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हरियाणा

हरियाणा ने पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र के नए सिरे से परिसीमन का प्रस्ताव रखा

  • 12 Mar 2024
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में हरियाणा सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि हरियाणा की ओर सुखना वन्यजीव अभयारण्य के आस-पास के 1,000 मीटर के क्षेत्र को इको-सेंसिटिव ज़ोन के रूप में चित्रित किया जाएगा।

मुख्य बिंदु:

  • हरियाणा की ओर पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र को चित्रित करने वाली अंतिम अधिसूचना जारी करने के लिये प्रस्ताव जनवरी 2024 में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) को भेजा गया था।
  • 25.98 वर्ग किमी. (लगभग 6420 एकड़) में फैला सुखना वन्यजीव अभयारण्य, केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासनिक नियंत्रण में है और इसकी सीमाएँ हरियाणा तथा पंजाब से लगती हैं।
    • संरक्षित क्षेत्र, विविध वनस्पतियों और जीवों से समृद्ध होने के कारण, इसमें विभिन्न प्रकार की स्थलाकृतिक विशेषताएँ शामिल हैं तथा इसे वर्ष 1988 में चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था।
  • MoEFCC को भेजे गए मसौदा प्रस्ताव के अनुसार:
    • प्रस्तावित पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 2,460 हेक्टेयर (लगभग 6,078 एकड़) होगा।
    • 10 गाँव - प्रेमपुरा, सुखोमाजरी, दामला, लोहगढ़, मानकपुर ठाकरदास, सूरजपुर, चंडीमंदिर कोटला, दर्रा खरौनी, रामपुर और साकेत्री/महादेवपुर प्रस्तावित ईएसजेड के अंतर्गत आते हैं।
    • राज्य सरकार ने ESZ को चार क्षेत्रों में विभाजित करने का प्रस्ताव दिया है:
      • ज़ोन 1 की सीमा सुखना वन्यजीव अभयारण्य की सीमा से 100 मीटर होगी।
      • ज़ोन 2 संरक्षित क्षेत्र की सीमा से 100 मीटर से 300 मीटर तक होगा।
      • ज़ोन 3 में संरक्षित क्षेत्र की सीमा से 300-700 मीटर के दायरे में आने वाला क्षेत्र शामिल होगा।
      • संरक्षित क्षेत्र में सीमा से 700 से 1,000 मीटर तक का शेष क्षेत्र ज़ोन 4 में होगा।
    • इसके आवास के संरक्षण के लिये निर्धारित गतिविधियों के अलावा अन्य सभी गतिविधियाँ निषिद्ध हैं।
    • -संवेदनशील क्षेत्र सदमे अवशोषक के रूप में कार्य करते हैं और संरक्षित क्षेत्र को निकटवर्ती क्षेत्रों में गतिविधियों के संभावित प्रतिकूल प्रभाव से बचाते हैं।
  • संशोधित मसौदे में राज्य सरकार ने भारतीय वन्यजीव संस्थान के इस सुझाव को भी शामिल किया है कि इको सेंसिटिव ज़ोन को आरक्षित वन सीमा तक बढ़ाया जाए।

पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (ESZ)

  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना (2002-2016) में निर्धारित किया गया है कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत राज्य सरकारों को राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों की सीमाओं के 10 किमी. के भीतर आने वाली भूमि को इको सेंसिटिव ज़ोन या पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) घोषित करना चाहिये।
  • हालाँकि 10 किलोमीटर के नियम को एक सामान्य सिद्धांत के रूप में लागू किया गया है, इसके क्रियान्वयन की सीमा अलग-अलग हो सकती है। पारिस्थितिक रूप से महत्त्वपूर्ण एवं विस्तृत क्षेत्रों, जो 10 किमी. से परे हों, को केंद्र सरकार द्वारा ESZ के रूप में अधिसूचित किया जा सकता है।

सुखना वन्यजीव अभयारण्य

  • यह चंडीगढ़ में स्थित है।
  • यह शिवालिक पहाड़ियों में पड़ने वाले सुखना झील जलग्रहण क्षेत्र का हिस्सा है।
  • जीव-जंतु: सांभर हिरण, बार्किंग हिरण और जंगली सूअर, साथ ही पक्षियों, सरीसृपों एवं उभयचरों की कई प्रजातियाँ।
  • वनस्पति: अभयारण्य की विशेषता वनों, घास के मैदानों और आर्द्रभूमियों का मिश्रण है, जिसमें सुखना झील पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।

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