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डेली न्यूज़

  • 21 Dec, 2018
  • 25 min read
विविध

यमन पर नया शांति समझौता

चर्चा में क्यों?


हाल ही में यमन के हुती विद्रोहियों (Houthi rebels) और राष्ट्रपति अब्द्राबुह मंसूर हादी (Mansur Hadi) के प्रति वफादार सैन्य बलों के बीच होदेदा बंदरगाह शहर (port city of Hodeida) में युद्धविराम पर समझौता हो गया है। गौरतलब है कि स्टॉकहोम (Stockholm) में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मध्यस्थ वार्ता (mediated talks) में यह समझौता हुआ।

हालिया परिस्थिति

  • वार्ता के समय, शहर लगभग पूरी तरह सऊदी नेतृत्त्व वाले गठबंधन के हाथों में था।
  • गठबंधन ने यमन में मानवीय सहायता को रोकने के लिये कई महीनों से बंदरगाह को अवरुद्ध किया हुआ था और ज़्यादातर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के सैनिक लड़ाके ही विद्रोहियों से जूझ रहे थे।
  • इस्तांबुल में वाणिज्य दूतावास के अंदर पत्रकार जमाल खशोगी (Jamal Khashoggi) की हत्या के बाद सऊदी अरब को वैश्विक दबाव में आकर यमन में युद्धविराम करना पड़ा।

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  • खशोगी मामले के बाद यमन और इसकी खराब मानवीय स्थिति पर पूरी दुनिया की निगाह इतनी मज़बूत रही है कि संयुक्त अरब का समर्थन करने वाले अमेरिका ने भी गठबंधन ताकतों में अपनी भागीदारी कम करनी शुरू कर दी।
  • संयुक्त राष्ट्र के दबाव के बाद, सऊदी अरब समर्थित यमन सरकार ने भी वार्ता के लिये हरी झंडी दे दी।

यमन में मानवीय हालात?

  • WHO (World Health Organisation) के अनुसार, 2015 में सऊदी हस्तक्षेप के बाद से यमन में कम से कम 10,000 लोग मारे गए हैं।
  • गठबंधन ताकतों द्वारा किये गए हवाई हमले ने बुनियादी अवसंरचना को तबाह कर दिया, खाद्य पदार्थों और दवाइयों की आपूर्ति में कमी ला दी, जिससे यमन को व्यापक नुकसान झेलना पड़ा है।
  • अगर यमन को सहायता नहीं पहुँचाई गई तो लगभग 12 मिलियन लोग भुखमरी के शिकार हो सकते हैं। इस समय पूरा देश कोलेरा (cholera) के प्रकोप से भी प्रभावित है। यूनिसेफ (United Nations International Children's Emergency Fund-UNICEF) द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार, यमन में हर 10 मिनट में एक बच्चे की मृत्यु हो जाती है।

यमन में सऊदी अरब का हस्तक्षेप क्यों?

  • जब शिया हुती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सना (Sana’a) पर कब्जा कर लिया और राष्ट्रपति हादी की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को दक्षिणी हिस्से में सिमटना पड़ा, तब सऊदी अरब ने यमन में हस्तक्षेप करना शुरू किया।
  • सऊदी अरब ने ईरान पर अरब प्रायद्वीप में अस्थिरता लाने और शिया हुती विद्रोहियों को आर्थिक सहायता देने का आरोप लगाया था। वस्तुतः इस प्रायद्वीप में स्थिरता स्थापित करना सऊदी अरब की योजना थी।
  • किंतु सऊदी अरब के चार वर्षों के अथक प्रयासों के बावजूद हुती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा जमाने के साथ-साथ उत्तरी यमन के ज़्यादातर हिस्सों पर नियंत्रण कायम किया हुआ है। यही बात सऊदी अरब के लिये परेशानी का सबब बनी हुई है।

क्या युद्ध विराम टिकेगा?

