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डेली न्यूज़

  • 17 Jan, 2019
  • 26 min read
जीव विज्ञान और पर्यावरण

ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2019

चर्चा में क्यों?


हाल ही में वैश्विक जोखिम परिदृश्य के संदर्भ में वर्ल्ड इकनोमिक फोरम द्वारा वैश्विक जोखिम रिपोर्ट 2019 (Global Risk Report-2019) जारी किया गया।

ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2019

  • ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट, 2019 वर्तमान में वैश्विक जोखिम परिदृश्य को दर्शाने और इस संदर्भ में कार्रवाई हेतु प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने का अवसर प्रदान करती है।
  • इस वर्ष की रिपोर्ट में “what if” (क्या हो अगर) शब्दों की एक श्रृंखला शामिल की गई है जिसमें भविष्य में आने वाले जोखिमों जैसे कि क्वांटम कंप्यूटिंग, मौसम में तात्कालिक परिवर्तन, मौद्रिक लोकलुभावनवाद (Monetary Populism), भावनात्मक रूप से उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य संभावित जोखिमों पर चर्चा की गई है।
  • इस रिपोर्ट द्वारा वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक (Geopolitical ) और भू-आर्थिक (Geo-economic) समस्याओं की पृष्ठभूमि पर चिंता व्यक्त करते हुए पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक परिवर्तनों से लेकर चौथी औद्योगिक क्रांति के मार्ग में आने वाली समस्याओं पर प्रकाश डाला गया है।
  • इस रिपोर्ट में वर्तमान के वैश्विक जोखिम सर्वेक्षण के परिणामों को प्रस्तुत किया गया है जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, शिक्षा और नागरिक समाज से लगभग 1,000 सदस्यों द्वारा दुनिया के सामने आने वाले जोखिमों का आकलन किया गया है।
  • आने वाले दस वर्षों में वैश्विक स्तर पर मौसम एवं जलवायु-परिवर्तन नीति की विफलता को सबसे गंभीर खतरों के रूप में बताया जा रहा है।
  • वैश्विक जोखिमों के मानवीय कारणों और प्रभावों पर विशेष ध्यान देते हुए दुनिया भर में मनोवैज्ञानिक तनाव के बढ़ते स्तर पर सकारात्मक कदम उठाने पर बल दिया गया है।

वर्ल्ड इकनोमिक मंच (World Economic Forum)


विश्व आर्थिक मंच सार्वजनिक-निजी सहयोग हेतु एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिसका उद्देश्य विश्व के प्रमुख व्यावसायिक, अंतरराष्ट्रीय राजनीति, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों तथा अन्य प्रमुख क्षेत्रों के अग्रणी लोगों के लिये एक मंच के रूप में काम करना है। 

  • यह स्विट्ज़रलैंड में स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था है और इसका मुख्यालय जिनेवा में है।
  • इस फोरम की स्थापना 1971 में यूरोपियन प्रबंधन के नाम से जिनेवा विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रोफेसर क्लॉस एम. श्वाब ने की थी।
  • इस संस्था की सदस्यता अनेक स्तरों पर होती है और ये स्तर संस्था के काम में उनकी सहभागिता पर निर्भर करते हैं।
  • इसके माध्यम से विश्व के समक्ष मौजूद महत्त्वपूर्ण आर्थिक एवं सामाजिक मुद्दों पर परिचर्चा का आयोजन किया जाता है।

स्रोत – विश्व आर्थिक मंच वेबसाइट


भारतीय अर्थव्यवस्था

RBI ने ECB मानदंडों को आसान बनाया

चर्चा में क्यों?


