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विविध

सितंबर 2018

  • 15 Jan 2019
  • 32 min read

PRS की प्रमुख हाइलाइट्स

समलैंगिकता (Homosexuality) अब अपराध नहीं : सर्वोच्च न्यायालय


हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने IPC (Indian Penal Code) की धारा 377 के तहत दी गई एक संवैधानिक चुनौती पर फैसला दिया।

  • धारा 377 में शामिल पशुओं और बच्चों से संबंधित अप्राकृतिक यौन संबंध स्थापित करने को अपराध की श्रेणी में रखने वाले प्रावधान पहले की ही तरह लागू रहेंगे। यानी बच्चों और पशुओं से यौन संबंध बनाना पूर्व की तरह ही अपराध की श्रेणी में आएगा।
  • भारत में समलैंगिकों के बीच शारीरिक संबंधों को अपराध मानते हुए उनके लिये 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सज़ा तथा ज़ुर्माने का प्रावधान है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने 157 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 को आंशिक रूप से निरस्त करते हुए अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि जब दो वयस्क, चाहे वे किसी भी लिंग के हों आपसी सहमति से एकांत में संबंध बनाते हैं तो इसे अपराध नहीं माना जा सकता।
  • न्यायालय ने आदेश में कहा कि जहाँ तक धारा 377 के तहत एकांत में वयस्कों द्वारा सहमति से यौन क्रियाओं को अपराध के दायरे में रखने का संबंध है, तो इससे संविधान के अनुच्छेद 14 (समता का अधिकार), 15 (धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध), 19 (स्वतंत्रता का अधिकार) और 21 (दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण) में प्रदत्त अधिकारों का हनन होता है।

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विशेष : समलैंगिकता अपराध नहीं (Homosexuality is not crime)

सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 377 को अपराधमुक्त घोषित किया


व्यभिचार (Adultery) अपराध है : सर्वोच्च न्यायालय


सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 497 के तहत दी गई एक संवैधानिक चुनौती पर फैसला देते हुए व्यभिचार को अपराध माना है। धारा 497 एक ऐसे व्यक्ति को सज़ा देने का प्रावधान करती है, जो किसी अन्य पुरुष की सहमति के बिना उसकी पत्नी के साथ संभोग करता है।

विस्तृत जानकारी के लिये दिये गए लिंक पर क्लिक करें

व्यभिचार अब अपराध नहीं : सर्वोच्च न्यायालय


सर्वोच्च न्यायालय ने लाइव स्ट्रीमिंग को दी मंज़ूरी


सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिये संवैधानिक एवं राष्ट्रीय महत्त्व वाले मामलों में की जाने वाली न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की अनुमति दे दी है। न्यायालय ने लाइव-स्ट्रीमिंग के लिये निम्नलिखित मॉडल दिशा-निर्देश तैयार किये हैं:

  • संवैधानिक और राष्ट्रीय महत्व के मामलों या केवल एक निर्दिष्ट श्रेणी के मामलों की अंतिम सुनवाई के लिये संविधान पीठ को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लाइव स्ट्रीम किया जा सकता है। वैवाहिक विवाद या यौन उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मामलों की लाइव स्ट्रीमिंग नहीं की जाएगी।
  • इसके अलावा, न्यायालय द्वारा शपथ ग्रहण समारोह या न्यायिक सम्मेलनों की लाइव स्ट्रीमिंग की जा सकती है।
  • लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • न्यायालय सभी लाइव स्ट्रीम कार्यवाही के अभिलेखागार को भी संचित करेगा।
  • कार्यवाही और उसके स्ट्रीमिंग के बीच दो मिनट का अंतराल होना चाहिये।
  • यह स्क्रीनिंग के समय किसी संवेदनशील जानकारी या अन्य विनिमय की अनुमति देगा, जिसकी स्ट्रीमिंग नहीं की जानी चाहिये।
  • कार्यवाही की स्ट्रीमिंग करने से पहले कार्यवाही से संबंधित सभी पक्षों की पूर्व सहमति होनी चाहिये। यदि दोनों पक्षों के बीच एकमत नहीं बन पा रहा है, तो अदालत यह तय कर सकती है कि कार्यवाही का प्रसारण किया जाए या नहीं।
  • पीठासीन न्यायाधीश के पास किसी विशेष मामले में कार्यवाही को निलंबित करने या रोकने का अंतिम अधिकार होगा, अगर वह ऐसा मानते हैं कि प्रसारण न्याय के हित को प्रभावित करेगा।
  • उच्चतम न्यायालय के पास न्यायालय में दर्ज और प्रसारित सभी सामग्रियों पर विशेष कॉपीराइट होगा।

