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डेली न्यूज़

  • 31 Dec, 2018
  • 27 min read
जीव विज्ञान और पर्यावरण

UNFCCC में भारत के दूसरे द्विवार्षिक अद्यतन रिपोर्ट को प्रस्तुत करने की मंजूरी

चर्चा में क्यों?


केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन (United Nations Framework Convention on Climate Change-UNFCCC) के दायित्व-निर्वहन के तहत भारत की दूसरी द्विवार्षिक अद्यतन रिपोर्ट (Biennial Update Report-BUR) को UNFCCC के समक्ष प्रस्तुत करने को मंज़ूरी दे दी है।

  • भारत ने जलवायु परिवर्तन पर पहली द्विवार्षिक अद्यतन रिपोर्ट वर्ष 2016 में प्रस्तुत की थी।

दूसरे द्विवार्षिक अद्यतन रिपोर्ट की विशेषताएँ

  • UNFCCC में भारत की दूसरी द्विवार्षिक रिपोर्ट, सम्मेलन में प्रस्तुत पहली द्विवार्षिक रिपोर्ट का अद्यतन रूप है।
  • द्विवार्षिक अद्यतन रिपोर्ट के पाँच प्रमुख घटक हैं-
  1. राष्ट्रीय परिस्थितियां (National Circumstances)
  2. राष्ट्रीय ग्रीन हाउस गैस (National Greenhouse Gas Inventory)
  3. शमन आधारित कार्यकलाप (Mitigation Actions)
  4. वित्त, प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण संबंधी आवश्यकताएं तथा समर्थन प्राप्ति (Technology and Capacity Building Needs and Support Received)
  5. घरेलू निगरानी, रिपोर्ट व जाँच आधारित व्यवस्था [Domestic Monitoring, Reporting and Verification (MRV) arrangements]।
  • द्विवार्षिक अद्यतन रिपोर्ट (BUR) राष्ट्रीय स्तर पर किए गए विभिन्न अध्ययनों के पश्चात तैयार की गई है। BUR की समीक्षा विभिन्न स्तरों पर की गई है, जिसमें शामिल हैं–

♦ विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा
♦ अवर सचिव (जलवायु परिवर्तन) की अध्यक्षता में प्रौद्योगिकी परामर्शदात्री विशेषज्ञ समिति (Technical Advisory Committee of Experts) द्वारा की गई समीक्षा
♦ अपर सचिव (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय) की अध्यक्षता में राष्ट्रीय संचालन समिति (National Steering Committee) द्वारा की गई समीक्षा। राष्ट्रीय संचालन समिति एक अंतर-मंत्रालयी संस्था है।
♦ समीक्षा प्रक्रिया के पश्चात सभी संशोधनों व प्रासंगिक टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए दूसरी द्विवार्षिक अद्यतन रिपोर्ट (BUR) को अंतिम रूप दिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार

  • 2014 के दौरान भारत की सभी गतिविधियों से कुल 26,07,488 गीगाग्राम (CC-2 समतुल्य* लगभग 2.607 बिलियन टन) (land use, land use change and forestry- LULUCF को छोड़कर) ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन हुआ।
  • LULUCF को शामिल करने के पश्चात कुल 23,06,295 गीगा ग्राम (लगभग 2.306 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के समतुल्य) ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन हुआ।
  • कुल उत्सर्जन में ऊर्जा क्षेत्र की हिस्सेदारी 73 प्रतिशत, IPPU की 8 प्रतिशत, कृषि की 16 प्रतिशत और अपशिष्ट क्षेत्र की 3 प्रतिशत रही।
  • वन भूमि, कृषि भूमि और आबादी के कार्बन सिंक ऐक्शन से उत्सर्जन में 12 प्रतिशत की कमी हुई।

वर्ष 2014 के लिए भारत की ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन तालिका

श्रेणी कार्बन डाईऑक्साइड समतुल्य (गीगाग्राम)
ऊर्जा 19,09,765.74
औद्योगिक प्रक्रिया और उत्पाद उपयोग 2,02,277.69
कृषि 4,17,217.69
अपशिष्ट 78,227.15
भूमि का उपयोग, भूमि उपयोग में बदलाव व वनीकरण (LULUCF) ** -3,01,192.69
कुल (LULUCF को छोड़कर) 26,07,488.12
कुल (LULUCF के साथ) 23,06,295.43