भारत में व्यापार को आसान और बेहतर बनाने के लिये भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक नया बाह्य वाणिज्यिक ऋण (External Commercial Borrowing-ECB) ढाँचा तैयार किया है।

प्रमुख बिंदु

  • नए ढाँचे के तहत सभी योग्य उधारकर्त्ता ऑटोमेटिक रूट के ज़रिये एक वित्त वर्ष में 750 मिलियन डॉलर या इसके बराबर की रकम बाहरी वाणिज्यिक ऋण के रूप में ले सकते हैं। पहले यह सीमा अलग-अलग क्षेत्रों के लिये अलग-अलग निर्धारित थी
  • केंद्रीय बैंक ने पात्र उधारकर्त्ताओं और मान्यता प्राप्त उधारदाताओं की सूची का भी विस्तार किया है।
  • कच्चे तेल की खरीद के लिये डॉलर की मांग के चलते विदेशी मुद्रा बाज़ार में उत्पन्न अस्थिरता पर अंकुश लगाने के लिये यह ढाँचा सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को एक विशेष छूट प्रदान करता है।
  • इसके अलावा सभी वाणिज्यिक ऋणों की न्यूनतम औसत परिपक्वता अवधि (Minimum Average Maturity Period-MAMP) तीन साल निर्धारित की गई है, चाहे जितनी भी रकम हो।
  • एफडीआई प्राप्त करने के लिये पात्र सभी संस्थाओं को शामिल करने हेतु उधारकर्त्ताओं की सूची का विस्तार किया गया है।
  • इसके अतिरिक्त, पोर्ट ट्रस्ट, SEZ, SIDBI, एक्जिम बैंक की इकाइयों और सूक्ष्म वित्त (Micro-finance) जैसी गतिविधियों में लगे पंजीकृत कंपनियाँ भी इस ढाँचे के तहत उधार ले सकती हैं।

परिपक्वता अवधि

  • ECB के लिये न्यूनतम परिपक्वता अवधि तीन वर्ष होगी, मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को यह एक वर्ष की परिपक्वता अवधि के साथ प्रति वित्तीय वर्ष में 50 मिलियन डॉलर तक बढ़ाने की अनुमति देता है।
  • इसके अलावा यदि ECB को विदेशी इक्विटी धारक द्वारा बढ़ाया जाता है और कार्यशील पूंजी, सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों या रुपए में ऋणों के पुनर्भुगतान के लिये उपयोग किया जाता है तो परिपक्वता अवधि पाँच वर्ष होगी।
  • यह संभवतः विदेशी शेयर धारकों को प्रोत्साहित करने के लिये किया गया है, विशेष रूप से भारतीय एयरलाइंस में अपने भारतीय भागीदारों का समर्थन करने के लिये। इससे जेट एयरवेज़ को अपने मौजूदा वित्तीय संकट से निपटने में मदद मिल सकती है।

स्रोत : द हिंदू (बिज़नेस लाइन)


भारतीय अर्थव्यवस्था

निर्यात-आयात बैंक के पुनर्पूंजीकरण को स्वीकृति

चर्चा में क्यों?


प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय निर्यात-आयात बैंक (Export Import Bank of India-Exim Bank) के पुनर्पूंजीकरण को मंज़ूरी दे दी है।

प्रमुख बिंदु

  • भारतीय निर्यात-आयात बैंक में पूंजी लगाने के लिये भारत सरकार 6,000 करोड़ रुपए के पुनर्पूंजीकरण बॉण्ड (Recapitalization Bonds) जारी करेगी।
  • एक्ज़िम बैंक का पुनर्पूंजीकरण दो चरणों में किया जाएगा जिसके तहत वित्तीय वर्ष 2018-19 में 4,500 करोड़ रुपए और वित्तीय वर्ष 2019-20 में 1,500 करोड़ रुपए की पूंजी लगाई जाएगी।
  • कैबिनेट ने एक्ज़िम बैंक की अधिकृत पूंजी को 10,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 20,000 करोड़ रुपए करने की मंज़ूरी दे दी है। पुनर्पूंजीकरण बॉण्ड सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को जारी किये जाएंगे।

प्रमुख प्रभावः

  • एक्ज़िम बैंक भारत के लिये प्रमुख निर्यात ऋण एजेंसी है। एक्ज़िम बैंक में पूंजी लगाने से यह पूंजी पर्याप्तता अनुपात बढ़ाने सहित ज़्यादा क्षमता के साथ भारतीय निर्यात के लिये आवश्यक सहायता देने में समर्थ हो जाएगा।
  • पुनर्पूंजीकरण से भारतीय कपड़ा उद्योगों को आवश्यक सहायता देने, रियायती वित्त योजना (Concessional Finance Scheme-CFS) में संभावित बदलावों, भारत की सक्रिय विदेश नीति और रणनीतिक मंशा को ध्यान में रखते हुए भविष्य के लिये ऋण की नई रूपरेखा की संभावनाओं जैसी पहलों को बढ़ावा मिलेगा।