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न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग


सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव लड़ने वाले आरोपित उम्मीदवारों हेतु दिशा-निर्देश जारी किये

  • सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव लड़ने वाले ऐसे उम्मीदवारों को कुछ निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा है जिनके खिलाफ न्यायालय में आपराधिक मामले लंबित हैं। ये दिशा-निर्देश हैं :
  • चुनाव लड़ने वाला प्रत्येक उम्मीदवार भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दिये गए फॉर्म को भरेगा।
  • फॉर्म में आवश्यक रूप से सभी विवरण शामिल होने चाहिये।
  • इसके अलावा, प्रपत्र में मोटे अक्षरों में उम्मीदवार के खिलाफ लंबित आपराधिक मामले दर्ज होने चाहिये। यदि कोई उम्मीदवार किसी विशेष पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहा है, तो उसे अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के बारे में पार्टी को सूचित करना आवश्यक है।
  • संबंधित राजनीतिक दल को अपनी वेबसाइट पर अपने उम्मीदवारों के अपराध से संबंधित पूर्व की सभी प्रकार की जानकारी प्रदर्शित करनी होगी। उम्मीदवार के साथ-साथ संबंधित राजनीतिक दल को उम्मीदवार के पूर्व के आपराधिक कृत्यों के बारे में इलाके में व्यापक पहुँच वाले समाचार-पत्र द्वारा घोषणा जारी कराई जानी चाहिये।
  • उम्मीदवार द्वारा अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद ऐसी घोषणा कम-से-कम तीन बार की जानी चाहिये। न्यायालय ने कहा कि संसद को यह सुनिश्चित करने के लिये एक कानून बनाने पर विचार करना चाहिये कि गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना करने वाले व्यक्ति चुनाव न लड़ें।

सर्वोच्च न्यायालय ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी


सर्वोच्च न्यायालय की पाँच जजों वाली संविधान पीठ ने एक प्रथा की संवैधानिकता को चुनौती देने वाले एक मामले की सुनवाई की, जिसके तहत केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल के बीच की उम्र की महिलाओं को भगवान अयप्पा के मंदिर में प्रवेश से वंचित कर दिया गया था।

  • न्यायालय ने इस प्रथा को 4:1 के बहुमत से असंवैधानिक ठहराया।
  • प्रथा को इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 15 (लैंगिक आधार पर भेदभाव का निषेध), 17 (अस्पृश्यता का उन्मूलन), 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण) और 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है।

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हर उम्र की महिलाओं के लिये खुले सबरीमाला मंदिर के दरवाज़े


मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के फैसले को रद्द करने संबंधी अध्यादेश (Ordinance to supersede the Medical Council of India promulgated)


भारतीय चिकित्सा परिषद (संशोधन) अध्यादेश, 2018 भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1956 में संशोधन करता है। यह अधिनियम मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (Medical Council of India-MCI) की स्थापना करता है जो चिकित्सा शिक्षा और अभ्यास को नियंत्रित करती है।


प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana)

  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 23 सितबंर, 2018 को रांची, झारखंड में विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की शुरुआत की। इस योजना का उद्देश्य देश भर में 10.74 करोड़ से अधिक गरीब और कमज़ोर परिवारों (लगभग 50 करोड़ लाभार्थियों) को इसमें शामिल करना है।
  • इस योजना के तहत केंद्र प्रायोजित योजनाओं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना और वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजना को शामिल किया जाएगा।

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कंपनियों (विवरण एवं प्रतिभूतियों के आवंटन) के तीसरे संशोधन नियम, 2018


कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत कंपनियों (विवरण एवं प्रतिभूतियों के आवंटन) के तीसरे संशोधन नियम, 2018 को अधिसूचित किया। इस संशोधन नियम के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है कि गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनियों द्वारा भविष्य में किये जाने वाले सभी शेयरों का हस्तांतरण केवल अभौतिक रूप में ही किया जा सकता है। ये संशोधन 2 अक्तूबर, 2018 से प्रभावी हो जाएंगे।

इससे निम्नलिखित लाभ प्राप्त होंगे:

I. वास्तविक (भौतिक) सर्टिफिकेट की हानि, चोरी, धोखाधड़ी, और उत्परिवर्तन से जुड़े जोखिमों को समाप्त करना।
II. कॉर्पोरेट प्रशासन में सुधार करके पारदर्शिता को बढ़ाना और नामित की हिस्सेदारी को रोकना, तथा शेयरों को पुनः जारी करना।
III. स्थानांतरण पर स्टांप शुल्क के भुगतान से छूट प्रदान करना।
IV. प्रतिभूतियों के हस्तांतरण या प्रतिबद्धता को आसान बनाना।

  • गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनियों को डिपॉज़िजिटरी और शेयर हस्तांतरण एजेंटों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए अपनी प्रतिभूतियों को अभौतिकीकरण की सुविधा प्रदान करनी चाहिये। प्रतिभूतियों के विमुद्रीकरण से उत्पन्न किसी भी शिकायत को निवेशक शिक्षा और सुरक्षा निधि प्राधिकरण द्वारा नियंत्रित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री जन धन योजना (Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana)


केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगस्त 2018-19 की पूर्व निर्धारित समय सीमा के बाद भी प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) को जारी रखने हेतु मंज़ूरी दी है। इस योजना को ‘प्रत्येक घर’ से ‘प्रत्येक वयस्क’ तक विस्तारित किया गया है। जन धन खातों के लिये ओवरड्राफ्ट की मौजूदा सीमा को 5,000 रुपए से बढ़ाकर 10,000 रुपए कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, ओवरड्राफ्ट सुविधा का लाभ उठाने वाले खाताधारकों की आयु सीमा को 18-60 वर्ष से बढ़ाकर 18-65 वर्ष कर दिया गया है। इसके अलावा, रुपे (RuPay) कार्ड धारकों के लिये आकस्मिक बीमा कवर को भी एक लाख रुपए से बढ़ाकर दो लाख रुपए कर दिया गया है।


मौजूदा हाइड्रोकार्बन भंडार में सुधार हेतु नीतिगत ढाँचे को मंज़ूरी


केंद्रीय मंत्रिमंडल ने परिष्कृत, उन्नत और अपरंपरागत हाइड्रोकार्बन (Unconventional Hydrocarbon-UHC) उत्पादन की प्रक्रिया को बढ़ावा एवं प्रोत्साहन देने के लिये एक नीतिगत ढाँचे को मंज़ूरी दी। हाइड्रोकार्बन की परिष्कृत प्राप्ति (Enhanced Recovery-ER) के तरीकों में तेल के साथ-साथ परिष्कृत गैस प्राप्ति की विधियों को भी शामिल किया गया है।

  • IR (Improved Recovery-IR) विधियों तथा ER विधियों के संयोजन में नई ड्रिलिंग प्रौद्योगिकियों और भंडार के प्रबंधन एवं नियंत्रण के लिये उन्नत तकनीकों को शामिल किया गया हैं। UHC के उत्पादन की प्रक्रिया में शेल, तेल और गैस, गैस हाइड्रेट्स एवं भारी तेल के उत्पादन के तरीके शामिल होते हैं।
  • इस नीति का उद्देश्य मौजूदा हाइड्रोकार्बन भंडार से तेल और गैस की उत्पादन दर में वृद्धि कर इनके घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।
  • इस नीतिगत ढाँचे में निम्नलिखित को शामिल किया गया हैं:

(i) अपनी ER क्षमता के लिये हर क्षेत्र का प्रणालीगत मूल्यांकन।
(ii) उपयुक्त ER तकनीकों का मूल्यांकन।
(iii) इसे आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिये अतिरिक्त राजकोषीय प्रोत्साहन।