  • कुछ छोटे-मोटे उल्लंघनों को छोड़कर युद्धविराम अब तक बरकरार है और दोनों तरफ दबाव बना हुआ है।
  • हाल के महीनों में जहाँ एक ओर हुती के नियंत्रण से कई इलाके बाहर हुए हैं, वहीं दूसरी ओर सऊदी गठबंधन ताकतों पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है।
  • समझौते के अनुसार, युद्ध के सभी भागीदारों को 21 दिनों के भीतर होदेदा से वापस लौटना होगा।
  • संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षक, सरकार और विद्रोही प्रतिनिधियों की निगरानी हेतु एक टीम गठित करेंगे ताकि युद्धविराम संधि की निगरानी की जा सके। गौर करने वाली बात यह है कि स्टॉकहोम समझौता मुख्य रूप से यमन की मानवीय स्थितियों पर केंद्रित है।
  • यही कारण है कि केवल होदेदा में युद्धविराम पर सहमति बनी है। सवाल यह है कि क्या युद्ध करने वाले दल संघर्ष के अन्य क्षेत्रों में भी युद्धविराम को लागू करेंगे।
  • यमन के बिखरते राजनीतिक परिदृश्य में दोनों दल अच्छी तरह से फैले हुए हैं। इस आमानवीय संघर्ष का समाधान केवल तभी मिल सकता है जब विद्रोही और सरकार दोनों एक दूसरे के प्रति कुछ राजनीतिक रियायतें बरतें।

स्रोत- द हिंदू


विविध

उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2018

चर्चा में क्यों?


हाल ही में ‘उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण (Public distribution) मंत्रालय’ द्वारा प्रस्तावित ‘उपभोक्ता संरक्षण विधेयक’ लोकसभा में पारित हो गया। गौरतलब है कि यह विधेयक 1986 के अधिनियम की जगह लेगा।

विधेयक की मुख्य विशेषताएँ

  • पारित किये गए विधेयक में उपभोक्ता (Consumer) शब्द को परिभाषित किया गया है। विधेयक के अनुसार, उपभोक्ता वह व्यक्ति है जो अपने इस्तेमाल के लिये कोई वस्तु खरीदता है या सेवा प्राप्त करता है। इसमें वह व्यक्ति शामिल नहीं है जो दोबारा बेचने के लिये किसी वस्तु को हासिल करता है या व्यावसायिक उद्देश्य के लिये किसी वस्तु या सेवा को प्राप्त करता है।

उपभोक्ताओं के अधिकार

  • विधेयक में उपभोक्ताओं के अधिकारों की बात की गई है, जो इस प्रकार हैं-
  1. ऐसी वस्तुओं और सेवाओं की मार्केटिंग के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करना, जो जीवन और संपत्ति के लिये जोखिमपरक है।
  2. वस्तुओं और सेवाओं की गुणवत्ता, मात्रा, शक्ति, शुद्धता, मानक और मूल्य की जानकारी प्राप्त होना।
  3. प्रतिस्पर्द्धात्मक मूल्यों पर वस्तु और सेवा उपलब्ध होने का आश्वासन प्राप्त होना
  4. अनुचित या प्रतिबंध व्यापार की स्थिति में मुआवज़े की मांग करना।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण अथॉरिटी (Central Consumer Protection Authority)

  • केंद्र सरकार उपभोक्ताओं के अधिकारों को बढ़ावा देने, उनका संरक्षण करने और उन्हें लागू करने के लिये केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण अथॉरिटी (Central Consumer Protection Authority-CCPA) का गठन करेगी। यह अथॉरिटी उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन, अनुचित व्यापार और भ्रामक विज्ञापनों से संबंधित मामलों को विनियमित करेगी।

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  • लोकसभा में पारित हो चुके इस विधेयक में भ्रामक विज्ञापनों के लिये जुर्माने का भी प्रावधान है।
  • ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Consumer Disputes Redressal Commissions-CDRCs) के गठन का भी प्रावधान है।

