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कावेरी प्राधिकरण ने कर्नाटक को पानी छोड़ने के निर्देश दिये - Drishti IAS
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कावेरी प्राधिकरण ने कर्नाटक को पानी छोड़ने के निर्देश दिये

  • 03 Jul 2018
  • 3 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में अपनी पहली बैठक में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने कर्नाटक को तमिलनाडु और अन्य राज्यों के लिये पानी छोड़ने के निर्देश दिये हैं लेकिन सर्वोच्च न्यायालय में CWMA के गठन को चुनौती देने के कर्नाटक के फैसले पर बैठक में चर्चा नहीं की गई।

महत्त्वपूर्ण बिंदु 

  • कर्नाटक सरकार ने हाल ही में CWMA और कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) की स्थापना के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने का फैसला लिया था| अपील में उसने मांग की थी कि इस कदम को लेकर संसद में चर्चा की जानी चाहिये।
  • CWMA ने कर्नाटक को बिलीगुंडुलु साइट से 34 tmcft (हजार मिलियन घन फीट) पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। यह जून में छोड़े गए पानी से अधिक होगा|
  • CWMA, जो अभी तक पूर्णकालिक सदस्यों की नियुक्ति नहीं कर सका है, मानसून महीनों के दौरान प्रत्येक 10 दिन में बैठक करेगा| 
  • विभिन्न जलाशयों- हेमावथी, हरंगी, कृष्णराजासागर, कबीनी, मेट्तूर, भवानीसागर, अमरावती और बनसुरासागर में पानी के भंडारण के आधार पर यह सिफारिश करेगा कि 10 दिनों में इन ब्लॉकों में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले को ध्यान में रखते हुए कितना पानी छोड़ा जाना चाहिये|
  • उच्चतम न्यायालय द्वारा फरवरी में दिये गए फैसले में कहा गया था कि कर्नाटक को 284.75 tmcft, तमिलनाडु को 404.25 tmcft तथा केरल और पुद्दुचेरी को क्रमशः 30 और 7 tmcft पानी मिलेगा।

कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) का गठन 

  • CWMA में टिंकू बिस्वाल, एस.के. प्रभाकर, ए.अंबरसु और राकेश सिंह ( केरल के सचिव) शामिल हैं| इसके अलावा तमिलनाडु, पुद्दुचेरी और कर्नाटक के जल आयोग तथा केंद्रीय कृषि और जल संसाधन मंत्रालय के प्रतिनिधि इसकी देखभाल करते हैं।
  • CWMA की अध्यक्षता एक वरिष्ठ और प्रतिष्ठित इंजीनियर या सचिव/अतिरिक्त सचिव स्तर के कार्यकारी अधिकारी द्वारा की जाएगी, जिसे अंतर-राज्य जल विवादों के प्रबंधन का अनुभव हो।
  • प्राधिकरण के लिये दो पूर्णकालिक और छह अंशकालिक सदस्य होंगे, जिनमें से प्रत्येक को नदी तट पर स्थित राज्यों से नामित किया जाएगा।
  • सेंट्रल वाटर इंजीनियरिंग सर्विसेज़ कैडर से एक सचिव होगा, लेकिन उसे वोटिंग का अधिकार नहीं होगा।
  • अध्यक्ष का कार्यकाल पाँच साल होगा, जबकि अन्य सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष होगा और इसे पाँच साल तक बढ़ाया जा सकता है।
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