** ऋणात्मक उत्सर्जन का अर्थ है सिंक ऐक्शन अर्थात वायुमंडल से प्रतिस्थापित कार्बन की कुल मात्रा।

* एक गीगा ग्राम = 109 ग्राम ; ग्रीन हाउस गैसों को उनकी ग्लोबल वार्मिंग क्षमता का उपयोग करते हुए कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य में परिवर्तित किया जाता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत, संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन (UNFCCC) का सदस्य देश है।
  • धारा 4.1 और धारा 12.1 के तहत सम्मेलन, विकसित और विकासशील देशों समेत सभी सदस्य देशों को सम्मेलन के सुझावों/दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन से संबंधित जानकारी/रिपोर्ट प्रदान करने का आग्रह करता है।
  • UNFCCC के सदस्य देशों ने 16वें सत्र में अनुच्छेद 60 (c) निर्णय-1 के तहत यह निश्चित किया था कि अपनी क्षमता के अनुकूल विकासशील देश भी द्विवार्षिक अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
  • इन रिपोर्टों में राष्ट्रीय ग्रीन हाऊस गैस तालिका के साथ-साथ उत्सर्जन कम करने के प्रयास, आवश्यकताएँ और समर्थन प्राप्ति का भी उल्लेख होगा।
  • अनुच्छेद 41 (F) में वर्णित COP-17 के निर्णय-2 के अनुसार प्रत्येक दो वर्ष में द्विवार्षिक अद्यतन रिपोर्टें जमा की जाएँगी।

UNFCCC

  • यह एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जिसका उद्देश्य वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित करना है।
  • यह समझौता जून, 1992 के पृथ्वी सम्मेलन के दौरान किया गया था। विभिन्न देशों द्वारा इस समझौते पर हस्ताक्षर के बाद 21 मार्च, 1994 को इसे लागू किया गया।
  • वर्ष 1995 से लगातार UNFCCC की वार्षिक बैठकों का आयोजन किया जाता है। इसके तहत ही वर्ष 1997 में बहुचर्चित क्योटो समझौता (Kyoto Protocol) हुआ और विकसित देशों (एनेक्स-1 में शामिल देश) द्वारा ग्रीनहाउस गैसों को नियंत्रित करने के लिये लक्ष्य तय किया गया। क्योटो प्रोटोकॉल के तहत 40 औद्योगिक देशों को अलग सूची एनेक्स-1 में रखा गया है।
  • UNFCCC की वार्षिक बैठक को कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज़ (COP) के नाम से जाना जाता है।

स्रोत : पी.आई.बी


विविध

आर्थिक पूंजी के ढाँचे पर बिमल जालान समिति

चर्चा में क्यों?


भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आरक्षित कोष के उचित आकार के बारे में सुझाव देने के लिये पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।

प्रमुख बिंदु

  • यह समिति इस बारे में सुझाव देगी कि केंद्रीय बैंक के आरक्षित कोष का आकार क्या होना चाहिये, उसे सरकार को कितना लाभांश देना चाहिये।
  • यह विशेषज्ञ समिति रिजर्व बैंक द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले विभिन्न प्रावधानों, आरक्षित कोष और बफर की ज़रूरत और उसके उचित होने के बारे में स्थिति की समीक्षा करेगी। समिति अपनी पहली बैठक के 90 दिनों के अंदर रिपोर्ट दाखिल करेगी|
  • इसके अलावा समिति वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों द्वारा अपनाए जाने वाले सर्वश्रेष्ठ वैश्विक व्यवहार की भी समीक्षा करेगी।
  • समिति एक उचित लाभ वितरण नीति (Profit Distribution Policy) के बारे में भी प्रस्ताव देगी। इसमें रिजर्व बैंक के समक्ष आने वाली सभी स्थितियों पर गौर किया जाएगा। मसलन ज़रूरत से अधिक प्रावधान रखने की स्थिति।  
  • केंद्रीय बैंक ने समिति से यह भी सुझाव देने को कहा है कि रिजर्व बैंक के जोखिम के प्रावधान का उचित स्तर क्या होना चाहिये।

