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शासन व्यवस्था

12 मिलियन परिवारों के गरीबी उन्मूलन का प्रयास

  • 07 Aug 2019
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत संचालित कौशल आधारित मनरेगा (Mahatma Gandhi National Employment Guarantee Act-MGNREGA) योजना के माध्यम से लगभग 12 मिलियन परिवारों के गरीबी उन्मूलन का प्रयास कर रही है।

प्रमुख बिंदु

  • सरकार मनरेगा के तहत कार्य करने वाले 10 से 12 मिलियन परिवारों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ ही टिकाऊ संपति (Durable Assets) के सृजन को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है।

उप-कुशल श्रमिक (semi-skilled)

  • उप-कुशल श्रमिक वह श्रमिक होता है जो नियमित प्रकृति (Routine Nature) वाले कार्य करता है परंतु जिसमें वह स्वंय निर्णय लेने के स्थान पर किसी अन्य द्वारा लिये गए निर्णय को लागू करता है।
  • जबकि एक कुशल श्रमिक वह होता है जो स्वतंत्र निर्णय लेने और ज़िम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के साथ ही कुशलता से काम करने में सक्षम होता है।
  • नियमित प्रकृति (Routine Nature) के कार्यों के अंतर्गत सिक्यूरिटी गार्ड, ड्राईवर, फुटकर विक्रेता आदि कार्य आते है।
  • इस पहल के अंतर्गत प्रतिवर्ष मनरेगा के तहत काम करने वाले 50 मिलियन परिवारों में से .4 से .5 मिलियन परिवारों के एक सदस्य को 35-40 दिन का कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें उप -कुशल श्रमिक बनाया जाएगा जिससे वे भविष्य में अकुशल श्रमिक न बने रहें।
  • यह प्रशिक्षण मनरेगा के 100 कार्य दिवसों के अधीन ही दिया जाएगा, साथ ही मज़दूरी के नुकसान की भरपाई के लिये वज़ीफा (stipend) भी दिया जाएगा।
  • यह प्रशिक्षण दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (DDU-GKY), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NLRM), बैंकों द्वारा चलाए जाने वाले स्वरोज़गार कार्यक्रमों, आदि के माध्यम से प्रदान किया जाएगा।
  • कामगारों को कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) से सलंग्न कर फल वाली फसलों को उगाने, कलम बाँधने (Grafting) और बागवानी करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा जिससे वे मनरेगा के अतिरिक्त भी जीविकोपार्जन कर सकें।
  • इस पहल का उद्देश्य अगले 5 से 6 वर्ष में मनरेगा के तहत रोज़गार प्राप्त करने वाले 2 मिलियन परिवारों के कम-से-कम 1 सदस्य को उप-कुशल श्रमिक (semi skilled) बनाना और साथ ही टिकाऊ संपति के सृजन द्वारा 25 लाख परिवारों की आजीविका में सुधार कर गरीबी उन्मूलन करना है।
  • यह पहल मनरेगा पर पड़ने वाले कार्य बोझ को कम करने में सहायक साबित होगी।
  • अभी तक कौशल विकास के लिये मनरेगा के तहत संचालित प्रोजेक्ट लाइफ (LIFE) द्वारा 1.5 से 1.6 मिलियन परिवार लाभान्वित हो चुके है।
  • इस पहल के लिये सरकार प्रतिवर्ष 500-1000 करोड़ रुपए कौशल विकास पर खर्च करने की योजना बना रही है। यह केवल उन कामगारों तक सीमित नहीं है जो मनरेगा के तहत 100 दिवस का कार्य पूरा कर चुके हैं।

प्रोजेक्ट लाइफ-मनरेगा

Project-Livelihoods In Full Employment (LIFE)-MGNREGA

  • ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा इस प्रोजेक्ट को वर्ष 2015-16 में मनरेगा के तहत शुरू किया गया।
  • इसके तहत 15 से 35 आयु वर्ग के मज़दूरों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
  • यह उन मनरेगा मज़दूरों तक ही सीमित है जो 100 दिवस का काम पूरा कर चुके है।
  • इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और मनरेगा श्रमिकों के कौशल में सुधार करते हुए आजीविका में सुधार करना है जिससे वे आंशिक रोज़गार के स्थान पर पूर्ण रोज़गार प्राप्त कर सकें।

स्रोत: बिज़नेस स्टैण्डर्ड

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