हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:
झारखण्ड संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य प्रतियोगिता परीक्षा 2016 -परीक्षाफलछत्तीसगढ़ पीसीएस प्रश्नपत्र 2019छत्तीसगढ़ पी.सी.एस. (प्रारंभिक) परीक्षा, 2019 (महत्त्वपूर्ण अध्ययन सामग्री).छत्तीसगढ़ पी.सी.एस. प्रारंभिक परीक्षा – 2019 सामान्य अध्ययन – I (मॉडल पेपर )
हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स (Hindi Literature: Pendrive Course)
मध्य प्रदेश पी.सी.एस. (प्रारंभिक) परीक्षा , 2019 (महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री)मध्य प्रदेश पी.सी.एस. परीक्षा मॉडल पेपर.Download : उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (प्रवर) प्रारंभिक परीक्षा 2019 - प्रश्नपत्र & उत्तर कुंजीअब आप हमसे Telegram पर भी जुड़ सकते हैं !यू.पी.पी.सी.एस. परीक्षा 2017 चयनित उम्मीदवार.UPSC CSE 2020 : प्रारंभिक परीक्षा टेस्ट सीरीज़

चर्चित मुद्दे

भारत-विश्व

पाकिस्तान: नागरिकता व अल्पसंख्यक अधिकारों से संबंधित प्रावधान 

  • 24 Dec 2019
  • 8 min read

संदर्भ:

भारतीय संसद द्वारा पारित नागरिकता संशोधन अधिनियम ( Citizenship Amendment Act ) ने तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान, बांग्लादेश से आए धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिये भारतीय नागरिकता प्राप्त करने संबंधी प्रावधानों को आसान बना दिया है। इस चर्चा के क्रम में हमारे लिये भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में नागरिकता और धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों से संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों को जानना आवश्यक हो जाता है।

संविधान में मूलभूत अंतर:

  • हमें पाकिस्तान में नागरिकता और धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों से संबंधित प्रावधानों को समझने से पूर्व भारत और पाकिस्तान के संविधान में वर्णित प्रस्तावना के मूलभूत अंतर को समझना होगा-
  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना देश को एक "संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य" के रूप में घोषित करती है। 42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा प्रस्तावना में समाजवादी एवं पंथनिरपेक्ष जैसे शब्दों को जोड़ा गया था।
  • पाकिस्तान के संविधान की प्रस्तावना "अल्लाह” के नाम पर प्रारंभ होती है। इसमें उल्लिखित है कि राज्य संविधान में लिखी बातों को मानने के लिये बाध्य है, जिसका वायदा वह अल्लाह को साक्ष्य मानकर करेगा। पाकिस्तान का संविधान ब्रह्मांड के संबंध में अल्लाह की संप्रभुता को स्वीकार करता है।

क्या पाकिस्तान में नागरिकता का आधार धर्म है?

  • हालाँकि एक इस्लामिक राज्य होने के बावजूद पाकिस्तान के संविधान में नागरिकता के संदर्भ में किसी धार्मिक सिद्धांत का उल्लेख नहीं है। पाकिस्तान नागरिकता अधिनियम, 1951 कुछ मामलों में भारत के नागरिकता अधिनियम के समान है या फिर इसे तुलनात्मक रूप से अधिक उदार कानून के रूप में देखा जा सकता है।
  • इस कानून की धारा 6 यह प्रावधान करती है कि 1 जनवरी, 1952 से पहले पाकिस्तान आने वाला कोई भी व्यक्ति वहाँ का नागरिक है।
  • धारा 3 किसी भी ऐसे व्यक्ति को नागरिकता प्रदान करती है, जिनके माता-पिता या दादा-दादी में से किसी का भी जन्म 31 मार्च, 1973 को पाकिस्तान में शामिल किसी भी क्षेत्र में हुआ था।
  • भारत के कानून की तरह पाकिस्तान में भी नागरिकता कानून की धारा 7 में कहा गया है कि 1 मार्च, 1947 के बाद भारत में प्रवास किया कोई भी व्यक्ति पाकिस्तान का नागरिक नहीं होगा। यदि वह नागरिकता प्राप्त करना चाहता है तो उसे पुनर्वास प्रक्रिया या स्थायी वापसी प्रक्रिया के तहत ही देश में नागरिकता दी जाएगी।
  • इसके अलावा पाकिस्तान के नागरिकता कानून में धारा 4 यह प्रावधान करती है कि अधिनियम के लागू होने के बाद पाकिस्तान में पैदा होने वाला प्रत्येक व्यक्ति जन्म से पाकिस्तान का नागरिक होगा।
  • यदि भारत की बात करें तो इसने वर्ष 1986 में संशोधनों के द्वारा प्रतिबंधात्मक योग्यता जोड़ी है। इसके तहत नागरिकता प्राप्त करने के लिये व्यक्ति के माता-पिता को भारतीय नागरिक होना चाहिये। इसके बाद वर्ष 2003 के नियमों के मुताबिक माता-पिता दोनों भारतीय नागरिक होने चाहिये और किसी भी परिस्थिति में कोई भी अवैध प्रवासी नहीं होना चाहिये।
  • पाकिस्तान में जम्मू-कश्मीर के प्रवासियों को तब तक पाकिस्तान का नागरिक माना जाता है जब तक कि पाकिस्तान के साथ कश्मीर का संबंध परिभाषित नहीं हो जाता है। सरकार द्वारा राष्ट्रमंडल देशों के नागरिकों को भी नागरिकता दी जा सकती है।

