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सेशेल्स को एक और डोर्नियर विमान का तोहफा

  • 28 Jun 2018
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत ने सेशेल्स को एक और डोर्नियर समुद्री गश्ती विमान (Dornier maritime patrol aircraf) उपहार में दिया है, यह विमान द्वीपीय राष्ट्र सेशेल्स की निगरानी क्षमताओं में वृद्धि करने में उपयोगी सिद्ध होगा।

महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेशेल्स के लिये $ 100 मिलियन की ऋण राशि की घोषणा की जिसके तहत सेशेल्स भारत से सैन्य हार्डवेयर खरीद सकता है। यह निर्णय सेशेल्स की सैन्य क्षमताओं में वृद्धि करने के उद्देश्य से लिया गया है।
  • इस विमान को Do-228 के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (Hindustan Aeronautics Limited-HAL) द्वारा किया गया है।
  • Do-228 विमान को औपचारिक रूप से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए सेशेल्स के राष्ट्रपति डेनी फौरे को सौंपा गया।
  • HAL Do-228 विमान सौंपे जाने से जहाँ एक ओर भारत और सेशेल्स के बीच सहयोग  का क्षेत्र और अधिक विकसित, समेकित और विस्तारित होगा, वहीं दूसरी ओर, दोनों देशों के बीच आपसी प्रतिबद्धता और भागीदारी में भी वृद्धि होगी।
  • इस विमान के सटीक परिचालन हेतु HAL द्वारा सेशेल्स के पायलट और मेंटेनेंस स्टाफ को ट्रेनिंग भी दी गई है। 

मार्च 2015 में किया था वादा

  • गौरतलब है कि मार्च 2015 में सेशेल्स की अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समुद्री खतरों से निपटने और हिंद महासागर के द्वीपीय देश सेशेल्स की निगरानी क्षमता में वृद्धि करने के लिये दूसरा डोर्नियर विमान उपहार में देने संबंधी घोषणा की थी।
  • इससे पहले जनवरी 2013 में भारत ने सेशेल्स को पहला विमान भेंट किया था।
  • समुद्री पड़ोसी के रूप में भारत और सेशेल्स निरंतर विकास की राह सुनिश्चित करने के लिये पूरी तरह से अपने समुद्री क्षेत्र को सुरक्षित करने हेतु प्रतिबद्ध हैं। समुद्री क्षेत्रों को सुरक्षित करने से जहाँ दोनों देशों की आर्थिक एवं रणनीतिक पहलों को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर, इससे दोनों देशों और इनके लोगों की प्रगति व समृद्धि हेतु भी एक शांतिपूर्ण वातावरण तैयार होगा।

डोर्नियर विमान

  • डार्नियर-228 विमान 360 डिग्री वाले निगरानी रडार (surveillance radar) से लैस है। इसके अलावा इसमें फारवर्ड लुकिंग इन्फ्रारेड सिस्टम (Infra-red system), उपग्रह संचार (satellite communication), ट्रैफिक कोलाइजन एण्ड अवायडेंस सिस्टम (traffic collision and avoidance system), एन्हेंस्ड ग्राउंड प्रोक्सीमीटी वार्निग सिस्टम (enhanced ground proximity warning system) के साथ-साथ अन्य सेंसर भी लगाए गए हैं।
  • दो टर्बोप्राप इंजन वाले इस विमान का इस्तेमाल मुख्यतौर पर ईईजेड निगरानी, प्रदूषण निगरानी एवं नियन्त्रण, खोज तथा बचाव अभियानों के साथ-साथ अन्य बचाव कार्यों आदि में भी किया जाता है।
  • दो पायलटों वाला यह विमान काफी दूर तक उड़ान भरने में सक्षम है। साथ ही इसके रख-रखाव पर भी काफी कम खर्च आता है। 
  • यह विमान न केवल सेशेल्स की तटीय निगरानी को मज़बूती प्रदान करेगा बल्कि व्यापक एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (Exclusive Economic Zone - EEZ) को प्रभावी बनाने के लिये रणनीतिक गहनता भी प्रदान करेगा।
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