उत्पाद की ज़िम्मेदारी

  • उत्पाद की ज़िम्मेदारी विनिर्माण करने वाले या सेवा प्रदाता या विक्रेता की होगी। यह उसकी ज़िम्मेदारी बनती है कि किसी खराब वस्तु या खराब सेवा के कारण होने वाले नुकसान या चोट के लिये उपभोक्ता को मुआवजा दे।
  • मुआवजे का दावा करने के लिये उपभोक्ता को विधेयक में स्पष्ट खराबी या गड़बड़ी से जुडी कम-से-कम एक शर्त को साबित करना होगा।

स्रोत- पीआरएस (PRS) एवं द हिंदू


जीव विज्ञान और पर्यावरण

एशियाई शेर संरक्षण परियोजना

चर्चा में क्यों?


भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change) ने एशियाई शेर की दुनिया की आखिरी स्वतंत्र आबादी और इसके संबंधित पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा और संरक्षण के उद्देश्य से ‘एशियाई शेर संरक्षण परियोजना’ (Asiatic Lion Conservation Project) शुरू की है।

उद्देश्य

  • ‘एशियाई शेर संरक्षण परियोजना’ एशियाई शेर के संरक्षण और पुनर्प्राप्ति के लिये चलाए जा रहे अन्य प्रयासों को बल प्रदान करेगी, इस परियोजना के तहत आधुनिक तकनीक/उपकरणों, नियमित वैज्ञानिक अनुसंधान संबंधी अध्ययनों, रोग प्रबंधन, आधुनिक निगरानी/गश्त तकनीक की सहायता से कार्य किया जाएगा।

वित्त पोषण

  • इस परियोजना का कार्यकाल 3 साल का है, इसके क्रियान्वयन के लिये केंद्रीय प्रायोजित योजना वन्यजीव आवास का विकास [Development of Wildlife Habitat (CSS-DWH)] से लगभग 9784 लाख रुपए का वित्त उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ-साथ 60:40 के अनुपात में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी भी रहेगी।

एशियाई शेर

  • एक समय में पूर्वी एशिया में पलामू (Palamau) से लेकर फारस (ईरान) तक पाई जाने वाली एशियाई शेरों की प्रजाति अंधाधुंध शिकार और आवासीय क्षति के कारण विलुप्त होने को है।
  • 1890 के दशक के अंत तक गुजरात के गिर जंगलों में शेरों की 50 से भी कम जनसंख्या बची थी। राज्य और केंद्र सरकार द्वारा समय पर कड़े सुरक्षा उपाय किये जाने के बाद वर्तमान में एशियाई शेरों की संख्या बढ़कर 500 से अधिक हो पाई है।
  • वर्ष 2015 में आखिरी जनगणना में 1648.79 वर्ग किमी. के गिर संरक्षित क्षेत्र के नेटवर्क (Gir Protected Area Network) में एशियाई शेरों की संख्या 523 दर्ज की गई।
  • इस नेटवर्क के अंतर्गत गिर राष्ट्रीय उद्यान (Gir National Park); गिर अभयारण्य (Gir Sanctuary); पानिया अभयारण्य (Pania Sanctuary)’ आरक्षित, संरक्षित एवं अनगिनत वनों के समीप अवस्थित मितीला अभयारण्य (Mitiyala Sanctuary) शामिल है।
  • यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि हमेशा से एशियाई शेरों का संरक्षण भारत सरकार की प्राथमिकता रहा है।

शेरों के संरक्षण के संबंध में किये गए प्रयास

  • इस परियोजना से पहले भी मंत्रालय ने गुजरात में एशियाई शेर के संरक्षण हेतु कई प्रयास किये हैं, ऐसे ही एक कार्यक्रम के अंतर्गत सरकार द्वारा 21 गंभीर रूप से लुप्तप्राय (critically endangered) प्रजातियों की सूची में एशियाई शेरों को शामिल किया गया है। साथ ही CSS-DWH के तहत वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई है।
  • इस परियोजना के अंतर्गत देश में एक स्थिर और व्यावहारिक शेर आबादी सुनिश्चित करने के लिये आवासीय सुधार के उपायों, वैज्ञानिक हस्तक्षेप, रोग नियंत्रण और पशु चिकित्सा देखभाल तथा पर्याप्त पारिस्थितिकी विकास कार्यों पर विशेष रूप से विचार किया गया है।