  • ER परियोजना के व्यावसायिक कार्यान्वयन से पहले नामित संस्थानों द्वारा संबंधित क्षेत्रों की अनिवार्य जाँच की जाएगी और एक पायलट परियोजना का संचालन किया जाएगा। ऐसे संस्थानों को केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाएगा।
    नीति की निगरानी और कार्यान्वयन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के प्रतिनिधियों, हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय, उच्च स्तरीय विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की समिति द्वारा किया जाएगा।
  • यह तेल कंपनियों को आवंटित सभी ब्लॉकों (एक अनुबंध के आधार पर), साथ ही राष्ट्रीय तेल कंपनियों अर्थात् ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड और ऑयल इंडिया लिमिटेड को नामांकन के आधार पर आवंटित ब्लॉकों पर भी लागू होगा।
  • यह नीति अधिसूचना की तारीख से 10 वर्ष की अवधि तक प्रभावी होगी।
  • हालाँकि, ER और UHC विधियों का उपयोग कर उत्पादन शुरू करने की तारीख से 10 साल की अवधि तक राजकोषीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। IR परियोजनाओं के मामले में राजकोषीय प्रोत्साहन, निर्धारित बेंचमार्क प्राप्ति की तारीख से उपलब्ध कराया जाएगा।

विद्युत अधिनियम, 2003 में संशोधनों का प्रारूप जारी


विद्युत मंत्रालय ने विद्युत अधिनियम, 2003 में संशोधनों का प्रारूप जारी किया है। प्रस्तावित संशोधनों में विद्युत वितरण व्यवसाय को दो खंडों- आपूर्ति और वितरण, में विभाजित करने की बात कही गई है।

प्रस्तावित संशोधनों की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं:

वितरण और आपूर्ति का अलगाव:

  • अधिनियम के तहत एक लाइसेंसधारी वितरणकर्त्ता ही विद्युत की आपूर्ति करता है और आपूर्ति के क्षेत्र में वितरण नेटवर्क को बनाए रखता है।
  • प्रस्तावित संशोधनों में विद्युत वितरण प्रणाली (वितरण लाइसेंस) को बनाए रखने और इसकी आपूर्ति (आपूर्ति लाइसेंस) के लिये अलग लाइसेंस प्रदान करने की बात कही गई है।
  • इसके अलावा, वितरण और आपूर्ति के एक क्षेत्र के लिये कई वितरण और आपूर्ति लाइसेंस प्रदान किये जा सकते हैं।

अक्षय ऊर्जा:

  • यह अधिनियम ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों को परिभाषित नहीं करता है। प्रस्तावित संशोधनों में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को परिभाषित किया गया है जिसमें जल, पवन, सौर, जैव-मात्रा, जैव-ईंधन, नगरपालिका अपशिष्ट और ठोस अपशिष्ट शामिल हैं।
  • ये संशोधन एक राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा नीति की भी व्यवस्था करते हैं।
  • ये संशोधन नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त होने वाली विद्युत के न्यूनतम प्रतिशत के रूप में नवीकरणीय खरीद की बाध्यता को परिभाषित करते हैं, जिनकी खरीद अनिवार्य संस्थाओं (जैसे आपूर्ति लाइसेंसधारी) द्वारा होनी चाहिये।
  • नवीकरणीय सृजन दायित्व को नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के रूप में परिभाषित किया गया है जिसकी खरीद कोयला या लिग्नाइट आधारित स्टेशनों द्वारा होनी चाहिये।

विद्युत् सब्सिडी:

  • यदि कोई राज्य सरकार या अन्य एजेंसी किसी उपभोक्ता को सब्सिडी प्रदान करना चाहती है, तो वह प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से ऐसा करेगी।

स्मार्ट ग्रिड और मीटरिंग:

  • इन संशोधनों में एक स्मार्ट ग्रिड को एक विद्युत नेटवर्क के रूप में परिभाषित किया गया है जो सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का उपयोग सूचना को एकत्रित करने तथा एक स्वचालित तरीके से कार्य करने के लिये करता है।
  • इसका उद्देश्य विद्युत की दक्षता, विश्वसनीयता, ट्रांसमिशन और वितरण की स्थिति में सुधार लाना है।
  • ध्यान देने वाली बात यह है कि विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2014 जो इस अधिनियम में संशोधन का प्रावधान करता है, वर्तमान में लोकसभा में लंबित है। इसके अंतर्गत उपरोक्त संशोधनों में से बहुत से प्रावधानों को शामिल किया गया है।

इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान का मसौदा जारी (Draft India Cooling Action Plan)

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान (India Cooling Action Plan-ICAP) का मसौदा जारी किया। ICAP सभी संबंधित क्षेत्रों में शीतलन आवश्यकताओं को सुनिश्चित करने और 20 साल की अवधि (2017-18 से 2037-38) के लिये सभी को स्थायी शीतलन तक पहुँच प्रदान करने के लिये सिफारिशें प्रदान करता है। ICAP के उल्लिखित मुख्य लक्ष्यों में शामिल हैं:

  • शीतलन और संबंधित क्षेत्रों में तकनीकी समाधानों का विकास करना।
  • 2037-38 तक 20%-25% क्षेत्रों में शीतलन की मांग को कम करना।
  • 2037-38 तक शीतलन मांग में 25%-30% की कमी करना।
  • 2037-38 तक शीतलन ऊर्जा आवश्यकताओं को 25%-40% तक कम करना।
  • 2022-23 तक 1,00,000 सर्विसिंग सेक्टर तकनीशियनों को प्रशिक्षित और प्रमाणित करना।
  • ICAP ने इन उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु हस्तक्षेप करते हुए ऐसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं:

भवन ऊर्जा दक्षता: इसे निम्नलिखित के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा:

I. भवन निर्माण क्षेत्र के शीतलन भार को कम करने के लिये भवन ऊर्जा कोड के तेज़ी से कार्यान्वयन के माध्यम से।
II. अनुकूली थर्मल आराम मानकों के माध्यम से।
III. कमरे के एयर-कंडीशनर और प्रशंसकों की ऊर्जा दक्षता में वृद्धि।
IV. शीतलन उत्पादों के इको-लेबलिंग के माध्यम से उपभोक्ता जागरूकता में वृद्धि करके।

कोल्ड चेन और रेफ्रिजरेशन: इस क्षेत्र के अनुशंसित कदमों में शामिल हैं:

I. शीतलन और ऊर्जा की खपत को कम करने के लिये मौजूदा कोल्ड स्टोरेज की रेट्रोफिटिंग (Retrofitting) के लिये विकासशील कार्यक्रम और 
II. छोटे, मध्यम और बड़े सभी डिज़ाइन, निर्माण और संबंधित विनिर्देशों को मानकीकृत करना।


2019-20 तक वन्यजीव आवास योजना के एकीकृत विकास को जारी रखने की मंज़ूरी


आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 2019-20 तक 1,732 करोड़ रुपए के व्यय के साथ वन्यजीव पर्यावास योजना (Wildlife Habitats Scheme) के एकीकृत विकास को जारी रखने की मंज़ूरी प्रदान की। इस योजना का उद्देश्य देश में वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देना है। इस योजना के तीन घटक हैं:

I. 1,143 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ प्रोजेक्ट टाइगर का क्रियान्वयन।
II. 497 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ वन्यजीव आवासों का विकास।
III. 92 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ हाथी परियोजना का क्रियान्वयन।


राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति- 2018 (National Digital Communications Policy, 2018)


प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति- 2018 (National Digital Communications Policy-2018 or NDCP-2018) को मंज़ूरी देने के साथ ही दूरसंचार आयोग का नाम बदलकर ‘डिजिटल संचार आयोग’ करने के लिये भी स्वीकृति दे दी है। राष्ट्रीय संचार नीति-2018 का उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त अर्थव्यवस्था और समाज के रूप में स्थापित करना है।

  • यह कार्य सर्वव्यापी, लचीला और किफायती डिजिटल संचार अवसंरचना तथा सेवाओं की स्थापना कर नागरिकों तथा उद्यमों की सूचना और संचार आवश्यकताओं को पूरा करके किया जाएगा।
  • उपभोक्ता केंद्रित और एप्लीकेशन प्रेरित राष्ट्रीय संचार नीति- 2018 हमें 5G, IOT, M2M जैसी अग्रणी टेक्नोलॉजी लॉन्च होने के बाद नए विचारों तथा नवाचार की ओर ले जाएगी।