समिति के सदस्य

  1. RBI के पूर्व गवर्नर बिमल जालान (चेयरमैन)
  2. RBI के पूर्व डिप्टी गवर्नर राकेश मोहन (डिप्टी चेयरमैन)
  3. आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग (सदस्य)
  4. RBI के डिप्टी गवर्नर एन.एस. विश्वनाथन (सदस्य)
  5. RBI बोर्ड के सदस्य भारत दोशी (सदस्य)
  6. RBI बोर्ड के सदस्य सुधीर मांकड़ (सदस्य)

पृष्ठभूमि

  • रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल तथा सरकार के बीच केंद्रीय बैंक के पास पड़े अतिरिक्त कोष को लेकर मतभेद थे। सरकार ने RBI से अतिरिक्त पूंजी देने के लिये कहा था|
  • सरकार का कहना है कि घाटे के लक्ष्यों को पूरा करने, कमजोर बैंकों में पूंजी डालने और उधार देने तथा कल्याणकारी कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिये इस पूंजी का इतेमाल किया जाएगा।
  • RBI के भंडार के दो घटक हैं:

♦ 2.5 लाख करोड़ रुपए की आकस्मिकता निधि।
♦ 6.91 लाख करोड़ रुपए की एक करेंसी तथा गोल्ड रिवैल्यूएशन रिजर्व।

  • कोर रिज़र्व आकस्मिकता निधि कुल संपत्ति का लगभग 7% है और इसका बाकी हिस्सा बड़े पैमाने पर पुनर्मूल्यांकन भंडार में है, जिसमें मुद्रा और सोने के मूल्य में संबंधित परिवर्तनों के साथ उतार-चढ़ाव होता है।
  • रिजर्व बैंक के पास पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में ऐसी 9.6 लाख करोड़ रुपए की पूंजी दिखाई गई है।
  • वित्त मंत्रालय का विचार है कि रिजर्व बैंक अपनी कुल संपत्ति के 28 प्रतिशत के बराबर बफर पूंजी रखे हुए है जो वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों द्वारा रखे जाने वाली आरक्षित पूंजी की तुलना में बहुत ऊंचा है। इस बारे में वैश्विक नियम 14 प्रतिशत का है।
  • रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड ने 19 नवंबर की बैठक में इस बारे में सुझाव देने के लिये विशेषज्ञ समिति के गठन का फैसला किया था।

स्रोत : द हिंदू


जीव विज्ञान और पर्यावरण

जैव-विविधता सम्मेलन (सीबीडी) पर भारत की छठी रिपोर्ट

चर्चा में क्यों?


29 दिसंबर 2018 को भारत ने जैव विविधता सम्मेलन (सीबीडी) की छठी राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की। यह रिपोर्ट राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा आयोजित राज्य जैव विविधता बोर्डों की 13वीं राष्ट्रीय बैठक के द्वारा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत की गयी।

संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने ‘‘भारत की राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों पर प्रगति: एक पूर्वावलोकन” दस्तावेज भी जारी किया।
  • इस बैठक में बताया गया कि भारत विश्व के पहले पांच देशों में; एशिया में पहला तथा जैव विविधता समृद्ध मेगाडायवर्स देशों में भी पहला देश है, जिसने सीबीडी सचिवालय को छठी राष्ट्रीय रिपोर्ट सौंपी है।
  • इस बात पर चर्चा हुई कि एक तरफ जहाँ विश्व भर में जैव विविधता पर आवास विखंडन एवं विनाश, आक्रामक विदेशी प्रजातियों, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और संसाधनों के अति उपयोग के कारण दबाव बढ़ रहा है, वहीं भारत उन कुछ देशों में शामिल है जहाँ वन आच्छादन बढ़ रहा है और जंगलों में वन्य जीवन भी बहुतायत संख्या में हैं।
  • भारत राष्ट्रीय स्तर पर जैव विविधता लक्ष्यों को अर्जित करने की राह पर अग्रसर है और यह वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है।
  • गौरतलब है कि सीबीडी सहित अंतर्राष्ट्रीय संधियों के पक्षकार देशों द्वारा राष्ट्रीय रिपोर्टों की प्रस्तुति अनिवार्य होती है।
  • एक ज़िम्मेदार देश के रूप में भारत ने कभी भी अपनी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को नहीं छोड़ा है।
  • भारत अब तक नियत समय पर सीबीडी को पांच राष्ट्रीय रिपोर्ट सौंप चुका है।
  • छठीं राष्ट्रीय रिपोर्ट को वैश्विक एआईसीएचई (AICHI) जैव विविधता लक्ष्यों के अनुरूप संधि प्रक्रिया के तहत विकसित किया गया हैं। यह 12 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों को अर्जित करने की दिशा में हुई प्रगति की ताजा जानकारी उपलब्ध कराता है।

