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पूर्वोत्तर ज़िलों के लिये ‘आकांक्षापूर्ण ज़िलों का रूपातंरण’ कार्यक्रम 
Feb 10, 2018

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-2: शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध
(खंड-10 : सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय)
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र - 3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन
(खंड-1 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय)
(खंड-2 : समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय)

north-eastern-india

चर्चा में क्यों?
पूर्वोत्तर के 14 ज़िलों को ‘आकांक्षापूर्ण विकास’ (Aspirational Development) के लिये चिह्नित किया गया है। ये 14 ज़िले देशभर के 106  ज़िलों से अलग हैं, जिन्हें नीति आयोग के तत्त्वावधान में ‘आकांक्षापूर्ण ज़िलों का रूपातंरण’ (Transformation of Aspirational Districts) कार्यक्रम के लिये चुना गया है।

कार्यक्रम का संक्षिप्त विवरण

  • ‘आकांक्षापूर्ण ज़िलों के रूपातंरण’ कार्यक्रम के तहत 14 ज़िलों में असम के ढोबरी, गोलपाड़ा, बारपेटा, दर्रांग, बकसा, उदालगुरी और हैलाकांडी; त्रिपुरा का ढलाई; मेघालय का रिबहोई; अरुणाचल प्रदेश का नमसाई; मणिपुर का चंदेल; मिज़ोरम का मामिट; नागालैंड का किफायर और सिक्किम का वेस्ट सिक्किम ज़िला शामिल है।
  • इस परियोजना के लिये एक विस्तृत रोड-मैप तैयार कर लिया गया है। संबंधित ज़िले की स्थिति, स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और कृषि जैसे घटकों के आधार पर तय की जाएगी।
  • परियोजना के पहले चरण की एक विस्तृत रूपरेखा में यह कहा गया है कि प्रत्येक जिले में एक मैदानी सर्वेक्षण किया जाएगा। प्रत्येक जिले के लिये चार स्तरीय निरीक्षण प्रणाली तैयार की गई है, जिसके लिये केंद्र सरकार से एक केंद्रीय नोडल अधिकारी, संबंधित राज्य से एक राज्य नोडल अधिकारी, एक ज़िला नोडल अधिकारी/ज़िला अधिकारी और केंद्र से एक प्रभारी मंत्री को नियुक्त किया गया है।

कार्यक्रम के उद्देश्य

  • कार्यक्रम की पूरी अवधारणा इस समझ पर आधारित है कि देश के सकल घरेलू उत्पाद का समग्र विकास तभी संभव होगा जब सभी राज्यों के समस्त क्षेत्र और जिले युक्तिसंगत विकास दर से आगे बढ़ेंगे।
  • इसके अभाव में अगर देश का एक भाग तेज़ी से विकास करता है तो दूसरे ज़िलों में विकास दर मामूली स्तर पर बनी रहेगी। देश के विभिन्न क्षेत्रों की विविधता के संदर्भ में राज्य और जिला स्तर पर कई तरह के अंतर व्याप्त हैं।
  • विभिन्न ज़िलों के समान विकास को ध्यान में रखते हुए ‘आकांक्षापूर्ण जिलों’ के तौर पर रूपातंरण के लिये जिलों की पहचान की गई है। 
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र के मामले में भौगोलिक और जलवायु संबंधी अनेक विविधताएँ मौजूद हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) ने गत वर्ष ‘पूर्वोत्तर पहाड़ी क्षेत्र विकास कार्यक्रम’ की भी शुरूआत की थी। 

पूर्वोत्तर पहाड़ी क्षेत्र विकास कार्यक्रम (Northeast Hill Area Development Programme)

  • 5 जून, 2017 को मणिपुर की राजधानी इंफाल में पूर्वोत्तर राज्यों के लिये “पहाड़ी क्षेत्र विकास कार्यक्रम (एचएडीपी)” की घोषणा की गई थी।
  • मणिपुर, त्रिपुरा और असम के पहाड़ी क्षेत्रों की विभिन्न पहचान है और ये क्षेत्र सामाजिक-आर्थिक विकास में पीछे छूट गए हैं। पहाड़ी क्षेत्र विकास कार्यक्रम कम विकसित पहाड़ी क्षेत्रों में ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य से बनाया गया है।
  • पायलट परियोजना के तौर पर इसे मणिपुर के पहाड़ी जिलों से प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। मणिपुर के संबंध में मैदानी क्षेत्रों के मुकाबले पहाड़ी क्षेत्रों का कम विकास हुआ है।
  • विशेष परिस्थितियाँ होने के कारण पहाड़ी और घाटी वाले जिलों में आधारभूत ढाँचा, सड़कों की गुणवत्ता, स्वास्थ्य और शिक्षा आदि क्षेत्रों में बड़ा अंतर आ गया है। पहाड़ी विकास कार्यक्रम इन सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए और अधिक गंभीर अनुसंधान करने हेतु प्रेरित है।
  • इन कार्यक्रमों का उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों के सभी क्षेत्रों, समाज के हर खंड और प्रत्येक जनजाति का समान विकास सुनिश्चित करने के साथ-साथ आठ पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत के अधिक विकसित राज्यों के समकक्ष लाना है।

स्रोत : द हिंदू और पी.आई.बी.


Helpline Number : 87501 87501
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