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ग्रामीण सर्वेक्षण में आंध्र प्रदेश के गाँव सर्वाधिक विकसित

  • 18 Oct 2018
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

ग्रामीण विकास मंत्रालय के सर्वेक्षण के निष्कर्षों के मुताबिक कर्नाटक के बेलगावी ज़िले में स्थित कुलिगोद देश का सबसे विकसित गाँव है। सर्वेक्षण के मुताबिक शीर्ष 10 विकसित गाँवों में से एक-तिहाई से अधिक आंध्र प्रदेश में हैं।

प्रमुख बिंदु 

  • प्रदेश के कई ग्राम पंचायतों को समान स्कोर प्राप्त हुए हैं और इस प्रकार एक ही रैंकिंग में आबद्ध शीर्ष 10 की रैंकिंग में 97 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से 37 आंध्र प्रदेश में हैं, जबकि 24 तमिलनाडु में हैं।
  • ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मिशन अंत्योदय अभिसरण योजना के तहत 1.6 लाख से अधिक पंचायतों के 3.5 लाख से अधिक गाँवों का एक अंतराल (gap) विश्लेषण किया है।
  • अधिकारियों की एक टीम ने बुनियादी ढाँचा, आर्थिक विकास और आजीविका, सिंचाई सुविधाएँ, स्वास्थ्य, पोषण तथा स्वच्छता, महिला सशक्तीकरण और वित्तीय समावेशन से संबंधित मानकों का उपयोग करके गाँव स्तर की सुविधाओं का सर्वेक्षण किया तथा इन मानकों के आधार पर स्कोर किया है।
  • अक्तूबर 2017 में 50,000 ग्राम पंचायतों में शुरुआती बेसलाइन सर्वेक्षण किया गया था, इस साल नवंबर माह के अंत तक देश के 2.5 लाख पंचायतों को कवर किये जाने की उम्मीद है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर डेटा कुछ क्षेत्रों में प्रगति दिखाता है और कुछ अन्य सरकारी योजनाओं के तहत लक्ष्यों की प्राप्ति के संबंध में विसंगतियों पर प्रकाश डालता है।
  • उदाहरण के लिये सर्वेक्षण से पता चलता है कि 95% से अधिक गाँवों में घरेलू उपयोग के लिये बिजली उपलब्ध है, जबकि सरकार ने इस साल के आरंभ में दावा किया था कि 100% गाँवों में बिजली कनेक्शन उपलब्ध हैं।
  • इसी प्रकार स्वच्छता के संबंध में, सर्वेक्षण में केवल 58% गाँवों को खुले में शौच से मुक्त बताया गया है। अर्थात् सर्वेक्षण किये गए 3.5 लाख गाँवों में से केवल 2 लाख से अधिक गाँव खुले में शौच से मुक्त (ODF) हैं।
  • हालाँकि, स्वच्छ भारत अभियान-ग्रामीण के अनुसार, भारत के 6 लाख गाँवों में से 5.13 लाख गाँव पहले ही खुले में शौच से मुक्त हैं।
  • सर्वेक्षण में 21% गाँवों को समुदाय अपशिष्ट निपटान प्रणाली (community waste disposal system) वाले गाँवों के रूप में दिखाया गया है।
  • सर्वेक्षण के अनुसार, एक-चौथाई से अधिक गाँवों में एलपीजी या बायोगैस जैसे स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग करने वाले लगभग 75% से अधिक परिवार हैं।
  • सर्वेक्षण ग्रामीण आवास योजना में मामूली प्रगति का संकेत देता हैI 10% से कम गाँवों में 80% से अधिक घर ऐसे हैं जिनकी कच्ची दीवारें तथा छतें हैं, जो अस्थायी संरचनाओं का संकेत देते हैं।
  • 73% से अधिक गाँव सभी मौसमों में जुड़ने के लिये सड़कों से युक्त हैं।
  • वित्तीय समावेशन की प्रगति अभी धीमी है। सर्वेक्षण के अनुसार, बैंकों से युक्त गाँव 15% से भी कम हैं, जबकि 10% से अधिक गाँवों में एटीएम मशीनें मौजूद हैं।
  • सर्वेक्षण के मुताबिक 26% से अधिक गाँवों में डाकघर की सुविधाएँ मौजूद हैं, केवल 8% गाँवों में मृदा परीक्षण केंद्र हैं तथा लगभग 12% गाँवों में सरकारी बीज केंद्र हैं।
  • अंतराल विश्लेषण नागरिकों और नीति निर्माताओं को राष्ट्रव्यापी रुझानों के अलावा, प्रत्येक गाँव में विकास को ट्रैक करने की अनुमति देता है।
  • उदाहरण के लिये, 6970 की कुल आबादी वाला एक गाँव कुलगोड में 2011 की जनगणना के बाद सिंचाई सुविधाओं में काफी सुधार हुआ है, जो उस समय के 82 हेक्टेयर से बढ़कर 3,472 हेक्टेयर हो गया है।
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