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शासन व्यवस्था

प्रवासियों को दूर रखने के लिये अरुणाचल का कदम

  • 04 Jun 2018
  • 8 min read

संदर्भ

चूँकि असम 30 जून तक नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर के अंतिम मसौदे को प्रकाशित करने के लिये तैयार हो गया है, इसे देखते हुए पड़ोसी अरुणाचल प्रदेश अवैध प्रवासियों के प्रवेश को रोकने के लिये अपनी सीमाओं को मज़बूत कर रहा है।

क्या है मामला?

  • पिछले महीने, अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले के ठेकेदारों ने कहा कि 90 बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ रुकी हुई हैं क्योंकि 2,000 मज़दूरों ने यह सुनिश्चित करने के लिये काम करना छोड़ दिया था कि उनके नाम NRC में शामिल हैं।
  • पंद्रह दिन से अधिक समय बाद, लोंगडिंग जिले में पुलिस ने 87 मज़दूरों को पकड़ा जिनके पास इनर लाइन परमिट (ILP) नहीं था और उन्हें वापस असम भेज दिया गया जहाँ से वे आए थे ।
  • ‘ILP उल्लंघन करने वालों’ के खिलाफ इसी तरह के अभियानों ने अगले कुछ दिनों में राज्य के अन्य ज़िलों से 350 से ज़्यादा लोगों को निकाला है।
  • लेकिन इटानगर में प्रशासन ने संकेत दिया कि अवैध प्रवासियों, जो कानून और व्यवस्था को बिगाड़ सकते हैं तथा शांति भंग कर सकते हैं, पर प्रतिबंध लगाने के लिये इस अभियान में अभी बहुत कुछ करना है।
  • यह इस सिद्धांत से जुड़ा हुआ है कि अंतिम प्रारूप के सार्वजनिक होने के बाद असम अंततः लाखों नागरिकताविहीन लोगों को राज्य से निकाल सकता है।

 ILP (Inner Line Permit) क्या है?

  • ब्रिटिश काल से ही, ILP एक यात्रा दस्तावेज़ है जो भारतीय नागरिकों को उत्तर-पूर्वी भारत के सीमावर्ती राज्यों - अरुणाचल प्रदेश, मिज़ोरम और नगालैंड में प्रवेश करने हेतु आवश्यक है।
  • यह उन राज्यों में ऐसे लोगों की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिये बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के तहत जारी किया जाता है, जो कि इन राज्यों से संबंधित नहीं हैं।
  • ILP एक सप्ताह के लिये मान्य होता है, लेकिन इसकी अवधि को बढ़ाया जा सकता है।
  • जो लोग इन राज्यों में अक्सर काम के लिये आते रहते हैं वे एक विशेष ILP का चुनाव कर सकते हैं। इस विशेष ILP का वार्षिक रूप से नवीनीकरण कराना पड़ता है।
  • चूँकि ILP भारतीयों के लिये और प्रोटेक्टेड एरिया परमिट विदेशियों के लिये अनिवार्य है, तथ्य यह है कि अरुणाचल प्रदेश से निकाले गए मजदूरों के पास परमिट नहीं था, जो उनकी राष्ट्रीयता को संदेह के दायरे में लाता है।

NRC कहाँ उपयुक्त होता है?

  • 31 दिसंबर, 2017 को NRC का पहला मसौदा प्रकाशित होने के बाद, असम के मुख्यमंत्री सरबानंद सोनोवाल ने कहा कि जो लोग सूची में अपना नाम शामिल करने में असफल रहे हैं उन्हें विदेशियों के रूप में पहचाना जाएगा तथा उन्हें सभी संवैधानिक अधिकारों से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
  • राजनीतिक टिप्पणीकारों ने कहा है कि NRC 5 लाख से 10 लाख लोगों को छोड़ सकता है, इनमें से अधिकाँश पर 'बांग्लादेशी' या नागरिकता विहीन का टैग लग सकता है।