रिपोर्ट की मुख्य बातें-

  • 15वें भारत वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) 2017 के मुताबिक भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहाँ वन क्षेत्र में वृद्धि दर्ज की गयी है।
  • भारत ने दो राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य (NBT) प्राप्त कर लिये और आठ अन्य NBT प्राप्त करने की राह पर हैं साथ ही शेष दो NBT को भी भारत 2020 के निर्धारित समय तक पूरा करने का प्रयास कर रहा है।

♦ भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 20% से अधिक भाग जैव विविधता संरक्षण के अंतर्गत आता है। भारत आइची लक्ष्य 11 के 17% स्थलीय अवयव को प्राप्त कर चुका है।
♦ भारत ने 2015 में पहले Internationally recognized certificate of Compliance (IRCC) का प्रकाशन किया था। तब से IRCC के 75% भाग का प्रकाशन हो चुका है। इस प्रकार पहुँच व लाभ की हिस्सेदारी (ABS) पर नगोया प्रोटोकॉल के लक्ष्य को भारत प्राप्त कर रहा है।

  • शेरों की संख्या 2015 में 520 से ऊपर पहुँच चुकी है तथा हाथियों की संख्या 2015 में 30,000 से ऊपर चली गयी है।
  • एक सींग वाला भारतीय गैंडा जो 20 वीं शताब्दी के शुरूआत में विलुप्ति के कागार पर था, अब इसकी संख्या 2400 हो गयी है।
  • पूरे विश्व में कुल दर्ज किये गए प्रजातियों की 0.3% से ऊपर की जनसंख्या क्रांतिक रूप से संकटापन्ना की श्रेणी में आ चुकी है जबकि भारत में ऐसी सिर्फ 0.08% प्रजातियाँ दर्ज की गयी है।
  • कृषि, मत्स्यन, वानिकी आदि के लिये संपोषणीय प्रबंधन अपनाया गया है ताकि प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट किये बिना सभी को भोजन एवं पोषण संबंधी सुरक्षा प्राप्त हो सके।

जैव विविधता क्या है?

  • जैव विविधता का अर्थ पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों की विविधता से है। अर्थात् किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवों एवं वनस्पतियों की संख्या एवं प्रकारों को जैवविविधता माना जाता है।
  • 1992 में रियो डि जेनेरियाें में आयोजित पृथ्वी सम्मेलन में जैव विविधता की मानक परिभाषा के अनुसार-

जैव विविधता समस्त स्रोतों यथा-अन्तर्क्षेत्रीय, स्थलीय, सागरीय एवं अन्य जलीय पारिस्थितिक तंत्रों के जीवों के मध्य अंतर और साथ ही उन सभी पारिस्थितिक समूह जिनके ये भाग है, में पायी जाने वाली विविधताएँ हैं। इसमें एक प्रजाति के अंदर पायी जाने वाली विविधता, विभिन्न जातियों के मध्य विविधता तथा परिस्थितिकीय विविधता सम्मिलित है।

जैव विविधता अभिसमय (सीबीडी)