स्रोत- पीआईबी (PIB)


भारतीय अर्थव्यवस्था

राज्यों की स्टार्ट-अप रैंकिंग 2018

संदर्भ


औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (Department of Industrial Policy and Promotion-DIPP) ने राज्यों की स्टार्ट-अप रैंकिंग 2018 के परिणाम घोषित किये। यह अपने तरह की पहली रैंकिंग है। DIPP ने इसकी कार्यविधि जनवरी 2016 से शुरू कर दी थी।

उद्देश्य

  • इसका उद्देश्य देश में उभरते उद्यमियों को प्रोत्साहन देना है। योजना के तहत कर और पूंजीगत लाभ कर की छूट दी जा रही है।

प्रमुख बिंदु

  • स्टार्ट-अप नीति नेतृत्व, नवाचार, नवाचार प्रगति, संचार, पूर्वोत्तर नेतृत्व, पर्वतीय राज्य नेतृत्व इत्यादि विभिन्न श्रेणियों में राज्यों का आकलन किया गया।
  • इन श्रेणियों में किये जाने वाले प्रदर्शन के आधार पर राज्यों को शानदार प्रदर्शन, बेहतरीन प्रदर्शन, मार्गदर्शक, आकांक्षी मार्गदर्शक, उभरते हुए राज्य और आरंभकर्त्ता के रूप में पहचान की गई है –

♦ शानदार प्रदर्शन - गुजरात
♦ बेहतरीन प्रदर्शन - कर्नाटक, केरल, ओडिशा और राजस्थान
♦ मार्गदर्शक - आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और तेलंगाना
♦ आकांक्षी मार्गदर्शक - हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, उत्तर प्रदेश, और पश्चिम बंगाल
♦ उभरते हुए राज्य - असम, दिल्ली, गोवा, जम्मू & कश्मीर, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु और उत्तराखंड
♦ आरंभकर्त्ता - चंडीगढ़, मणिपुर, मिज़ोरम, नगालैंड, पुदुच्चेरी, सिक्किम और त्रिपुरा

  • राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 51 अधिकारियों को ‘चैंपियन’ के रूप में चुना गया, जिन्होंने अपने राज्यों की स्टार्ट-अप इको प्रणाली के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
  • इस पूरी प्रक्रिया में 27 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों ने हिस्सा लिया।
  • मूल्यांकन समिति में स्टार्ट-अप इको प्रणाली से संबंधित स्वतंत्र विशेषज्ञों को रखा गया था, जिन्होंने विभिन्न मानकों के आधार पर सभी राज्यों का मूल्यांकन किया।
  • रोजगार सृजन के लिए स्टार्ट-अप देश में बहुत अहमियत रखते हैं क्योंकि ये नए विचारों से लैस होते हैं और ये देश की सामाजिक, कृषि और सेवा क्षेत्र की समस्याएँ हल करने में सक्षम होते हैं।

स्रोत- पीआईबी (PIB)