अन्य राज्यों का डर

  • असम के पड़ोसी राज्यों को डर है कि ये घोषित गैर-नागरिक सस्ते श्रम की मांग पर नकदी के लिये इनके क्षेत्रों में स्थानांतरित हो सकते हैं। 
  • 4 जनवरी को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खंडू ने पुलिस को असम के साथ लगी सीमा के साथ निगरानी को मज़बूत करने का आदेश दिया था।
  • लगभग उसी समय, पूर्व नगालैंड के गृह मंत्री कुज़ोलुज़ो निएनू, ILP के दायरे में राज्य के वाणिज्यिक केंद्र दीमापुर को लाना चाहते थे क्योंकि "अवैध प्रवासियों ने इस शहर के माध्यम से नगालैंड में घुसपैठ की।“ 
  • ILP दीमापुर में लागू नहीं है।

कहाँ जाएँगे असम तथा अन्य राज्यों द्वारा निकाले गए अवैध प्रवासी?

  • ये सिस्टर स्टेट अक्सर "अवैध प्रवासियों", जो कुशल और अकुशल श्रमिकों के रूप में विडंबनापूर्ण रूप से अनिवार्य हैं, के साथ अपनी समस्याओं के लिये असम को दोष देते हैं। नगालैंड में उनके लिये भी एक शब्द है - IBI, जिसका तात्पर्य है अवैध बांग्लादेशी आप्रवासन (Illegal Bangladeshi Immigrant)।
  • नगा स्टूडेंट्स फेडरेशन जैसे संगठन गैर-नगा और IBI की संख्या का रिकॉर्ड रखने के लिये 'जनगणना' आयोजित करते हैं।

पूर्व में हुई घटनाएँ

  • 2008 में, कई बांग्ला भाषी मुसलमानों को नगालैंड के मोकोकचुंग शहर से बाहर निकाला गया था और इसने "जनसांख्यिकीय परिवर्तन" के चलते प्रवासियों के खिलाफ सतर्कता को जन्म दिया।
  • 2015 में इसी तरह की एक घटना हुई, जबकि अक्तूबर 2017 में  चुमुकेदीमा शहर के निवासियों ने IBI को बाहर रखने के लिये एक प्रस्ताव अपनाया।

सामाजिक वैज्ञानिकों का मत

  • सामाजिक वैज्ञानिकों का कहना है कि असम के शहरी क्षेत्रों में इन बाढ़ तथा क्षरण-विस्थापित लोगों की गतिविधि निकट भविष्य में स्वदेशी लोगों की तुलना में अवैध प्रवासियों के बारे में प्रलय के दिन वाले सिद्धांतों को बढ़ावा देती है।

अवैध प्रवासियों की निर्भरता

  • इस तरह के लोग अस्थायी रूप से दैनिक कामकाज या ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली की रेती पर निर्भर होते हैं।

क्या कहते हैं आँकड़े?

  • असम में 3,500 से अधिक रेती (sandbar) हैं, हालाँकि 14 साल पहले की पिछली जनगणना के अनुसार, इनकी आधिकारिक संख्या 2,089 है।
  • उस समय दैनिक मजदूरों के रूप में इनकी संख्या 24.9 लाख अर्थात् असम की आबादी के 9.35% थी।

NRC क्या है?

  • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Register of Citizens - NRC) में भारतीय नागरिकों के नाम शामिल होते हैं। 
  • NRC को वर्ष 1951 की जनगणना के बाद तैयार किया गया था। 
  • इसे जनगणना के दौरान वर्णित सभी व्यक्तियों के विवरणों के आधार पर तैयार किया गया था।
  • 31 दिसंबर, 2017 को बहु-प्रतीक्षित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Register of Citizens - NRC) का पहला ड्राफ्ट प्रकाशित किया गया। 
  • इसके अंतर्गत कानूनी तौर पर भारत के नागरिक के रूप में पहचान प्राप्त करने हेतु असम में तकरीबन 3.29 करोड़ आवेदन प्रस्तुत किये गए थे, जिनमें से कुल 1.9 करोड़ लोगों के नामों को ही इसमें शामिल किया गया है।
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