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भारत ने डब्ल्यूटीओ में बीजिंग से माँस, फार्मा और आईटी उत्पादों के निर्यात के लिये बाधाओं को कम करने को कहा

  • 13 Jul 2018
  • 2 min read

संदर्भ

भारत ने विश्व व्यापार संगठन में चीन को चेतावनी दी है कि देश के साथ 63 अरब डॉलर का व्यापार घाटा अस्थिर था और इस अंतराल को भरने के लिये केवल वचनबद्धता ही पर्याप्त नहीं है।

प्रमुख बिंदु

  • डब्ल्यूटीओ में चीन की व्यापार नीति की समीक्षा के दौरान भारत ने कहा कि बीजिंग को चावल, माँस, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी उत्पादों आदि के संबंध में व्यापार बाधाओं को कम किये जाने के  गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता है।
  • भारत ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा है कि बोवाइन माँस समेत कृषि निर्यात को कठोर और अपारदर्शी नियामक कानूनों के कारण बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
  • इसके साथ ही कठोर और अपारदर्शी नियामक कानूनों तथा चीनी सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के विस्तार के कारण भारतीय जेनेरिक उत्पादक चीन के बाज़ार तक पहुँचने में असमर्थ रहे हैं।
  • भारत ने यह भी कहा कि चीन के खाद्य एवं औषधि प्रशासन को भारतीय फार्मा कंपनियों के लिये कार्यशालाएँ आयोजित करनी होगी ताकि ये कम्पनियाँ यहाँ के बाज़ार में पहुँच स्थापित क्र सकें। 
  • इस दौरान चीनी राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों (एसओई) और भारतीय आईटी क्षेत्र के बीच सहयोग की गुंजाइश पर भी चर्चा की गई कि यह क्षेत्र कस्टम समाधान हेतु अत्याधुनिक डिज़ाइन उपलब्ध करा सकता था।
  • भारतीय कंपनियों के लिये सेवा क्षेत्र की चुनौतियों में एसओई के विभिन्न अनुबंधों जिसमें ज़रूरी योग्यता, लाइसेंसिंग तथा कराधान से संबंधित जटिल आवश्यकताएँ शामिल हैं।
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