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कोयला ब्लॉकों का मूल्य निर्धारण करने के लिये सूचकांक

  • 23 Jul 2018
  • 5 min read

संदर्भ

वर्ष 2017 में सरकार ने कोयला ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया की जाँच करने के लिये एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। हाल ही में इस समिति ने सरकार को अपनी सिफारिशें सौंप दी हैं जिसमें कोयला ब्लॉकों की वर्तमान नीलामी प्रक्रिया में बड़े बदलाव का सुझाव दिया गया है।

चार सिद्धांतों पर आधारित हैं सिफारिशें
समिति द्वारा प्रस्तुत की गई सिफारिशें चार सिद्धांतों पर निर्भर हैं – 

  • पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना (ensuring transparency and fairness) 
  • समान शेयर (equity)
  • कोयला ब्लॉक का शीघ्र विकास (early development of coal blocks)
  • सिफारिशों के कार्यान्वयन में सहजता (simplicity of implementation of the recommendations)

प्रस्तावित परिवर्तनों का उद्देश्य 

  • बोलीदाताओं की संख्या में लोच (flexibility) लाना, 
  • कार्ययोजना को पूरा करने में चूक होने पर जुर्माना (और बैंक गारंटी की निरस्तता), 
  • परियोजना निष्पादन  (project execution)
  • बाज़ार में कोयले को बेचने के लिये सीमित संख्या में खनिकों को छूट देना।

समिति की सिफारिशें

  • पैनल ने ब्लॉक के मूल्य और राज्यों के साथ राजस्व-साझा मॉडल का निर्धारण करने के लिये कोयला इंडेक्स विकसित करने की सिफारिश की है। वर्तमान में मूल्यांकन कोल इंडिया लिमिटेड की अधिसूचित कीमत के आधार पर किया जाता है।
  • यदि बोलीदाताओं की संख्या तीन से कम हो तो ऐसी स्थिति में समिति ने नीलामी रद्द करने की वर्तमान प्रणाली को समाप्त करने का सुझाव दिया है। समिति का कहना है कि बोली लगाने योग्य पात्र बोलीदाताओं को खोजने में असफल होने पर एकल बोली स्वीकार की जानी चाहिये, बशर्ते प्रस्तावित मूल्य आरक्षित मूल्य के मानदंडों के अनुसार हो। 
  • उल्लेखनीय है कि पिछली नीलामी में अधिकांश ब्लॉकों को आवंटित नहीं किया जा सका क्योंकि पात्र बोलीदाताओं की संख्या तीन से कम थी।

वर्तमान प्रणाली को समाप्त करना क्यों आवश्यक है? 

  • यदि प्रस्तावित सिफारिशों को स्वीकार कर लिया जाता है तो यह मौजूदा प्रणाली में एक व्यापक बदलाव को प्रदर्शित करेगा। उल्लेखनीय हैं कि मौज़ूदा प्रणाली की शुरुआत 204 कोयला ब्लॉकों का आवंटन रद्द होने के बाद की गई थी। 
  • वर्तमान प्रक्रिया लागू होने के बाद बोलीदाताओं ने कोयला ब्लॉकों की को खरीदने में कोई रूचि नहीं दिखाई।
  • यहाँ तक कि जिन कंपनियों ने ब्लॉक ख़रीदे भी उन्होंने अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये खानों का विकास करने की बजाय कोयले के आयात को अधिक महत्त्व दिया क्योंकि यह कोयला ब्लॉको का विकास करने की तुलना में अधिक सस्ता था। 
  • इसके बाद इन ब्लॉकों को खरीदने वाला कोई नहीं था जिसके चलते सरकार को इस पर पुनर्विचार करने के लिये मजबूर होना पड़ा। 

समिति का गठन

  • विशेषज्ञों की समिति जिसका गठन “वर्तमान नीलामी प्रणाली के सामने आने वाली चुनौतियों और परिवर्तनों की सिफारिश’ पर रिपोर्ट देने के लिये किया गया था, की अध्यक्षता प्रत्यूष सिन्हा ने की तथा इसमें नौकरशाहों, पूर्व नौकरशाहों और एसबीआई तथा यूनियन बैंक के पूर्व अध्यक्ष को शामिल किया गया था। 

कोयला ब्लॉकों के विस्तार की गति धीमी होने के कारण

  • नीलामी के दौरान कुछ बोलीदाताओं द्वारा लगाई गईं आक्रामक बोलियाँ (Aggressive Bids), 
  • अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में और साथ ही ई-नीलामी में कोयले की कीमतों में गिरावट, 
  • कोयला-ब्लॉक हासिल करने वाली कुछ कंपनियों की कमज़ोर वित्तीय स्थिति।
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