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इतिहास प्रैक्टिस प्रश्न

  • अशोक के धम्म की चर्चा करते हुए बताइये कि क्या यह मौर्य साम्राज्य के पतन के लिये उत्तरदायी था?

    15 Jun, 2020

    उत्तर :

    कलिंग युद्ध के नरसंहार के पश्चात् अशोक ने युद्ध की नीति त्याग कर ‘धम्म’ की नीति अपनाई। धम्म संस्कृत शब्द ‘धर्म’ का प्राकृत रूप है। यह कोई विशेष धार्मिक आस्था, व्यवहार या मनमाने ढंग से निर्मित की गई शासकीय नीति नहीं थी, बल्कि यह सामाजिक व्यवहार एवं गतिविधियों के सामान्यीकृत मानदंड थे। एक तरह से प्रजा के नैतिक उत्थान एवं सामाजिक व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिये अशोक द्वारा बनाए गए ‘नैतिक नियम’ ही धम्म की नीति थी।

    • अशोक के धम्म में किसी देवता की पूजा अथवा किसी कर्मकांड की आवश्यकता नहीं थी। अशोक ने अपना कर्त्तव्य समझकर अपनी प्रजा को पिता की तरह अच्छे व्यवहार का निर्देश दिया।
    • नारी सहित समाज के विभिन्न वर्गों के बीच ‘धम्म’ के संदेश को प्रचारित करने के लिये उसने ‘धम्म समाज’ नामक अधिकारियों की नियुक्ति की।
    • अशोक ने धम्म के प्रचार के लिये स्तंभों और शिलाओं पर संदेशों को उत्कीर्ण करवाया। साथ ही जो लोग पढ़ने में सक्षम नहीं थे, उनके लिये ये अभिलेख पढ़कर सुनाने का आदेश भी अपने अधिकारियों को दिया।
    • विदेशों, जैसे- मध्य एशिया और श्रीलंका में भी अशोक ने धम्म के प्रचार के लिये अपने दूत भेजे।
    • अशोक के धम्म का उपदेश था कि लोग माता-पिता की आज्ञा माने, ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं का आदर करें और दासों व सेवकों के प्रति दया करें।
    • अभिलेखों के माध्यम से धम्म के प्रचार के लिये अशोक ने अधिकतर ब्राह्मी लिपि में अभिलेखों का निर्माण करवाया। फिर भी अशोक के अभिलेखों की भाषा उनकी भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करती है, जैसे- उत्तर-पश्चिमी भारतीय उपमहाद्वीप में खरोष्ठी और आरमाहक लिपि में भी कुछ अभिलेख मिले हैं।

    अशोक ने धम्म के माध्यम से शांतिवादी नीति अपनाई और कहा जाता है कि इस शांति की नीति ने मौर्य साम्राज्य को पतन की ओर धकेल दिया। यह बात पूर्णतया सही नहीं है, क्योंकि धम्म के माध्यम से अशोक ने अपने साम्राज्य के भीतर और विदेश में महत्त्वपूर्ण सफलता पाई।

    • साम्राज्य के सुदूर भागों, जैसे- मध्य एशिया, यूनान और श्रीलंका में अपने धर्म प्रचारक भेजकर अशोक ने सांस्कृतिक विजय की नीति अपनाई। प्रबुद्ध शासक के तौर पर अशोक ने प्रचार के माध्यम से राजनैतिक प्रभाव क्षेत्र में वृद्धि की।
    • धम्म के प्रचार से अशोक ने अपने साम्राज्य के भीतर विभिन्न धार्मिक वर्गों के मध्य समन्वय एवं सामाजिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने का प्रयास किया।
    • धम्म के माध्यम से अशोक ने देश में राजनीतिक एकता स्थापित की। उसने एक धर्म, एक भाषा और एक लिपि से देश को एक सूत्र में बाँध दिया।
    • साम्राज्य से बाहर धर्म प्रचारक अधिकारियों की नियुक्ति से प्रशासन के क्षेत्र में लाभ हुआ और साथ ही विकसित गंगा के मैदान और दूरवर्ती क्षेत्रों के मध्य सांस्कृतिक संपर्क में वृद्धि हुई।

    इस प्रकार मौर्य साम्राज्य के पतन के लिये अशोक की धम्म की नीति को ज़िम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। मौर्य साम्राज्य के पतन के लिये अन्य कई कारण मौजूद थे, जैसे-

    • अशोक द्वारा पशु-पक्षियों के वध तथा स्त्रियों में प्रचलित कर्मकांडीय अनुष्ठान को निषिद्ध करने पर ब्राह्मणों की प्रतिक्रिया एवं उनमें जन्मी विद्वेष की भावना।
    • सेना और प्रशासनिक अधिकारियों पर होने वाले भारी खर्च के बोझ से मौर्य साम्राज्य के सामने खड़ा होने वाला वित्तीय संकट।
    • प्रांतों में दमनकारी शासन भी साम्राज्य के टूटने का महत्त्वपूर्ण कारण था। बिंदुसार के शासन में तक्षशिला के नागरिकों ने दुष्ट अधिकारियों के कुशासन की कड़ी शिकायतें की थी। अशोक के कलिंग अभिलेख से प्रकट होता है कि प्रांतों में हो रहे अत्याचारों से वह बड़ा चिंचित था।
    • अशोक द्वारा पश्चिमोत्तर सीमा दर्रे की सुरक्षा पर ध्यान नहीं देना। चीन की महादीवार जैसा अशोक ने कोई उपाय नहीं किया, जिससे साम्राज्य को पार्थियनों, शकों और यूनानियों से खतरा पैदा हुआ।

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