विविध

Rapid Fire 21 December

  • प्रत्येक वर्ष 20 दिसंबर को मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय मानव एकता दिवस (International Human Solidarity Day); संयुक्त राष्ट्र ने विविधता में एकता के महत्त्व को समझाने के लिये 2005 में की थी यह दिवस मनाने की घोषणा, इस बार का एकता दिवस बच्चों को समर्पित किया गया और लोगों से यह प्रण लेने को कहा गया कि दुनिया में कोई भी बच्चा भूखा न सोए
  • पर्यावरण की दृष्टि से शहरों को रैंकिंग देने पर नवगठित केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सैद्धांतिक तौर पर जताई सहमति; पर्यावरण के तय मानकों की विभिन्न श्रेणियों के आधार पर शहरों को दिये जाएंगे पॉइंट्स; कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक परिवहन, यातायात जाम, सड़कों की सफाई और पर्यवरण संरक्षण को लेकर जनजागरूकता आदि पर मिले पॉइंट्स के आधार पर ही तय होगी शहरों की पर्यावरणीय रैंकिंग
  • भारत में पहली बार केरल में दी गई पालतू हाथियों को DNA आधारित जेनेटिक ID पहचान; केरल सरकार की DNA डेटाबेस पहल से हुआ यह संभव; स्थानीय राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नेलॉजी के तकनीकी सहयोग से वन विभाग ने राज्यभर के सभी पंजीकृत पालतू हाथियों का डीएनए डेटाबेस तैयार किया; हाथियों के मालिकाना हक को लेकर किसी विवाद या अन्य जटिलताओं की स्थिति में प्रामाणिक दस्तावेज के रूप में मददगार साबित होगा यह डेटाबेस
  • I AM A VILLAGE पहल के तहत उत्तराखंड सरकार गाँवों के विकास पर काम कर रही है; अगले पाँच वर्षों में राज्य के 475 गाँवों की तस्वीर बदलने की है योजना; किसानों की आय दोगुना करने और गाँवों से लगातार हो रहे पलायन को रोकने के मद्देनज़र शुरू की गई है I AM A VILLAGE पहल; हर गाँव में खर्च की जाएगी एक से डेढ़ करोड़ रुपए की राशि; प्रत्येक विकास खंड में एक गाँव को कृषि की सभी सुविधाओं से किया जाएगा लैस
  • प्लास्टिक से पर्यावरण को हो रहे नुकसान के मद्देनज़र यूरोपीय संघ ने 2021 तक एक बार इस्तेमाल के बाद फेंक दिये जाने वाले प्लास्टिक की कुछ चीज़ों को बैन करने का फैसला किया; इनमें कॉटन बड्स, कटलरी, प्लेट, स्ट्रॉ, गुब्बारे की प्लास्टिक की डंडियों और Expanded Polystyrene से बने फूड कंटेनर शामिल हैं; प्लास्टिक कचरे से समुद्रों को बचाने की मुहिम के तहत यूरोपीय संघ के 28 देशों ने जताई सहमति
  • ISIS पर जीत का दावा करते हुए अमेरिका ने किया सीरिया से सेना हटाने का फैसला; सीरिया में अभी मौजूद हैं करीब 2 हज़ार अमेरिकी सैनिक, जिन्हें निकालने में लग सकते हैं 2 से 3 महीने; ट्रंप प्रशासन के इस फैसले के विरोध में अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने किया इस्तीफा देने का एलान, सीरिया में लंबे समय तक सेना की तैनाती के पक्षधर हैं जेम्स मैटिस
  • सीरिया के बाद अफगानिस्तान से भी अपने सैनिक वापस बुलाने का फैसला किया अमेरिका ने; अफगानिस्तान में तैनात हैं लगभग 14 हज़ार अमेरिकी सैनिक; पिछले करीब 17 साल से अमेरिकी सेना अफगानिस्तान में तैनात है; गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में ही अफगानिस्तान से चरणबद्ध तरीके से सेना को हटाने का किया गया था फैसला
  • हर्षवर्धन श्रृंगला को अमेरिका में भारत का नया राजदूत नियुक्त किया गया है; नवतेज सरना का स्थान लेंगे 1984 बैच के IFS हर्षवर्धन श्रृंगला, जो फिलहाल बांग्लादेश में भारतीय उच्चायुक्त हैं; बांग्लादेश में भारतीय उच्चायुक्त की जिम्मेदारी वरिष्ठ राजनयिक रीवा गांगुली दास को दी गई
  • ‘टाइम’ मैगज़ीन ने भारतीय मूल की अमेरिकी काव्या कोप्पारपू और रिषभ जैन तथा ब्रिटिश-इंडियन अमिका जॉर्ज को दुनिया के 25 प्रभावशाली किशोरों में स्थान दिया है; इस सूची में उन किशोरों को स्थान दिया जाता है जो अपने काम और लगन के कारण लोगों के लिये प्रेरणा बनकर सामने आते हैं
  • पूर्व भारतीय क्रिकेट ओपनर W.V. Raman को भारतीय महिला टीम का नया कोच चुना गया; इससे पहले रोमेश पवार महिला टीम के कोच थे, जिनका कार्यकाल 30 नवंबर को समाप्त हो गया था; भारतीय पुरुष टीम के कोच रह चुके गैरी कर्स्टन तथा तीन महिलाएँ भी शामिल थीं कोच की दौड़ में;  BCCI की चयन समिति में पूर्व कप्तान कपिल देव, अंशुमन गायकवाड़ और शांता रंगास्वामी शामिल थे