  • यह अभिसमय वर्ष 1992 में रियो डि जेनेरियो में आयोजित पृथ्वी सम्मेलन के दौरान अंगीकृत प्रमुख समझौतों में से एक है।
  • सीबीडी पहला व्यापक वैश्विक समझौता है जिसमें जैवविविधता से संबंधित सभी पहलुओं को शामिल किया गया है।
  • इसमें आर्थिक विकास की ओर अग्रसर होते हुए विश्व के परिस्थितिकीय आधारों को बनाएँ रखने हेतु प्रतिबद्धताएँ निर्धारित की गयी है।
  • सीबीडी में पक्षकार के रूप में विश्व के 196 देश शामिल हैं जिनमें 168 देशों ने हस्ताक्षर किये हैं।
  • भारत सीबीडी का एक पक्षकार (party) है।
  • इस कन्वेंशन में राष्ट्रों के जैविक संसाधनों पर उनके संप्रभु अधिकारों की पुष्टि किये जाने के साथ तीन लक्ष्य निर्धारित किये गए है-

♦ जैव विविधता का संरक्षण
♦ जैव विविधता घटकों का सतत उपयोग
♦ आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त होने वाले लाभों में उचित और समान भागीदारी

  • जैव विविधता कन्वेंशन के तत्वाधान में कार्टाजेना जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल को 29 जनवरी, 2000 को अंगीकार किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य आधुनिक प्रौद्योगिकी के परिणामस्वरूप ऐसे सजीव परिवर्तित जीवों (LMO) का सुरक्षित अंतरण, प्रहस्तरण और उपयोग सुनिश्चित करना है जिसका मानव स्वास्थ्य को देखते हुए जैव विविधता के संरक्षण एवं सतत् उपयोग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
  • 2010 में नगोया, जापाना के आइची प्रांत में आयोजित सीबीडी के 10 वें सम्मेलन में जैवविविधता के अद्यतन रणनीतिक योजना जिसे आईची लक्ष्य नाम दिया गया, को स्वीकार किया गया।
  • उसके एक भाग के रूप में लघु-अवधि रणनीतिक योजना-2020 के तहत 2011-2020 के लिये जैवविविधता पर एक व्यापक रूपरेखा तैयार की गयी। इसके अंतर्गत सभी पक्षकारों के लिये जैव विविधता के लिये कार्य करने हेतु एक 10 वर्षीय ढाँचा उपलब्ध कराया गया है।
  • यह लघुवधि योजना 20 महत्त्वाकांक्षी लक्ष्यों, जिसे सम्मिलित रूप से आइची लक्ष्य (Aichi Targets) कहते है, का एक समूह है।
  • भारत ने 20 वैश्विक Aichi जैव विविधता लक्ष्यों के अनुरूप 12 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य (NBT) विकसित किये है।

स्रोत: PIB, The Hindu


प्रारंभिक परीक्षा

प्रीलिम्स फैक्ट्स : 31 दिसंबर, 2018

‘एक ज़िला, एक उत्पाद’ क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन


प्रधानमंत्री ने वाराणसी में ‘एक ज़िला, एक उत्पाद’ (One District One Product) क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन को संबोधित किया।

