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ब्रू शरणार्थी

  • 23 Jan 2020
  • 12 min read

संदर्भ

16 जनवरी, 2020 को केंद्र सरकार, त्रिपुरा तथा मिज़ोरम की राज्य सरकारों व ब्रू समुदाय के प्रतिनिधियों के मध्य ब्रू शरणार्थियों से जुड़ा एक चतुर्पक्षीय समझौता हुआ। इस समझौते के अनुसार लगभग 34 हज़ार ब्रू शरणार्थियों को त्रिपुरा में ही बसाया जाएगा, साथ ही उन्हें सीधे सरकारी तंत्र से जोड़कर राशन, यातायात, शिक्षा आदि की सुविधा प्रदान कर उनके पुनर्वास में सहायता प्रदान की जाएगी।

ब्रू शरणार्थियों का मुद्दा कई वर्षों से लंबित था, वर्ष 1997 में जातीय तनाव के कारण बड़ी संख्या में ब्रू परिवारों ने मिज़ोरम से भागकर त्रिपुरा में शरण ली थी। त्रिपुरा में इन परिवारों को स्थायी शिविरों में रखा गया और उस समय इनकी संख्या लगभग 30 हज़ार थी।

ध्यातव्य है कि ब्रू समुदाय भारत के पूर्वोत्तर में स्थित मिज़ोरम राज्य का एक जनजातीय समुदाय है तथा इस समुदाय को त्रिपुरा राज्य में रियांग नाम से भी जाना जाता है, अतः अलग-अलग स्थानों पर इस समुदाय को ब्रू, रियांग अथवा ब्रू-रियांग नाम से संबोधित किया जाता है।

ब्रू शरणार्थी समझौता:

उपरोक्त चतुर्पक्षीय समझौते से करीब 23 वर्षों से जारी एक बड़ी समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा। इस समझौते के तहत केंद्र सरकार ने ब्रू-रियांग समुदाय के लोगों के पुनर्वास हेतु त्रिपुरा एवं मिज़ोरम की राज्य सरकारों और ब्रू-रियांग प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श कर एक नई व्यवस्था बनाने का फैसला किया है।

इस समझौते के तहत विस्थापित ब्रू परिवारों के लिए निम्नलिखित व्यवस्था की गई है-

  • वे सभी ब्रू-रियांग परिवार जो त्रिपुरा में ही बसना चाहते हैं, उनके लिये त्रिपुरा में स्थायी तौर पर रहने की व्यवस्था के साथ उन्हें त्रिपुरा राज्य के नागरिकों के सभी अधिकार दिये जाएंगे।
  • ये लोग केंद्र सरकार व त्रिपुरा राज्य की सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
  • समझौते के तहत विस्थापित परिवारों को 1200 वर्ग फीट (40X30 फीट) का आवासीय प्लाॅट दिया जाएगा।
  • प्रत्येक विस्थापित परिवार को घर बनाने के लिये 1.5 लाख रुपए की नकद सहायता प्रदान की जाएगी।
  • इसके साथ ही हर परिवार को 4 लाख रुपए फिक्स्ड डिपाॅजिट के रूप दिये जाएंगे।
  • पुनर्वास सहायता के रूप में परिवारों को दो वर्षों तक प्रतिमाह 5 हज़ार रूपए और निःशुल्क राशन प्रदान किया जाएगा।
  • इस समझौते के तहत सभी प्रकार की नकद सहायता प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benifit Transfer) प्रणाली के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा कराई जाएगी।
  • राज्य सरकार विस्थापित परिवारों के बैंक खाते, आधार कार्ड, जाति व निवास प्रमाण पत्र तथा मतदाता पहचान पत्र आदि जरूरी प्रमाण-पत्रों की व्यवस्था करेगी।
  • इस नई योजना के लिये भूमि की व्यवस्था त्रिपुरा सरकार द्वारा की जाएगी।
  • नए समझौते के तहत योजना के लिये केंद्र सरकार द्वारा 600 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

ब्रू जनजाति:

  • ब्रू समुदाय भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र का एक जनजातीय समूह है। ऐतिहासिक रूप से यह एक बंजारा समुदाय है तथा इस समुदाय के लोग झूम कृषि (Slash and Burn Farming) से जुड़े रहे हैं।
  • ब्रू समुदाय स्वयं को म्याँमार के शान प्रांत का मूल निवासी मानता है, इस समुदाय के लोग सदियों पहले म्याँमार से आकर भारत के मिज़ोरम राज्य में बस गए थे।
  • ब्रू जनजाति के लोग पूर्वोत्तर के कई राज्यों में रहते हैं परंतु इस समुदाय की सबसे बड़ी आबादी मिज़ोरम के मामित और कोलासिब ज़िलों में पाई जाती है।
  • इस समुदाय के अंतर्गत लगभग 12 उपजातियाँ शामिल हैं।
  • ब्रू समुदाय के कुछ लोग बांग्लादेश के चटगाँव पहाड़ी क्षेत्र में भी निवास करते हैं।
  • मिज़ोरम में ब्रू समुदाय को अनुसूचित जनजाति के तहत सूचीबद्ध किया गया है, वहीं त्रिपुरा में ब्रू एक अलग जाति समूह है।
  • त्रिपुरा में ब्रू समुदाय को रियांग नाम से जाना जाता है।
  • इस समुदाय के लोग ब्रू भाषा बोलते हैं, वर्तमान में इस भाषा की कोई लिपि नहीं है।
  • पलायन के परिणामस्वरूप समुदाय के कुछ लोग ब्रू भाषा के अतिरिक्त कुछ अन्य राज्यों की भाषाएँ जैसे-बंगाली, असमिया, मिज़ो, हिंदी और अंग्रेज़ी भी बोल लेते हैं।

ब्रू और मिज़ो समुदाय के बीच संघर्ष:

  • मिज़ो समुदाय के अनुसार, ब्रू जनजाति के लोग बाहरी (विदेशी) हैं, जो उनके क्षेत्र में आकर बस गए हैं। इन दोनों समुदायों के बीच संघर्ष का पुराना इतिहास रहा है।
  • वर्ष 1995 में मिज़ोरम राज्य में ब्रू समुदाय द्वारा स्वायत्त ज़िला परिषद की मांग और चुनावों में भागीदारी के कुछ अन्य मुद्दों पर ब्रू और मिज़ो समुदाय के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।
  • वर्ष 1997 में दोनों समुदायों के बीच हिंसक झड़पें पुनः तेज़ हो गईं, इसी दौरान ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट (Bru National Liberation Front) के सदस्यों ने एक मिज़ो अधिकारी की हत्या कर दी। इसके बाद दोनों समुदायों के बीच दंगे भड़क गए और अल्पसंख्यक होने के कारण ब्रू समुदाय को मिज़ोरम में अपना घर-बार छोड़कर त्रिपुरा के शरणार्थी शिविरों में आश्रय लेना पड़ा।
  • ब्रू समुदाय के लोग पिछले 23 वर्षों से उत्तरी त्रिपुरा के कंचनपुर प्रखंड (Sub-Division) में स्थायी शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं।

Bru-Refugee

(उपरोक्त मानचित्र जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों की सीमा के निर्धारण से पहले का है )

ब्रू शरणार्थी समस्या से निपटने हेतु पूर्व में किये गए प्रयास:

  • वर्ष 1997 में मिज़ोरम से त्रिपुरा में विस्थापित होने के बाद से ही भारत सरकार ब्रू-रियांग परिवारों के स्थायी पुनर्वास के प्रयास करती रही है।
  • त्रिपुरा के शरणार्थी कैंपों में पहुँचने के 6 महीने बाद ही केंद्र सरकार ने इनके लिए राहत पैकेज की घोषणा की थी। इसके तहत हर बालिग ब्रू व्यक्ति को 600 ग्राम और नाबालिग को 300 ग्राम चावल प्रतिदिन के हिसाब से देने की व्यवस्था की गई।
  • पुनर्वास के तहत वर्ष 2014 तक 1,622 ब्रू परिवारों को कई समूहों में मिज़ोरम वापस लाया गया।
  • ब्रू-रियांग परिवारों की देखभाल और उनके पुनर्वास के लिये भारत सरकार समय-समय पर त्रिपुरा और मिज़ोरम सरकारों की सहायता भी करती रही है।
  • ब्रू शरणार्थी समस्या पर वर्ष 2018 का समझौता:
    • 3 जुलाई, 2018 को ब्रू-रियांग समुदाय के प्रतिनिधियों, त्रिपुरा और मिज़ोरम की राज्य सरकारों एवं केंद्र सरकार के बीच इस समुदाय के पुनर्वास के लिये एक समझौता किया गया था, जिसके बाद ब्रू-रियांग परिवारों को दी जाने वाली सहायता में बढ़ोतरी की गई।
    • इस समझौते के तहत 5,260 ब्रू परिवारों के 32,876 लोगों के लिये 435 करोड़ रुपए का राहत पैकेज दिया गया।
    • इसमें प्रत्येक विस्थापित परिवार को पुनर्वास के लिये 4 लाख रुपए फिक्स्ड डिपॉज़िट के रूप में देने की व्यवस्था की गई थी।
    • इस व्यवस्था में प्रत्येक विस्थापित परिवार को दो वर्ष के लिये निःशुल्क राशन और हर महीने 5 हज़ार रुपए दिया जाना तय किया गया था।
    • इसके अतिरिक्त त्रिपुरा से मिज़ोरम जाने के लिये मुफ्त यातायात की सुविधा भी इन परिवारों को दी गई थी।
    • बच्चों की पढ़ाई के लिये एकलव्य स्कूल भी प्रस्तावित किये गए थे।
    • इस समझौते में ब्रू परिवारों को मिज़ोरम में जाति एवं निवास प्रमाण-पत्र के साथ वोट डालने का भी अधिकार दिया जाना था।
    • इस समझौते के बाद वर्ष 2018-19 में 328 परिवारों के 1,369 लोगों को त्रिपुरा से मिज़ोरम वापस लाया गया।

परंतु यह समझौता पूर्ण रूप से लागू नहीं हो सका क्योंकि अधिकतर विस्थापित ब्रू परिवारों ने मिज़ोरम वापस जाने से इनकार कर दिया।

अधिकांश ब्रू -रियांग परिवारों की यह मांग थी कि ब्रू समुदाय की सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए त्रिपुरा में ही उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।

आगे की राह:

  • 16 जनवरी को ब्रू शरणार्थियों की समस्या पर हुए इस समझौते के बाद लगभग दो दशक से अधिक समय से चली आ रही इस समस्या का समाधान संभव हो सकेगा।
  • सरकार की इस पहल के बाद इस समुदाय को घर, बिजली, पानी के साथ कई अन्य मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
  • ब्रू समुदाय के लोग मतदान के माध्यम से त्रिपुरा सरकार तक अपनी बात पहुँचा सकेंगे।
  • पिछले कुछ वर्षों से शरणार्थी शिविरों में नवजात मृत्यु जैसी गंभीर समस्याओं में वृद्धि हुई थी। इस समझौते के बाद केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इस समुदाय को पुनः मुख्यधारा में शामिल करने में मदद मिलेगी।
  • वर्ष 2018 के समझौते के बाद बड़ी संख्या में ब्रू समुदाय के लोगों ने मिज़ोरम में अपनी सुरक्षा से संबंधित चिंताओं के कारण विरोध जाहिर किया था। अतः इस समझौते के बाद सामुदायिक सौहार्द को बनाए रखते हुए ब्रू जनजाति का सफल पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सकेगा।

अभ्यास प्रश्न: पूर्वोत्तर राज्यों के क्षेत्रीय/जातीय हिंसक तनावों के इतिहास को ध्यान में रखते हुए हाल ही में हुए ब्रू शरणार्थी समझौते के महत्व एवं इससे उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा कीजिये।

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