नियोजित नहीं किया जाना चाहिये।
  • गैर-सरकारी संगठनों और विकास एजेंसियों को स्थानीय एवं ज़िला प्रशासन तथा उद्योगों के साथ मिलकर बाल श्रम से मुक्त अभ्रक खनन की आपूर्ति श्रृंखला बनाने की रणनीति तैयार करनी चाहिये।
  • बच्चों द्वारा एकत्रित अभ्रक स्क्रैप के खरीदारों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है।
  • झारखंड और बिहार के अभ्रक खनन क्षेत्रों में बाल श्रम को समाप्त करने के लिये प्रशासन द्वारा एक विशेष अभियान चलाया जाना चाहिये।

स्रोत : द हिंदू

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