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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक और भारत

  • 01 Aug 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक, बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव, एशियाई विकास बैंक

मेन्स के लिये:

एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक द्वारा भारत की विभिन्न परियोजनाओं के लिये आवंटित ऋण का महत्त्व क्षेत्रीय विकास के संदर्भ में 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में जिन लिक्यून (Jin Liqun) को पाँच वर्षों के दूसरे कार्यकाल के लिये चीन स्थित ‘एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक’ (Asian Infrastructure Investment Bank- AIIB) के अध्यक्ष पद हेतु पुनः निर्वाचित किया गया है।

प्रमुख बिंदु:

  • जिन लिक्यून के अनुसार, AIIB द्वारा एक 'गैर राजनीतिक संस्था' के रुप में भारत में परियोजनाओं को जारी रखा जाएगा।
  • बैंक के प्रबंधन द्वारा राजनीतिक दृष्टि से नहीं बल्कि आर्थिक और वित्तीय दृष्टिकोण से प्रस्तावित परियोजनाओं का निरीक्षण किया जाएगा।

भारत और एआईआईबी:

  • वर्ष 2016 में स्थापित AIIB के 57 संस्थापक सदस्यों में से भारत एक है।
  • भारत, AIIB में चीन (26.06%) के बाद दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक (7.62% वोटिंग शेयर के साथ) है।
  • भारत द्वारा AIIB से 4.35 बिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण प्राप्त किया गया है जो किसी भी देश द्वारा प्राप्त सबसे अधिक ऋण राशि है।
    •  AIIB द्वारा अब तक 24 देशों में 87 परियोजनाओं को वित्तपोषित करने के लिये  19.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर के ऋण को मंज़ूरी दी है।
    • तुर्की 1.95 बिलियन अमेरिकी डॉलर के साथ ऋण प्राप्ति में दूसरे स्थान पर है।
  • AIIB द्वारा भारत में ऊर्जा, परिवहन एवं पानी जैसे क्षेत्रों के अलावा बंगलुरु मेट्रो रेल परियोजना (USD 335 मिलियन), गुजरात में ग्रामीण सड़क परियोजना (USD 329 मिलियन) तथा मुंबई शहरी परिवहन परियोजना के चरण-3 (500 मिलियन अमेरिकी डॉलर) परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिये मंज़ूरी दी गई  है।
  • हाल ही में एक आभासी बैठक में भारत द्वारा यह कहा गया कि COVID-19 संकट के दौरान AIIB से अपेक्षा की जाती है यह एआईआईबी पुनर्प्राप्ति प्रतिक्रिया (AIIB’s Recovery Response) अर्थात ‘क्राइसिस रिकवरी फैसिलिटी’ द्वारा सामाजिक बुनियादी ढाँचे को विकसित करने तथा जलवायु परिवर्तन एवं सतत् ऊर्जा संबंधी बुनियादी ढाँचे के विकास को एकीकृत करने के लिये नए वित्त संसाधनों को उपलब्ध कराए।
    • इसका निहितार्थ यह है कि हाल ही में भारत द्वारा चीन के साथ अपने व्यापार और निवेश को कम किया गया है इसके बावजूद भारत का चीन के नेतृत्व वाले एशियाई इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक के साथ अपने सहयोग को बदलने या कम करने का कोई इरादा नहीं है।

चीन का दृष्टिकोण:

  • जून 2020 में, AIIB द्वारा एशियन डेवलपमेंट बैंक (Asian Development Bank-ADB) के साथ मिलकर ‘COVID-19 इमरजेंसी रिस्पांस फंड और हेल्थ सिस्टम्स प्रिपेडनेस प्रोजेक्ट’ के लिये 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर तथा ‘COVID-19 एक्टिव रिस्पॉन्स और एक्सपेंडेचर सपोर्ट’ (COVID-19 Active Response and Expenditure Support) के लिये 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर के वित्त को मंज़ूरी प्रदान की गई है।
    • भारत-चीन सीमा के साथ लद्दाख की गलवान घाटी में झड़प के दो दिन बाद भी 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ऋण को मंज़ूरी दी गई थी।
  • AIIB द्वारा ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (Belt and Road Initiative- BRI) के तहत कई परियोजनाओं का समर्थन किया गया है, हालाँकि यह औपचारिक रूप से इस परियोजना से जुड़ा हुआ नहीं है। 
    • चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा जो BRI परियोजना का ही भाग है, भारत के लिये सामरिक दृष्टि से एक चिंता का विषय है।

एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक:

  • एआईआईबी एशिया में सामाजिक और आर्थिक परिणामों को बेहतर बनाने के मिशन के साथ एक बहुपक्षीय विकास बैंक है।
  • इसका  मुख्यालय बीजिंग (चीन) में है। 
  • इसने जनवरी, 2016 में कार्य करना शुरू कर दिया था।
  • विश्व में इसके कुल अनुमोदित सदस्यों की संख्या बढ़कर 103 हो गई है।

आगे की राह:

  • भारत को AIIB के साथ अपने संबंधों को मज़बूती के साथ कायम रखना चाहिये क्योंकि यह राष्ट्रीय और सीमा पार बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिये संसाधनों का उपयोग करने में सहायक होगा।
  • जिस प्रकार विश्व बैंक में अमेरिका का वर्चस्व है तथा एशियाई विकास बैंक (Asian Development Bank- ADB) पर जापान का उसी प्रकार AIIB का भी महत्त्व है।
  • भारत को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि उसके हितों को सदस्य देशों द्वारा स्पष्ट के साथ रखा जाए साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि AIIB चीनी भू राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं है।

स्रोत: द हिंदू

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