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पी.सी.एस.

विविध

सी.जी.पी.एस.सी. - प्रकृति एवं प्रक्रिया

  • 13 Apr 2019
  • 16 min read

परिचय (Introduction): 

सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान 
ज़्यादातर अभ्यर्थी राज्य सिविल सेवा (पी.सी.एस.) परीक्षाओं में भी सम्मिलित होते हैं। यह प्रवृत्ति हिंदी भाषी राज्यों के अभ्यर्थियों में अधिकांशत: देखने को मिलती है। मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ मूल के अभ्यर्थियों के अलावा सिविल सेवा की तैयारी करने वाले अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों (विशेषकर हिंदी माध्यम) के लिये भी छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सी.जी.पी.एस.सी.), रायपुर द्वारा आयोजित परीक्षाएँ विकल्प होती हैं। प्रश्नों की प्रकृति एवं प्रक्रिया में अंतर होने के बावजूद सिविल सेवा प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम के अध्ययन की सी.जी.पी.एस.सी. की इन परीक्षाओं में सार्थक भूमिका होती है इसलिये सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र इन परीक्षाओं में भी सफल होते हैं।

आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाएँ:

  • छत्तीसगढ़ में राज्य आधारित सरकारी, अर्द्ध-सरकारी, न्यायिक एवं अन्य अधीनस्थ सेवाओं का आयोजन मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सी.जी.पी.एस.सी.), रायपुर द्वारा किया जाता है। 

  • इस आयोग द्वारा आयोजित सर्वाधिक लोकप्रिय परीक्षा ‘छत्तीसगढ़ राज्य सेवा परीक्षा’ है।   

  • ‘छत्तीसगढ़ राज्य सेवा परीक्षा’ को प्रायः ‘सी.जी.पी.सी.एस.’ के नाम से भी जाना जाता है।

सी.जी.पी.सी.एस. परीक्षा- प्रकृति एवं प्रक्रिया     

परीक्षा की प्रकृति: 

  • आयोग द्वारा आयोजित इस प्रतियोगी परीक्षा में सामान्यत: क्रमवार तीन स्तर सम्मिलित हैं-
    1. प्रारम्भिक परीक्षा– वस्तुनिष्ठ प्रकृति
    2. मुख्य परीक्षा- वर्णनात्मक प्रकृति 
    3. साक्षात्कार-  मौखिक

परीक्षा की प्रक्रिया: 

प्रारम्भिक परीक्षा की प्रक्रिया:

  • सर्वप्रथम आयोग द्वारा इन परीक्षाओं से सम्बंधित विज्ञप्ति जारी की जाती है उसके पश्चात् ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू होती है। फॉर्म भरने की प्रक्रिया सम्बंधित विस्तृत जानकारी ‘विज्ञप्ति’ के अंतर्गत ‘ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?’ शीर्षक में दी गई होती है।    

  • विज्ञप्ति में उक्त परीक्षा से सम्बंधित विभिन्न पहलुओं का विस्तृत विवरण दिया गया होता है। अत: फॉर्म भरने से पहले इसका अध्ययन करना लाभदायक रहता है।     

  • फॉर्म भरने की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सामान्यतः 2 से 3 माह पश्चात् प्रारम्भिक परीक्षा आयोजित की जाती है। 

  • यह प्रारंभिक परीक्षा एक ही दिन आयोग द्वारा निर्धारित राज्य के विभिन्न केन्द्रों पर सम्पन्न होती है। 

  • आयोग द्वारा आयोजित इस प्रारम्भिक परीक्षा की प्रकृति वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) होती है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक प्रश्न के लिये दिये गए चार संभावित विकल्पों (a, b, c एवं d) में से एक सही विकल्प का चयन करना होता है।  

  • प्रश्न से सम्बंधित इस चयनित विकल्प को आयोग द्वारा दिये गए ओएमआर सीट में उसके सम्मुख दिये गए सम्बंधित गोले (सर्किल) में उचित स्थान पर काले बॉल पॉइंट पेन से भरना होता है।   

  • सी.जी.पी.एस.सी. द्वारा आयोजित इस परीक्षा में गलत उत्तर के लिये नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक गलत उत्तर के लिए सही उत्तर हेतु निर्धारित अंक का 1/3 अंक काटे जायेंगे।

  • प्रारम्भिक परीक्षा में कट-ऑफ का निर्धारण सिर्फ प्रथम प्रश्न पत्र अर्थात सामान्य अध्ययन में प्राप्त अंको के आधार पर किया जायेगा