One District One Product

  • राज्य के छोटे शहरों और छोटे ज़िलों के स्थानीय लोगों का कौशल बढ़ाना और देशी व्यापारों, हस्तकलाओं और उत्पादों की पहुँच बढ़ाना ‘एक ज़िला, एक उत्पाद’ योजना का लक्ष्य है। 
  • इनमें हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, अभियंत्रण सामग्री, दरी, सिले-सिलाए कपड़े, चमड़े के सामान आदि शामिल हैं। इनसे विदेशी मुद्रा अर्जित होने के साथ-साथ लोगों को रोज़गार के अवसर भी मिलते हैं।
  • इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय बीज शोध और प्रशिक्षण केंद्र में अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (International Rice Research Institute-IRRI) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र के परिसर को राष्ट्र को समर्पित किया।
  • यह दक्षिण एशिया और सार्क क्षेत्र में चावल शोध और प्रशिक्षण के प्रमुख केंद्र के रूप में काम करेगा। भारत 1960 से अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) से जुड़ा है।
  • भारत के पूर्वी हिस्से में स्थापित सबसे पहले अंतर्राष्ट्रीय केंद्र से इस क्षेत्र में चावल का उत्पादन बढ़ाने और उसे टिकाऊ बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
  • प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक ज़िला, एक उत्‍पाद’ योजना को ‘मेक इन इंडिया’ का एक विस्‍तार बताया।
  • इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने दूर संचार विभाग के पेंशनधारकों के लिये ‘‘संपन्‍न’’ ‘द सिस्‍टम फॉर अथॉरिटी एंड मैनेजमेंट ऑफ पेंशन योजना’ (The system for authority and management of pension scheme) की शुरुआत की।
  • यह योजना दूर संचार विभाग के पेंशनधारकों के लिये काफी मददगार होगी और पेंशन के समयबद्ध संवितरण में मदद करेगी।
  • केंद्र सरकार जीवन की सरलता को बेहतर बनाने तथा लोकोन्‍मुखी सेवा से संबंधित सुविधाओं को और अधिक आसान बनाने के लिये प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रही है।
  • डाक घरों के जरिए बैंकिंग सेवाओं को विस्‍तारित करने के लिये इंडिया पोस्‍ट पेमेंट्स बैंक का उपयोग किया जा रहा है।
  • तीन लाख से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर के एक नेटवर्क द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को डिजिटल तरीके से कई प्रकार की सेवाएँ उपलब्‍ध कराने में मदद की जा रही है। 
  • लोगों को सुविधाएँ प्रदान करने के अतिरिक्‍त डिजिटल इंडिया सरकारी कामकाज में पारदर्शिता ला रहा है और भ्रष्‍टाचार पर अंकुश लगा रहा है। 
  • ई-मार्केट प्लेस एमएसएमई के लिये कारगर साबित हो रहा है।

तिरंगा फहराने की 75वीं वर्षगाँठ


नेताजी सुभाष चन्‍द्र बोस द्वारा भारतीय भूमि पर तिरंगा फहराने के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने एक स्‍मारक डाक टिकट, सिक्‍का एवं ‘फर्स्‍ट डे कवर’ जारी किया।

Tricolor Hoist

  • इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने अंडमान और निकोबार के तीन द्वीपों के नाम बदलने की घोषणा की।
  • रॉस द्वीप का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप, नील द्वीप को शहीद द्वीप और हैवलॉक द्वीप को स्वराज द्वीप के नाम से जाना जाएगा।
  • इस मौके पर प्रधानमंत्री ने एक स्मारक डाक टिकट, 'फर्स्ट डे कवर' और 75 रुपए का सिक्का भी जारी किया। 35 ग्राम के इस सिक्के में 50 प्रतिशत चांदी, 40 प्रतिशत तांबा तथा 5-5 प्रतिशत निकल और जस्ता होंगे।
  • इस सिक्के में 'नेताजी सुभाषचंद्र बोस' की तस्वीर, सेलुलर जेल की पृष्ठभूमि में ध्वज को सलाम करते हुए दिखेगी। चित्र के नीचे ‘वर्षगांठ' के साथ 75 का अंक छपा होगा।
  • सिक्के पर देवनागरी लिपि और अंग्रेज़ी भाषा में 'पहला तिरंगा फहराने का दिन' छपा होगा।
  • प्रधानमंत्री ने ऊर्जा, कनेक्टिविटी एवं स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्रों से संबंधित विकास परियोजनाओं की एक श्रृंखला का भी अनावरण किया।
  • उल्लेखनीय है कि 30 दिसंबर, 1943 को सुभाष चंद्र बोस ने पहली बार सेलुलर जेल, पोर्ट ब्लेयर में तिरंगा फहराया था।
  • आजाद हिंद फ़ौज की स्थापना 21 अक्टूबर, 1943 को की गई थी।
  • गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने 21 अक्तूबर, 2018 को लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया था और सुभाष चंद्र बोस द्वारा बनाई गई आज़ाद हिंद फौज की 75वीं वर्षगाँठ के मौके पर एक पट्टिका का अनावरण किया था।
  • प्रधानमंत्री ने बोस के नाम पर एक मानद विश्वविद्यालय की स्थापना की भी घोषणा की।

स्रोत : पी.आई.बी.


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