एक्ज़िम बैंक (EXIM Bank)

  • एक्ज़िम बैंक ऑफ इंडिया (एक्ज़िम बैंक) की स्थापना एक संसदीय अधिनियम (Act of Parliament) के तहत वर्ष 1982 में भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के वित्तपोषण, इसे सुविधाजनक बनाने और बढ़ावा देने के लिये शीर्ष वित्तीय संस्थान के रूप में की गई थी।
  • यह बैंक मुख्यतः भारत से किये जाने वाले निर्यात के लिये ऋण उपलब्ध कराता है।
  • भारत के विकासात्मक एवं बुनियादी ढाँचागत परियोजनाओं, उपकरणों, वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात के लिये विदेशी खरीदारों और भारतीय आपूर्तिकर्त्ताओं को आवश्यक सहायता देना भी इसमें शामिल है।
  • इसका नियमन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा किया जाता है।

स्रोत : पी.आई.बी


जीव विज्ञान और पर्यावरण

2018 के दौरान भारत की जलवायु

चर्चा में क्यों?


हाल ही में भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department-IMD) ने 2018 के दौरान भारत की जलवायु के संदर्भ में एक वक्तव्य जारी किया है। इस वक्तव्य में जलवायु से संबंधित विभिन्न आँकड़ों को जारी किया गया है जिसमें तामपान, वर्षा तथा मौसम द्वारा उत्पन्न की गई मुश्किल स्थितियों जैसे पहलुओं की तरफ ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई है।

वक्तव्य में शामिल पहलू

  • तापमान की स्थिति
  • वर्षा की स्थिति
  • उच्च प्रभाव डालने वाली मौसमी घटनाएँ

तापमान की स्थिति

  • 2018 के दौरान भारत में औसत तापमान सामान्य से काफी अधिक था।
  • 2018 में भारतीय भूमि सतह का वार्षिक औसत तापमान 1981-2010 के औसत से 0.41 डिग्री सेंटीग्रेड अधिक था। अतः वर्ष 1901 के बाद दर्ज़ किये गए आँकड़ों के मुताबिक, 2018 छठा सबसे गर्म वर्ष था।
  • अब तक पाँच सबसे गर्म वर्ष 2016 (0.72 ℃), 2009 (0.56 ℃), 2017 (0.55 ℃), 2010 (0.54 ℃), 2015 (0.42 ℃) रहे हैं।

TREND

  • गौर करने वाली बात यह है कि 15 में से 11 सबसे गर्म वर्ष हाल के पंद्रह वर्षों (2004-2018) के दौरान थे।
  • विश्व मौसम संगठन (World Meteorological Organization-WMD) के अनुसार, लंबे समय चल रही ग्लोबल वार्मिंग की प्रवृत्ति 2018 में भी जारी रही।

वर्षा की स्थिति

  • देश में 2018 की वार्षिक औसत वर्षा 1951-2000 के दीर्घ अवधि की औसत (Long Period Average-LPA) का 85% थी।

DEP

  • प्रमुख वर्षा ऋतु यानी दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून-सितंबर) के दौरान पूरे देश में वर्षा की स्थिति सामान्य (Long Period Average-LPA का 90.6%) रही।
  • मध्य भारत में दीर्घ अवधि औसत (Long Period Average-LPA) वर्षा के मुकाबले 93% वर्षा हुई, जबकि पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में यह आँकड़ा 76% रहा।
  • 2018 में उत्तर-पूर्व मानसून (अक्तूबर-दिसंबर) के दौरान वर्षा सामान्य से काफी कम (Long Period Average-LPA का 56%) हुई।

