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भारतीय अर्थव्यवस्था

निर्माण श्रमिकों के लाभों की जाँच के लिये लेखा परीक्षा

  • 05 Sep 2018
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड श्रमिकों को पंजीकृत कर रहे हैं या नहीं, उन्हें लाभ दे रहे हैं या नहीं इसकी जाँच के लिये और अवैध रूप से पंजीकृत गैर-श्रमिकों को बाहर निकालने के लिये सामाजिक लेखा परीक्षा पायलट परियोजनाएँ शीघ्र ही राजस्थान और दिल्ली में शुरू होने वाली हैं।

प्रमुख बिंदु

  • हाल ही में श्रम मंत्रालय द्वारा भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार भवन और अन्य निर्माण श्रमिक (रोज़गार और सेवा की शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 1996 (BOCW) के कार्यान्वयन पर सामाजिक लेखा परीक्षा के लिये मसौदा रूपरेखा जारी की गई। इसमें लेखा परीक्षा का प्रारूप विस्तार से रखा गया है।
  • निर्माण उद्योग भारत का दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है, एक अनुमान के मुताबिक इस क्षेत्र में पाँच से सात करोड़ श्रमिक कार्यरत हैं, जिनमें से आधे से कम पंजीकृत हैं।
  • BOCW सामाजिक लेखा परीक्षा का उद्देश्य हर दो साल में सभी ज़िलों को कवर करना है, इस प्रक्रिया का नेतृत्त्व कर रहे सिविल सोसाइटी संगठनों के अनुसार, पायलट परियोजनाएँ दिल्ली के भवाना वार्ड और उदयपुर ज़िले के ब्लॉक (अभी तक तय किया जाना बाकी) में क्रियान्वित की जाएंगी।

कार्य-स्थलों का मुआयना

  • निर्माण श्रम पर केंद्रीय विधान के लिये राष्ट्रीय अभियान समिति (NCC-CL) के अधिकारियों द्वारा यह जाँचने हेतु कि कितने श्रमिक कल्याण बोर्डों के साथ पंजीकृत हैं, सभी निर्माण स्थलों सहित उन स्थानों का भी मुआयना किया जाएगा जहाँ श्रमिक रहते हैं।
  • इसके अतिरिक्त लेखा परीक्षा दल द्वारा इन ममलों की भी जाँच की जाएगी कि “क्या श्रमिकों के बच्चों को छात्रवृत्तियाँ मिल रही हैं जिनके वे हकदार हैं?  जिन श्रमिकों ने विभिन्न लाभों (पेंशन, मातृत्व आदि) के लिये आवेदन किया है उन्हें कितनी लंबी अवधि तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है? यदि श्रमिकों को बच्चों के केवल दो या तीन साल की उम्र  होने तक मातृत्व लाभ मिलता है, तो इसका क्या उपयोग होता है? "
  • सामाजिक लेखा परीक्षा दल उन श्रमिकों की भी खोज करेगा जिन्होंने पंजीकरण नहीं कराया है और उन कारणों को भी खोजने का प्रयास करेगा जो उन्हें ऐसा करने से रोकते हैं।

सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश

  • NCC-CL की याचिका पर 19 मार्च के फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह विचार व्यक्त किया कि केंद्र और राज्यों ने बीओसीडब्ल्यू को लागू करने के पिछले निर्देशों का "दंडमुक्ति के साथ उल्लंघन" किया था और न्यायालय ने यह निर्देश दिया कि इसके लिये सरकार को ज़िम्मेदार ठहराए जाने हेतु सामाजिक लेखा परीक्षा आयोजित की जाएगी।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि पंजीकरण प्रयासों में उत्तरदायित्व के बिना BOCW का कोई उपयोग नहीं होगा।
  • फैसले में न्यायालय ने कहा कि, “न्यायालय में दर्शाए गए आँकड़ों के अनुसार देश में 4.5 करोड़ से अधिक भवन और अन्य निर्माण श्रमिक हैं। पहले 2.15 करोड़ श्रमिक पंजीकृत किये गए थे और अब तक पंजीकृत श्रमिकों की संख्या 2.8 करोड़ हो चुकी है। इन आँकड़ों की प्रामाणिकता पर पूरी तरह विश्वास नहीं किया जा सकता। किसी भी घटना में भवन और अन्य निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण आवश्यक संख्या से काफी नीचे है और यह भी एक अनुमान मात्र है।"
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