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फसल अवशेषों के प्रबंधन हेतु कृषि मशीनरी प्रोत्साहन  
Mar 08, 2018

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र - 3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन
(खंड-2 : समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय)
(खंड-5 :
प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र)
(खंड-14 :
संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

Agricultural-Machinery

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में फसल अवशेषों के स्व-स्थाने (In-situ) प्रबंधन के लिये कृषि मशीनरी प्रोत्साहन को अपनी स्वीकृति दे दी है।
  • वित्तीय वर्ष 2018-19 में 591.65 करोड़ रुपए और 2019-20 में 560.15 करोड़ रुपए के साथ केंद्र सरकार इसके लिये कुल 1151.80 करोड़ रुपए खर्च करेगी।

पृष्ठभूमि

  • 2018-19 के बजट में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश में फसल अवशेषों के स्व-स्थाने प्रबंधन तथा पराली जलाने की वज़ह से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में होने वाले वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिये आवश्यक मशीनरी पर सब्सिडी हेतु वर्ष 2018-19 से 2019-20 के लिये विशेष नई केंद्रीय क्षेत्र की योजना (100% केंद्रीय हिस्सेदारी) को शुरू करने की घोषणा की गई थी। 

योजना के घटक

  • स्व-स्थाने फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी के लिये कृषि मशीनरी बैंक की स्थापना की जाएगी जहाँ से किसान मशीनों को किराए पर ले सकेंगे।
  • किसानों की पंजीकृत सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), स्वंय सहायता समूहों, पंजीकृत किसान समितियों/किसान समूहों, निजी उद्यमियों, महिला किसान समूहों को कृषि मशीनरी बैंक अथवा कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित करने के लिये परियोजना लागत के 80% की दर से वित्तीय सहायता दी जाएगी।
  • स्व-स्थाने अवशेष प्रबंधन के लिये किसानों को कृषि मशीनरी तथा उपकरण खरीद हेतु वित्तीय सहायता देना। व्यक्तिगत रुप से किसानों को कृषि अवशेष प्रबंधन के लिये मशीनरी/उपकरणों की लागत के 50% की दर से वित्तीय सहायता दी जाएगी।
  • फसल अवशेष प्रबंधन पर जागरूकता के लिये राज्य सरकारों, किसान विकास केंद्रों, ICAR संस्थानों, केंद्र सरकार के संस्थानों, सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों इत्यादि को सूचना, शिक्षा तथा प्रचार-प्रसार के कार्यकलापों हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जायेगी।
  • इन गतिविधियों में लघु तथा दीर्घावधि की फिल्में, वृत्तचित्र, रेडियो तथा TV कार्यक्रम, प्रिंट मीडिया संबंधी विज्ञापन, स्टार अभियान, विभिन्न स्तरों पर प्रदर्शनात्मक शिविरों और प्रतिभा विकास कार्यक्रमों का आयोजन, दूरदर्शन, डीडी किसान तथा अन्य निजी चैनलों पर पैनल चर्चा के माध्यम से जन जागरूकता अभियान संचालित करना शामिल हैं।
  • इसके अलावा किसी भी प्रकार के को अवशेष न जलाने वाले ग्राम/ग्राम पंचायत को पुरस्कार भी दिया जाएगा। 

योजना के लाभार्थी

  • संबंधित राज्य सरकारें ज़िला स्तरीय कार्यकारी समितियों (DLECs) के माध्यम से विभिन्न लाभार्थियों और अवस्थिति-विशिष्ट (Location-specific) कृषि प्रणाली पर निर्भर कृषि उपकरण की पहचान करेगी और कस्टम हायरिंग और व्यक्तिगत स्वामित्व के आधार पर मशीनों की खरीद के लिये कृषि मशीनरी बैंक स्थापित करने हेतु लाभार्थियों की पहचान और चयन करेगी ताकि पारदर्शी तरीके से सही समय पर लाभों का वितरण सुनिश्चित किया जा सके।
  • राज्य नोडल विभाग/ DLECs लाभार्थी की ऋण आवश्यकता के लिये बैंकों के साथ गठबंधन करेंगे। चयनित लाभार्थियों के नाम एवं विवरण ज़िला स्तर पर दस्तावेज़ो में शामिल किये जाएगे जिसमें उनके आधार नंबर तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से दी गई वित्तीय सहायता दिखाई जाएगी।

कार्यान्वयन एजेंसियाँ

  • केंद्रीय स्तर पर यह योजना कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग (DAC&FW) द्वारा प्रशासित होगी।
  • कृषि सहकारिता और किसान कल्याण विभाग के सचिव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय संचालन समिति एक नीति तैयार करेगी और राज्य सरकार द्वारा योजना लागू करने के बारे में समग्र निर्देश और दिशा-निर्देश ज़ारी करने के साथ ही योजना की निगरानी तथा प्रगति एवं प्रदर्शन की समीक्षा करेगी।
  • अपर सचिव की अध्यक्षता में योजना की गतिविधियों की देख-रेख का कार्य कार्यकारी समिति करेगी।  
  • राज्य स्तर पर संबंधित राज्य सरकार अर्थात पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के राज्य कृषि विभाग नोडल कार्यान्वयन एजेंसी होंगे।
  • संबंधित राज्य सरकारों के प्रमुख सचिव कृषि/कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय कार्यान्वयन समितियाँ (SLEC) नोडल एजेंसियों तथा अन्य संबंधित विभागों के साथ नियमित बैठक कर अपने-अपने राज्यों में योजना के क्रियान्वयन की निगरानी करेंगे और उचित नीति बनाने के लिये कार्यकारी समिति को इनपुट प्रदान करेंगे।  
  • ज़िला स्तरीय कार्यकारी समिति परियोजना तैयार करने, उसे लागू करने और ज़िलों में निगरानी के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिये उत्तरदायी होंगी और किसान समूहों/ प्रगतिशील किसानों को शामिल करते हुए निगरानी समितियाँ बनाएंगी जो फसल अवशेष नहीं जलाने के लिये किसानों में जागरूकता का प्रसार करेंगी।
  • कृषि सहकारिता और किसान कल्याण विभाग फसल अवशेष के स्व-स्थाने प्रबंधन के लिये मशीन और उपकरणों के मूल्य के साथ निर्माताओं का एक पैनल तैयार करेगा।

स्रोत : द हिंदू एवं पी.आई.बी.


Helpline Number : 87501 87501
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