उच्च प्रभाव डालने वाली मौसमी घटनाएँ

  • उत्तरी हिंद महासागर के ऊपर बनने वाले चक्रवाती तूफानों (तितली, फैथई, गज) के अलावा, देश ने उच्च प्रभाव डालने वाली मौसमी घटनाओं का सामना किया।
  • इनमें अत्यधिक भारी वर्षा, ग्रीष्म और शीत लहरें, बर्फबारी, गरज, धूल भरी आंधी, बिजली, बाढ़ जैसी भयावह घटनाएँ शामिल रहीं।

Weather Events

  • प्री-मानसून, मानसूनी मौसम के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों (अर्थात् उत्तरी/उत्तर-पूर्वी, मध्य और प्रायद्वीपीय भागों) में बाढ़ और भारी बारिश से संबंधित घटनाओं की वज़ह से 800 से अधिक लोगों को जान गँवानी पड़ी।
  • इन मौतों में से अकेले केरल में बाढ़ की वज़ह से 223 मौतें (8-23 अगस्त के बीच) हुईं।

ग्लोबल वार्मिंग का परिणाम

  • हालिया वर्षों के दौरान जलवायु में प्रतिबिंबित यह भयावहता ग्लोबल वार्मिंग का ही परिणाम है। भारतीय मुख्य भूमि के तापमान में वृद्धि वैश्विक तापमान वृद्धि के समान ही है।
  • तापमान बढ़ने के साथ-साथ ऐसी मौसमी घटनाएँ और भी विकराल रूप धारण करती जाएंगी।


स्रोत- इंडियन एक्सप्रेस


शासन व्यवस्था

DGP की नियुक्ति से संबंधित राज्यों की याचिका ख़ारिज: SC

चर्चा में क्यों?


हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पाँच राज्यों पंजाब, केरल, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और बिहार में पुलिस प्रमुखों (Police Chief) के चयन और नियुक्ति हेतु उनके स्थानीय कानूनों को लागू करने संबंधी याचिका खारिज कर दी गई।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India–CJI) रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक बेंच द्वारा पंजाब, केरल, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और बिहार द्वारा पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति के लिये अपनाई जाने वाली प्रक्रिया में शीर्ष अदालत के आदेशों में संशोधन के लिये दायर याचिका को खारिज कर दिया गया है।
  • अदालत के अनुसार, ऐसा इसलिये किया गया क्योंकि यह मामला बड़े पैमाने पर जनहित से जुड़ा है अतः पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति में राजनीतिक हस्तक्षेप से बचा जाना चाहिये।
  • शीर्ष अदालत के अनुसार, राज्यों द्वारा पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति के विषय पर कोई भी नियम या स्थानीय कानून उसकी अवमानना एवं आदेश का उलंघन माना जाएगा।
  • कुछ राज्य सरकारें सेवानिवृत्त होने से बहुत समय पहले की तारीख पर अपने पसंदीदा अधिकारियों को DGP के रूप में नियुक्त कर देती हैं जिनका उद्देश्य अपने निजी लाभों को प्राप्त करना होता है। परिणामस्वरूप उसी पद पर आसीन व्यक्ति 62 वर्ष की आयु तक दो बार पद पर बने रहते हैं।
  • हालाँकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यद्यपि राज्यों द्वारा नियुक्त किये गए DGP को पदभार ग्रहण करने के बाद भी पद पर बने रहने की अनुमति दी जा सकती है लेकिन, कार्यकाल का यह विस्तार केवल ‘उचित अवधि’ के लिये होना चाहिये।
  • जुलाई 2018 में, सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों को संघ लोक सेवा आयोग की सलाह के बिना DGP की नियुक्ती करने से रोक दिया था।