भारत एवं पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता 

  • भारत के संविधान की प्रस्तावना के विपरीत, पाकिस्तान के संविधान की प्रस्तावना में ही स्पष्ट है कि "अल्पसंख्यकों के लिये स्वतंत्र रूप से पर्याप्त प्रावधान किये जाएंगे।
  • संविधान में प्रावधान है कि धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार सभी को होगा और सब अपनी संस्कृति का विकास कर सकेंगे। 
  • अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्गों के वैध हितों की रक्षा की बात भी पाकिस्तान के संविधान में की गई है। बेशक यदि अल्पसंख्यकों के संबंध में अभिव्यक्ति की बात करें तो यह "वैध हितों" के मामले में प्रतिबंधात्मक है।
  • भारत के विपरीत पाकिस्तान सिर्फ अपने नागरिकों को ही धर्म की स्वतंत्रता व प्रचार-प्रसार करने का अधिकार देता है। वहीं भारत में विदेशियों सहित सभी को धर्म की स्वतंत्रता व प्रचार-प्रसार करने का अधिकार प्राप्त है।
  • विदित है की विदेशी मिशनरियों को ईसाई धर्म का प्रचार करने का भारत में अधिकार है, लेकिन पाकिस्तान में नहीं है।

पाकिस्तान के द्वारा अल्पसंख्यकों के वैध हितों की रक्षा के लिये उठाए गए कदम 

  • संविधान का अनुच्छेद 36 प्रावधान करता है कि राज्य संघ और प्रांतीय सेवाओं में उचित प्रतिनिधित्व सहित अल्पसंख्यकों के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा करेगा। 
  • इसके अतिरिक्त संविधान अल्पसंख्यकों लिये आरक्षण का प्रावधान करता है और नेशनल असेंबली में भी अल्पसंख्यकों के लिये 10 सीटें आरक्षित करता हैं। 
  • बलूचिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी केवल 1.25% है जबकि उनके लिये आरक्षण की सीमा 4.62% है। वहीं पाकिस्तान के पंजाब में 2.79% अल्पसंख्यक हैं और उन्हें 2.16% आरक्षण मिला है। सिंध में 8.69% अल्पसंख्यकों को 5.36% आरक्षण मिलता है।

पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिये व्यक्तिगत कानून

  • यद्यपि पाकिस्तान के संविधान में यह प्रावधान है कि राज्य के धर्म के साथ असंगत होने वाले कानूनों को असंवैधानिक माना जाएगा। लेकिन, पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 227 (3) के अनुसार इस प्रावधान से अल्पसंख्यकों के व्यक्तिगत कानून को छूट दी गई है।
  • भारतीय संविधान के प्रावधानों के साथ सुमेलित न होने वाले अल्पसंख्यकों के ‘पर्सनल लॉ’ का कोई भी प्रावधान अशक्त और शून्य माना जाता है। इस प्रकार पर्सनल लॉ के आधार पर बना तीन तलाक वर्ष 2017 में अमान्य घोषित कर दिया गया।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

एसएमएस अलर्ट
 

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

प्रोग्रेस सूची देखने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

आर्टिकल्स को बुकमार्क करने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close