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राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति- 2018 को मंत्रिमंडल की मंज़ूरी

राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति-2018


पीएम-आशा योजना (PM-AASHA scheme)


सरकार की किसान अनुकूल पहलों को बढ़ावा देने के साथ-साथ अन्नदाता के प्रति अपनी जवाबदेही को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक नई समग्र योजना ‘प्रधानमंत्री अन्न्दाता आय संरक्षण अभियान’ (Pradhan Mantri Annadata Aay SanraksHan Abhiyan- PM-AASHA) को मंज़ूरी दे दी है। यह किसानों की आय के संरक्षण की दिशा में भारत सरकार द्वारा उठाया गया एक असाधारण कदम है जिससे किसानों के कल्याण हेतु किये जाने वाले कार्यों में अत्यधिक सफलता मिलने की आशा है।

पीएम- आशा के प्रमुख घटक

नई समग्र योजना में किसानों के लिये उचित मूल्य सुनिश्चित करने की व्यवस्था शामिल है और इसके अंतर्गत आने वाले प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं

  • मूल्य समर्थन योजना (Price Support Scheme-PSS)
  • मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (Price Deficiency Payment Scheme- PDPS)
  • निजी खरीद एवं स्टॉकिस्ट योजना (Private Procurement & Stockist Scheme- PPSS)

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जून 2020 तक बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना को जारी रखने की मंज़ूरी


आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (Dam Rehabilitation and Improvement Project) की निरंतरता के लिये संशोधित लागत अनुमान के तहत 3,466 करोड़ रुपए की मंज़ूरी दी गई। इस परियोजना को जुलाई 2018 से जून 2020 तक विस्तारित किया गया है।

  • 3,466 करोड़ रुपए में से 2,628 करोड़ रुपए विश्व बैंक द्वारा, 747 करोड़ रुपए राज्य सरकारों द्वारा तथा 91 करोड़ रुपए केंद्रीय जल आयोग द्वारा प्रदान किये जाएंगे, इस परियोजना से सात राज्यों में 198 बांधों की सुरक्षा और संचालन में सुधार किया जाएगा।
  • इसके माध्यम से परियोजना का उद्देश्य निचले स्तर की आबादी और उनकी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये जोखिमों को कम करना है।
  • यह परियोजना संस्थागत सुदृढ़ीकरण पर भी ध्यान केंद्रित करेगी, जिसमें बांध सुरक्षा संगठनों की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिये अधिकारियों का क्षमता निर्माण भी शामिल है।

केंद्र सरकार ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष में योगदान में वृद्धि की


1 अप्रैल, 2018 से भारत सरकार ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response Fund) में अपना योगदान 75% से बढ़ाकर 90% करने का निर्णय लिया है।

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम (Disaster Management Act), 2005 के तहत, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (National Disaster Response Fund) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response Funds) किसी भी अधिसूचित आपदा के दौरान बचाव एवं राहत व्यय को पूरा करने के लिये की गई है।
  • अब तक केंद्र सरकार, सामान्य श्रेणी के राज्यों के लिये 75% और पहाड़ी क्षेत्रों के विशेष श्रेणी के राज्यों के लिये 90% योगदान दे रही है।

अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना’

कर्मचारी राज्य बीमा निगम (Employees’ State Insurance Corporation-ESIC) ने ‘अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना’ को मंज़ूरी दी है। यह योजना कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के तहत बीमाकृत व्यक्तियों को कवर करेगी। यह अधिनियम 10 से अधिक श्रमिकों (21,000 रुपए की मासिक वेतन सीमा के साथ) वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होता है।

भारत-चीन संबंध पर रिपोर्ट


विदेश मामलों की स्थायी समिति (अध्यक्ष: डॉ शशि थरूर) ने 4 सितंबर, 2018 को "डोकलाम, सीमा स्थिति और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में सहयोग सहित चीन-भारत संबंधों" (Sino-India Relations including Doklam, border situation, and cooperation in international organizations) पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

  • समिति ने विशेष रूप से इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकार को भारत और चीन के बीच संबंधों का गहन मूल्यांकन करना चाहिये ताकि चीन से व्यवहार के तरीके पर राष्ट्रीय सर्वसम्मति बन सके।

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