SC द्वारा जारी निर्देश

  • न्यायालय द्वारा राज्य पुलिस बलों की नियुक्ति में सुधार और पारदर्शिता के लिये निर्देशों की श्रृंखला पारित की गई थी। जो इस प्रकार हैं :
  • SC द्वारा राज्यों को DGP की नियुक्ति की प्रक्रिया में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) से सलाह लेने का निर्देश दिया गया है।
  • इस प्रक्रिया में संबंधित राज्य सरकारों को कार्यकारी DGP के रिटायर होने से तीन महीने पहले UPSC को इस पद के दावेदारों का नाम भेजना होगा।
  • UPSC, DGP के पद पर नियुक्त किये जाने के लिये उपयुक्त तीन अधिकारियों का एक पैनल तैयार करेगा और उसे वापस भेजेगा।
  • UPSC, जहाँ तक व्यावहारिक हो, विचार क्षेत्र के ऐसे लोगों को चुनेगा जिनकी सेवानिवृति में कम-से-कम दो साल शेष हो, इसके अंतर्गत योग्यता एवं वरिष्ठता को भी वरीयता दी जाएगी।
  • तदुपरांत, राज्य सरकारें UPSC द्वारा चुने गए व्यक्तियों में से किसी एक को DGP पद पर नियुक्त करेगी।
  • दिसंबर 2018 में शीर्ष अदालत ने पंजाब और हरियाणा के वर्तमान DGP के कार्यकाल को जनवरी 2019 के अंत तक बढ़ाया था और पुलिस प्रमुख के चयन एवं नियुक्ति के बारे में अपने स्थानीय कानूनों को लागू करने की मांग करने वाले राज्यों की दलीलों को सुनने के लिये सहमति भी व्यक्त की थी।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)


संघ लोक सेवा आयोग भारत सरकार की प्रमुख केंद्रीय पदों पर नियुक्ति की एजेंसी है। यह अखिल भारतीय सेवाओं और केंद्रीय सेवाओं के समूह ‘A’ और समूह ‘B’ के लिए नियुक्तियों हेतु परीक्षाओं का आयोजन भी करवाती है।


स्रोत – द हिंदू


विविध

Rapid Fire करेंट अफेयर्स (17 जनवरी)

