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शासन व्यवस्था

द्वितीय राष्ट्रीय GST सम्मेलन

  • 08 Jan 2020
  • 4 min read

प्रीलिम्स के लिये:

GST, National GST Conference, GST परिषद, CBDT, इनपुट टैक्स क्रेडिट

मेन्स के लिये:

कर सुधारों की दिशा में उठाए गए कदम, राष्ट्रीय GST सम्मेलन के निहितार्थ

चर्चा में क्यों?

वित्त मंत्रालय के राजस्व सचिव की अध्यक्षता में 7 जनवरी, 2020 को राज्य कर आयुक्तों (Commissioner of State Tax) और केंद्रीय कर के मुख्य आयुक्तों (Chief Commissioners of Central Tax) का दूसरा राष्ट्रीय GST सम्मेलन आयोजित किया गया।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • यह सम्मेलन वस्तु और सेवा कर (Goods and Service Tax- GST) प्रणाली को सुव्यवस्थित करने तथा राजस्व के रिसाव की समस्या को हल करने के लिये बहुआयामी मंथन पर केंद्रित था।
  • यह अखिल भारतीय सम्मेलन का दूसरा संस्करण था जहाँ दोनों कर प्रशासन औपचारिक रूप से तालमेल बनाने और कर प्रशासन में एकरूपता लाने के इरादे से अपने ज्ञान एवं सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिये एक साथ आए।
  • सम्मेलन के दौरान GST परिषद (GST Council- GSTC), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (Central Board of Direct Taxes- CBDT), केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (Central Board of Indirect Taxes and Customs- CBIC), वित्तीय खुफिया इकाई (Financial Intelligence Unit- FIU), राजस्व विभाग (Department of Revenue- DoR), GST खुफिया महानिदेशालय (Directorate General of GST Intelligence- DGGI) और राज्य कर प्रशासन आदि विभिन्न एजेंसियों के बीच अंतर-विभागीय डेटा का प्रसार करने के लिये एक तंत्र और मशीनरी तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया।
  • सम्मेलन में इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit- ITC) और IGST में धोखाधड़ी का अवलोकन किया गया।

सम्मेलन के अंतर्गत आवश्यक कार्रवाई के लिये निम्नलिखित उपाय तय किये गए:

  • GST की चोरी सहित फर्ज़ी रिफंड के दावों पर अंकुश लगाने के लिये एक निश्चित समय-सीमा में त्वरित उपायों की जाँच और उसे लागू करने हेतु केंद्र और राज्य के अधिकारियों की एक समिति का गठन करना। समिति एक सप्ताह के भीतर विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया बनाएगी जिसे जनवरी के अंत तक देश भर में लागू किया जा सकता है।
  • फर्ज़ी इनपुट टैक्स क्रेडिट, आयात-निर्यात में धोखाधड़ी और फर्ज़ी रिफंड के सभी मामलों की आयकर विभाग की जांच शाखा द्वारा अनिवार्य रूप से जाँच की जाएगी।
  • API के माध्यम से डेटा का आदान-प्रदान करने के लिये CBDT, CBIC और GSTN के बीच तथा CBDT से GSTN और CBIC और इसके विपरीत MoU पर हस्ताक्षर किये गए। साथ ही यह निर्णय लिया गया कि इस डेटा को वार्षिक आधार पर साझा किये जाने की बजाय तिमाही आधार पर साझा किया जाना चाहिये।
  • इस सम्मेलन में विदेशी प्रेषण रसीद और रिफंड संवितरण के लिये एक एकल बैंक खाता प्रदान करने का भी सुझाव दिया गया है|

स्रोत: पी.आई.बी.

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