प्रारंभिक परीक्षा

प्रीलिम्स फैक्ट्स : 21 दिसंबर, 2018

पाइका विद्रोह


संस्‍कृति मंत्रालय द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार, 24 दिसंबर, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी IIT भुवनेश्‍वर के परिसर में आयोजित कार्यक्रम में पाइका विद्रोह की याद में स्‍मारक सिक्‍का और डाक टिकट जारी करेंगे। भारत सरकार ने उत्‍कल विश्‍वविद्यालय, भुवनेश्‍वर में इस कार्यक्रम की याद में 5 करोड़ रुपए की लागत से एक पीठ स्‍थापित करने का फैसला किया है।

  • यह धनराशि विश्‍वविद्यालय को संचित निधि के रूप में जारी की जाएगी। पीठ का खर्च संचित निधि पर अर्जित होने वाले ब्‍याज की रकम से वहन किया जाएगा।
  • प्रधानमंत्री पुरातत्‍व संग्रहालय, ललितगिरी का भी उद्घाटन करेंगे, जो निश्चित रूप से क्षेत्र के पर्यटन के फलक में एक नया आयाम जोड़ेगी और रोज़गार के अवसरों की संभावनाओं में अपार वृद्धि करेगी।

पृष्ठभूमि

  • सन 1857 के प्रथम स्‍वाधीनता संग्राम से 40 साल पहले 1817 में बक्सि जगबन्धु ने खोर्धा में दमनकारी ब्रिटिश राज के खिलाफ बहादुर पाइका योद्धाओं को जागृत किया था और जंग में उनका नेतृत्‍व किया था।
  • इस विद्रोह के दो सौ साल पूरे होने के अवसर को उचित ढंग से मनाने के निर्णय की घोषणा 2017-18 के बजट भाषण में की गई थी।

स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV)


हाल ही में थुंबा (Thumba) में इसरो के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (Vikram Sarabhai Space Centre-VSSC) द्वारा स्माल

स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (Small Satellite Launch Vehicle-SSLV) का डिज़ाइन तैयार किया गया है। इसरो को उम्मीद है कि छह महीने के अंदर ही इस व्हीकल को लॉन्च भी कर दिया जाएगा।

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    • इस लॉन्च व्हीकल को ‘बेबी रॉकेट’ भी कहा जा रहा है क्योंकि यह छोटे आकार के उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिये सबसे छोटा और सबसे तेज़ व्हीकल होगा।
    • लॉन्चपैड पर यह 34 मीटर का होगा जो कि ध्रुवीय उपग्रह लॉन्च व्हीकल (Polar Satellite Launch Vehicle-PSLV) से 10 मीटर छोटा और भू-समकालिक उपग्रह लॉन्च व्हीकल (Geosynchronous Satellite Launch Vehicle-GSLV) के MK-2 संस्करण से लगभग 15 मीटर छोटा होगा।
    • इसके साथ-साथ यह सबसे 'पतला' लॉन्च व्हीकल भी है जिसका व्यास मात्र दो मीटर है।
    • SSLV में तीन ठोस मोटर चरण हैं। ये PSLV एवं GSLV की तरह कई उपग्रहों को ले जा सकने में सक्षम है हालाँकि, ये उपग्रह आकार में छोटे होंगे।

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