  • यदि अभ्यर्थी किसी प्रश्न का एक से अधिक उत्तर देता है, तो उस उत्तर को गलत माना जाएगा, इस प्रकार दिये गए उत्तरों में से एक सही भी उत्तर हो, फिर भी उस प्रश्न के लिये उपरोक्तानुसार ही उसी तरह का दण्ड दिया जाएगा। 

  • यदि अभ्यर्थी द्वारा कोई प्रश्न हल नहीं किया जाता है, अर्थात अभ्यर्थी द्वारा उत्तर नहीं दिया जाता है, तो उस प्रश्न के लिये  कोई दण्ड नहीं होगा।  

 

  • प्रश्नपत्र दो भाषाओं (हिंदी एवं अंग्रेजी) में दिये गए होते हैं, किसी भी शब्द/वाक्य में भाषा विवाद की स्थिति में हिंदी भाषा में लिखे शब्द/वाक्य को आधार माना जाएगा।  

  • हिंदी भाषा ज्ञान और छत्तीसगढ़ी भाषा से सम्बंधित प्रश्न उसी भाषा में होंगे, इनका अनुवाद उपलब्ध नहीं होगा।      

  • आयोग द्वारा वर्ष 2012 में इस प्रारम्भिक परीक्षा की प्रकृति में बदलाव किया गया जिसके अनुसार द्वितीय प्रश्नपत्र में पूछे जाने वाले वैकल्पिक विषय (वस्तुनिष्ठ) के स्थान पर ‘योग्यता परीक्षण’ (एप्टिट्यूड टेस्ट) के प्रश्नपत्र को अपनाया गया।  

  • वर्तमान में आयोग की इस प्रारम्भिक परीक्षा में दो अनिवार्य प्रश्नपत्र (सामान्य अध्ययन एवं योग्यता परीक्षण) पूछे जाते हैं, जिसकी परीक्षा एक ही दिन दो विभिन्न पारियों में दो-दो घंटे की समयावधि में सम्पन्न होती है। ‘योग्यता परीक्षण’ के प्रश्नपत्र को ‘सीसैट’ (सिविल सर्विस एप्टिट्यूड टेस्ट) के नाम से भी जाना जाता है। 

  • यह प्रारम्भिक परीक्षा कुल 200 अंकों की होती है। 

  • प्रथम प्रश्नपत्र ‘सामान्य अध्ययन’ का है, जिसमें प्रश्नों की कुल संख्या 100 एवं अधिकतम अंक 200 निर्धारित हैं। 

  • द्वितीय प्रश्नपत्र ‘योग्यता परीक्षण’ का है, जिसमें प्रश्नों की कुल संख्या 100 एवं अधिकतम अंक 200 निर्धारित हैं। द्वितीय प्रश्न पत्र क्वालीफाइंग पेपर के रूप में है। 

  • इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये सामान्यत: 50-60% अंक प्राप्त करने की आवश्यकता होती है, किन्तु कभी-कभी प्रश्नों के कठिनाई स्तर को देखते हुए यह प्रतिशत कम भी हो सकती है। 

  • प्रारम्भिक परीक्षा की प्रकृति क्वालिफाइंग होती है। इसमें प्राप्त अंकों को मुख्य परीक्षा या साक्षात्कार के अंकों के साथ नहीं जोड़ा जाता है।   

नोट: 

  • प्रत्येक प्रश्नपत्र में अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को न्यूनतम 33% अर्हकारी अंक तथा आरक्षित वर्ग एवं विकलांग श्रेणी के अभ्यर्थियों को न्यूनतम 23% अर्हकारी अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा।   

  • द्वितीय प्रश्नपत्र योग्यता परीक्षा अर्हकारी प्रकृति की होगी। इस प्रश्न में अभिप्राप्त अंको को, मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यर्थीयों के चयन के लिए प्रावीण्य सूची तैयार करते समय नहीं जोड़ा जायेगा। प्रथम प्रश्न पत्र - सामान्य अध्ययन की प्रावीण्य सूची के आधार पर मुख्य परीक्षा के लिये अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा।

मुख्य परीक्षा की प्रक्रिया:

  • प्रारम्भिक परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों के लिये मुख्य परीक्षा का आयोजन आयोग द्वारा निर्धारित राज्य के विभिन्न केन्द्रों पर किया जाता है। 