  • नागरिक विमानन मंत्रालय ने विज़न 2040 जारी किया है। इसके अनुसार देश में 2040 तक हवाई यात्रियों की संख्या करीब छह गुना बढ़कर 1.1 अरब होने की संभावना है। परिचालन वाले हवाई अड्डों की संख्या बढ़कर लगभग 200 हो सकती है। कॉमर्शियल विमानों की संख्या 2018 के 622 से बढ़कर 2040 में 2359 हो सकती है। देश के शीर्ष 31 शहरों में दो हवाई अड्डे और दिल्ली तथा मुंबई में तीन-तीन हवाई अड्डे हो सकते हैं। गौरतलब है कि भारत विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा विमानन बाज़ार है।
  • केंद्र सरकार ने 2015, 2016, 2017 और 2018 के लिये गांधी शांति पुरस्कार घोषित किये हैं। 2015 के लिये कन्याकुमारी के विवेकानंद केंद्र, 2016 के लिये अक्षय पात्र फाउंडेशन और सुलभ इंटरनेशनल को संयुक्त रूप से, 2017 के लिये एकल अभियान ट्रस्ट और 2018 के लिये कुष्ठ रोग उन्मूलन हेतु विश्व स्वास्थ्य संगठन के सद्भावना दूत योहेई ससाकावा को इस पुरस्कार से नवाज़ा गया है। इससे पहले 2014 में इसरो को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार महात्मा गांधी की 125वीं जयंती के मौके पर 1995 में शुरू हुआ था। इसके तहत एक करोड़ रुपए, एक प्रशस्ति पत्र और एक पदक दिया जाता है।
  • पोंगल के मौके पर तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में विवादित जल्लीकट्टू का आयोजन किया गया। जल्लीकट्टू तमिलनाडु का प्राचीन खेल है। फसलों की कटाई के मौके पर पोंगल के दौरान इसका आयोजन किया जाता है। इसमें सांडों को सींगों को पकड़कर उन पर काबू पाना होता है। जानवरों के प्रति क्रूरता की कई शिकायतों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में इस पर बैन लगा दिया था। लोगों के विरोध के बाद राज्य सरकार ने अध्यादेश जारी कर इसे वैधता प्रदान की।
  • केंद्र सरकार ने भारतीय निर्यात-आयात बैंक (EXIM Bank) के पुनर्पूंजीकरण का फैसला किया है। सरकार ने एक्जिम बैंक की अधिकृत पूंजी को 10,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 20,000 करोड़ रुपए करने की मंज़ूरी भी दी है। इसके लिये सरकार 6,000 करोड़ रुपए के पुनर्पूंजीकरण बॉण्ड जारी करेगी। ये बॉण्ड सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को जारी किये जाएंगे। एक्जिम बैंक भारत की प्रमुख निर्यात ऋण एजेंसी है। इसकी स्थापना एक अधिनियम के तहत 1982 में भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के वित्त-पोषण, इसे सुविधाजनक बनाने और बढ़ावा देने के लिये शीर्ष वित्तीय संस्थान के रूप में की गई थी।
  • केंद्र सरकार ने असम स्थित नुमालीगढ़ रिफाइनरी की क्षमता 3 MMTPA (मिलियन मीट्रिक टन वार्षिक) से बढ़ाकर 9 MMTPA करने की परियोजना को मंज़ूरी दे दी है। इस परियोजना में पारादीप से नुमालीगढ़ तक कच्चे तेल की पाइपलाइन और नुमालीगढ़ से सिलीगुड़ी तक तैयार उत्पादों की पाइपलाइन बिछाना शामिल है, जिन पर 22,594 करोड़ रुपए की लागत आएगी। रिफाइनरी के विस्तारीकरण से पूर्वोत्तर क्षेत्र में पेट्रोलियम उत्पादों की कमी को पूरा किया जा सकेगा।
  • मौसम विभाग ने वर्ष 2018 को 1901 के बाद अब तक का छठा सबसे गर्म साल बताया है। 2018 के मौसम का विश्लेषण करने के बाद मौसम विज्ञानियों ने यह अनुमान लगाया है। पिछले साल औसत तापमान सामान्य से 0.41 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। मौसम विभाग के अनुसार 1901 के बाद औसत तापमान की अधिकता के लिहाज से 2016 सर्वाधिक गरम साल रहा। इसके बाद 2009, 2010, 2015 और 2017 सबसे गरम पाँच साल रहे।
  • गुजरात के उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल की अध्यक्षता में गठित एक मंत्रिस्तरीय समूह रियल एस्टेट क्षेत्र के लिये कंपोजीशन योजना के साथ-साथ GST दरों के सरलीकरण की संभावनाओं पर विचार करेगा। GST परिषद की हालिया बैठक में GST व्यवस्था के तहत रियल एस्टेट क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिये सात सदस्यीय मंत्री समूह गठित करने का फैसला किया गया था। गौरतलब है कि रियल एस्टेट पर GST घटाने के लिये लंबे समय से चर्चा हो रही है।
  • ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेसा मे का यूरोपीय संघ से अलग होने संबंधी ब्रेक्जिट समझौता संसद में पारित नहीं हो सका। इस वज़ह से यूरोपीय संघ से बाहर जाने का मार्ग और जटिल हो गया है। ‘हाउस ऑफ कॉमंस' में उनके प्रस्ताव को 432 के मुकाबले 202 मतों से हार का सामना करना पड़ा। यह आधुनिक इतिहास में ब्रिटेन की संसद में किसी भी प्रधानमंत्री की सबसे बड़ी हार है। लेकिन इसके अगले दिन टेरेसा मे ने संसद में विश्वास मत जीत लिया। 325 सांसदों ने उनकी सरकार का समर्थन किया, जबकि 306 सांसदों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
  • भारतीय फुटबॉल टीम के मुख्य कोच स्टीफन कोंस्टेंटाइन ने एशिया कप में बहरीन के हाथों 0-1 से हार के बाद इस्तीफा दे दिया। उनका अनुबंध 31 जनवरी को खत्म होना था। उन्होंने 2015 में मुख्य कोच का पद संभाला था और उनका कार्यकाल दो बार एक-एक साल के लिये बढ़ाया गया था। वह 2002 से 2005 तक भी भारतीय टीम के कोच रहे थे। कोंस्टेंटाइन के मार्गदर्शन में भारत फीफा रैंकिंग में 173 से 96वें स्थान तक पहुँचा।

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