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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

दक्षिण चीन सागर विवाद

  • 11 Feb 2021
  • 7 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में चीन ने USA को दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में पार्सल द्वीप समूह (Paracel Islands) के पास उसके एक युद्धपोत की मौजूदगी पर चेतावनी दी है।

प्रमुख बिंदु

दक्षिण चीन सागर विवाद के विषय में:

  • चीन का दावा:
    • चीन, पार्सल द्वीप समूह सहित लगभग संपूर्ण दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है।
      • ताइवान, फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया और वियतनाम भी इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर दावा करते हैं। इस क्षेत्र में प्राकृतिक तेल और गैस के भंडार होने का अनुमान है।
    • चीन के अनुसार, अमेरिकी युद्धपोत ने उसकी जल सीमा में बिना अनुमति के प्रवेश किया है। अतः चीन ने अमेरिका पर अपनी संप्रभुता के गंभीर उल्लंघन और क्षेत्रीय शांति को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया है।
  • अमेरिका का पक्ष:
    • अमेरिका के अनुसार, उसके युद्धपोत की अवस्थिति दक्षिण चीन सागर में अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुरूप है और वह इस क्षेत्र में नौपरिवहन मार्ग की सुरक्षा में मदद कर रहा है।
    • वह दक्षिण चीन सागर पर चीन का मुकाबला करने के अपने निरंतर प्रयासों के साथ तालमेल बैठा रहा है। इसके तहत हाल ही में अमेरिकी नौसेना ने एक विमान वाहक पोत को दक्षिण चीन सागर में भेजा है।
  • दक्षिण चीन सागर:
    • अवस्थिति: दक्षिण चीन सागर, दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित पश्चिमी प्रशांत महासागर का हिस्सा है। यह चीन के दक्षिण और पूर्व में तथा वियतनाम के दक्षिण में, फिलीपींस के पश्चिम में एवं बोर्नियो द्वीप के उत्तर में स्थित है।
      • यह पूर्वी चीन सागर से ताइवान जलसंधि द्वारा और फिलीपीन सागर से लूजॉन (Luzon) जलसंधि से जुड़ा हुआ है।
    • सीमावर्ती देश (उत्तर से दक्षिण): चीन, ताइवान, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई, इंडोनेशिया, सिंगापुर और वियतनाम।
    • सामरिक महत्त्व: इस सागर का हिंद महासागर और प्रशांत महासागर (मलक्का जलडमरूमध्य) के बीच संपर्क लिंक होने के कारण अत्यधिक रणनीतिक महत्त्व है।
      • व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (United Nations Conference on Trade And Development- UNCTAD) के अनुसार, वैश्विक नौपरिवहन का एक-तिहाई हिस्सा इसके अंतर्गत आता है। इस सागर के माध्यम से होने वाला अरबों डॉलर का व्यापार इसे एक महत्त्वपूर्ण भू-राजनीतिक जल निकाय बनाता है।

UNCTAD

दक्षिण चीन सागर में विवाद का कारण:

  • यहाँ के द्वीपों पर दावा:
    • पार्सल द्वीप समूह पर चीन, ताइवान और वियतनाम द्वारा दावा किया जाता है।
    • स्प्रैटली द्वीप समूह पर चीन, ताइवान, वियतनाम, ब्रुनेई और फिलीपींस द्वारा दावा किया जाता है।
    • स्कारबोरो सोल (Scarborough Shoal) द्वीप पर फिलीपींस, चीन और ताइवान द्वारा दावा किया जाता है।
  • चीन का दावा:
    • चीन वर्ष 2010 से निर्जन छोटे-छोटे द्वीपों को संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UN Convention on the Law of the Sea-UNCLOS) के तहत लाने के लिये कृत्रिम द्वीपों में परिवर्तित कर रहा है ।
    • चीन इन द्वीपों के आकार और संरचना को कृत्रिम तरीके से बदल रहा है। इसने पार्सल और स्प्रैटली पर अपनी हवाई पट्टी भी स्थापित की है।
    • चीन के मछली पकड़ने वाले बेड़े मछली पकड़ने के वाणिज्यिक उद्यम के बजाय राज्य की ओर से अर्द्धसैनिक काम में लगाए गए हैं।
    • अमेरिका इन कृत्रिम द्वीपों के निर्माण की आलोचना करता है और इसे चीन द्वारा बनाई गई 'रेत की एक महान दीवार' के रूप में प्रस्तुत करता है।
  • अन्य मुद्दे:
    • दक्षिण चीन सागर का अनिश्चित भौगोलिक दायरा।
    • विवाद निपटान तंत्र पर असहमति।
    • आचार संहिता (Code of Conduct) का कानूनी रूप से अपरिभाषित होना।
    • इस मामले को दक्षिण चीन सागर को लेकर देशों का अलग-अलग इतिहास वृतांत तथा समुद्र में बड़े पैमाने पर फैले निर्जन द्वीप समूह और अधिक जटिल एवं बहुआयामी बनाते हैं।

South-china-sea

  • भारत का पक्ष: 
    • भारत ने यह सुनिश्चित किया है कि वह दक्षिण चीन सागर विवाद में किसी भी पक्ष में शामिल नहीं है और यहाँ इसकी उपस्थिति चीन को नियंत्रित करने के लिये नहीं है, बल्कि अपने स्वयं के आर्थिक हितों विशेषकर ऊर्जा सुरक्षा की ज़रूरतों को सुरक्षित करने के लिये है।
    • दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती क्षमता ने भारत को इस मुद्दे पर अपने दृष्टिकोण का पुनर्मूल्यांकन करने के लिये मजबूर कर दिया है।
    • भारत ने एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policy) के एक प्रमुख घटक के रूप में दक्षिण चीन सागर में चीन की धमकी की रणनीति का विरोध करने के लिये भारत-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में विवादों का अंतर्राष्ट्रीयकरण का कार्य शुरू कर दिया है।
    • भारत अपनी बौद्ध विरासत का उपयोग दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ एक मज़बूत बंधन बनाने के लिये कर रहा है।
    • भारत ने दक्षिण चीन सागर में समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिये वियतनाम के साथ अपनी नौसेना को तैनात किया है, जो चीन को विरोध करने का कोई अवसर नहीं देता है।
    • भारत, क्वाड पहल (Quad- भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का हिस्सा है। इन पहलों को चीन द्वारा एक नियंत्रण रणनीति के रूप में देखा जाता है।

स्रोत: द  हिंदू

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