  • वर्ष 2018 में हुये नवीन संशोधन 13 फ़रवरी 2019 छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित पाठ्यक्रम के अनुसार अब इस मुख्य परीक्षा में सात अनिवार्य प्रश्नपत्र पूछे जाएंगे। जिसमें प्रथम दो प्रश्नपत्र क्रमशः 'भाषा' एवं 'निबन्ध' से तथा अन्य पाँच प्रश्नपत्र सामान्य अध्ययन ('इतिहास, संविधान एवं लोक प्रशासन', 'विज्ञान, प्रौद्योगिकी, योग्यता परीक्षण, तार्किक योग्यता व बुद्धिमत्ता एवं पर्यावरण', 'अर्थव्यवस्था एवं भूगोल', 'दर्शन एवं समाजशास्त्र’ तथा कल्याणकारी, विकासात्मक कार्यक्रम एवं कानून, अंतराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय खेल, घटनाए एवं संगठन एवं शैक्षणिक संस्थाए एवं मानव विकास) से सम्बंधित है| इसकी विस्तृत जानकारी 'विज्ञप्ति का संक्षिप्त विवरण' के अंतर्गत 'पाठ्यक्रम' शीर्षक में दी गई होती है।  
  • मुख्य परीक्षा के प्रश्न परम्परागत प्रकार के लघु, मध्यम एवं दीर्घ उत्तरीय प्रकार के होते हैं। इसमें प्रश्नों के उत्तर की शब्द सीमा (30 शब्द, 60 शब्द, 100 शब्द, 125 शब्द एवं 175 शब्द) का ध्यान रखा जाता है। इन सभी प्रश्नों के उत्तर को आयोग द्वारा दिये गए उत्तर-पुस्तिका में अधिकतम तीन घंटे की समय सीमा में लिखना होता है।   

  • मुख्य परीक्षा कुल 1400 अंकों की होती है जिसमें सभी प्रश्नपत्रों (7 प्रश्नपत्र) के लिये अधिकतम 200-200 अंक निर्धारित किया गया है। 

  • प्रथम प्रश्नपत्र ‘भाषा’ को छोड़कर अन्य सभी प्रश्नपत्रों का उत्तर अभ्यर्थी अपनी इच्छानुसार केवल हिंदी या अंग्रेजी में दे सकेंगे, किन्तु किसी भी प्रश्नपत्र का उत्तर अंग्रेजी और हिंदी में अंशत: नहीं दिया जा सकेगा। 

  • द्वितीय प्रश्नपत्र (निबंध) में दो भाग (राष्ट्रीय स्तर की समस्याएँ एवं छत्तीसगढ़ राज्य की समस्याएँ) होंगे। अभ्यर्थी को प्रत्येक भाग से दिये गए चार-चार विकल्पों में से किसी दो-दो विकल्प का चयन कर समस्या-समाधान (कारण, वर्तमान स्थिति आँकड़ों सहित एवं समाधान) पर लगभग 750-750 शब्दों में कुल चार निबंध लिखना होगा। 

  • तृतीय प्रश्नपत्र से लेकर सातवें प्रश्नपत्र तक प्रत्येक प्रश्नपत्र 5 खंडों में विभाजित होगा। इसमें प्रत्येक खंड से क्रमशः 30 शब्द, 60 शब्द, 100 शब्द, 125 शब्द एवं 175 शब्द के प्रश्न पूछे जाएंगे।  

  • परीक्षा के इस चरण में सफलता प्राप्त करने के लिये सामान्यत: 60-65% अंक प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। हालाँकि पाठ्यक्रम में बदलाव के कारण यह प्रतिशत कुछ कम भी हो सकता है। 

  • पूर्व की भाँति ही इन प्रश्नपत्रों में प्राप्त किये गए अंक मेधा सूची में जोड़े जाएंगे। 

  • परीक्षा के सभी विषयों में कम से कम शब्दों में की गई संगठित, सूक्ष्म और सशक्त अभिव्यक्ति को श्रेय मिलेगा।

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साक्षात्कार की प्रक्रिया: 

  • मुख्य परीक्षा मे चयनित अभ्यर्थियों को सामान्यत: एक माह पश्चात् आयोग के समक्ष साक्षात्कार के लिये उपस्थित होना होता है। 

  • साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है, जिसमें आयोग के सदस्यों द्वारा आयोग में निर्धारित स्थान पर मौखिक प्रश्न पूछे जाते हैं जिसका उत्तर अभ्यर्थी को मौखिक रूप से देना होता है यह प्रक्रिया अभ्यर्थियों की संख्या के अनुसार एक से अधिक दिनों तक चलती हैं।     

  • सी.जी.पी.एस.सी. की इस परीक्षा में साक्षात्कार के लिये कुल 150 अंक निर्धारित किये गए हैं।  

  • मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गए अंकों के योग के आधार पर अंतिम रूप से मेधा सूची (मेरिट लिस्ट) तैयार की जाती है। 

  • सम्पूर्ण साक्षात्कार समाप्त होने के सामान्यत: एक सप्ताह पश्चात् अन्तिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी की जाती है।

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