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Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 25 जून, 2022

  • 25 Jun 2022
  • 7 min read

अंतर्राष्ट्रीय नाविक दिवस

दुनिया भर में वाणिज्य एवं आर्थिक प्रणाली में नाविकों के अमूल्य योगदान को मान्यता देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 25 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय नाविक दिवस’ का आयोजन किया जाता है। दुनिया भर का लगभग 90 प्रतिशत व्यापार जहाज़ों के माध्यम से किया जाता है और इन जहाज़ों का संचालन नाविकों द्वारा किया जाता है, जो पानी के माध्यम से व्यापार के सुचारु प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिये अथक प्रयास करते हैं। ‘अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन’, जो कि नौवहन को विनियमित करने हेतु उत्तरदायी संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है, ने वर्ष 2010 में प्रतिवर्ष 25 जून को अंतर्राष्ट्रीय नाविक दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इसके पश्चात् वर्ष 2011 में पहला ‘अंतर्राष्ट्रीय नाविक दिवस’ आयोजित किया गया। इस दिवस की शुरुआत का प्राथमिक लक्ष्य आम लोगों को वैश्विक व्यापार और परिवहन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नाविकों के कार्य के संदर्भ में जागरूक करना है। साथ ही यह दिवस निजी जहाज़ कंपनियों से समुद्र में सुरक्षित यात्रा के लिये अपने नाविकों को पर्याप्त सुविधाएँ प्रदान करने का भी आग्रह करता है। गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक विशेष संस्था है, जिसकी स्थापना वर्ष 1948 में जिनेवा सम्मेलन के दौरान एक समझौते के माध्यम से की गई थी। यह एक अंतर्राष्ट्रीय मानक-निर्धारण प्राधिकरण है जो मुख्य रूप से अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा में सुधार करने हेतु उत्तरदायी है।

सुचेता कृपलानी

उपराष्‍ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने विख्‍यात स्‍वतंत्रता सेनानी और भारत की पहली महिला मुख्‍यमंत्री सुचेता कृपलानी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी सुचेता कृपलानी का जन्म 25 जून, 1908 को हरियाणा के अंबाला में एक बंगाली परिवार में हुआ था। इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् सुचेता कृपलानी ने ‘बनारस हिंदू विश्वविद्यालय’ में व्याख्याता के रूप में काम करना शुरू किया। अरुणा आसफ अली और उषा मेहता जैसी समकालीन महिलाओं की तरह सुचेता कृपलानी भी भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हुईं। सुचेता कृपलानी ने भारत के विभाजन के दौरान हुए दंगों में महात्मा गांधी के साथ मिलकर काम किया। सुचेता कृपलानी उन महिलाओं में से एक थीं, जिन्हें भारतीय संविधान समिति में शामिल किया गया था। भारत की स्वतंत्रता के बाद सुचेता कृपलानी उत्तर भारत की राजनीति में सक्रिय रूप से शामिल हो गईं। वर्ष 1952 में उन्हें लोकसभा के सदस्य के रूप में चुना गया और वर्ष 1962 में वह कानपुर से उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य के रूप में चुनी गईं। 1963 में वह उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं और इसी के साथ उन्होंने देश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल किया। वर्ष 1971 में वह सेवानिवृत्त हुईं और वर्ष 1974 में उनकी मृत्यु हो गई।

दिनकर गुप्ता

23 जून, 2022 को पंजाब के पूर्व डीजीपी दिनकर गुप्ता को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (National Investigation Agency – NIA) का नया महानिदेशक नियुक्त किया गया। CRPF के महानिदेशक कुलदीप सिंह को वाई.सी. मोदी की सेवानिवृत्ति के बाद मई 2021 में NIA का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। दिनकर गुप्ता 31 मार्च, 2024 या अगले आदेश तक इस पद पर रहेंगे। दिनकर गुप्ता के पास पुलिस प्रशासन में मास्टर डिग्री है। उन्होंने 2019 में पंजाब पुलिस के महानिदेशक का पद संभाला था। उन्होंने इस पद पर 2 साल 7 महीने सेवा की। बाद में उन्हें पंजाब पुलिस हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में स्थानांतरित कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की अनुमति मांगी थी। उन्होंने पुलिस महानिदेशक, खुफिया, पंजाब के रूप में भी कार्य किया। इसमें पंजाब की इंटेलिजेंस विंग, ऑर्गनाइज्ड क्राइम कंट्रोल यूनिट (OCCU) और स्टेट एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) शामिल थी। जून 2004 से जुलाई 2012 के दौरान केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर उनका आठ साल का कार्यकाल था। उन्होंने इस अवधि के दौरान संवेदनशील कार्यभार संभाला, जिसमें वीवीआईपी सुरक्षा की देखभाल करने वाले इंटेलिजेंस ब्यूरो यूनिट के प्रमुख भी शामिल थे। दिनकर गुप्ता को 1992 और 1994 में दो पुलिस वीरता पदकों से अलंकृत किया गया है। उन्हें राष्ट्रपति द्वारा सराहनीय सेवाओं के लिये पुलिस पदक के साथ-साथ 2010 में विशिष्ट सेवा हेतु राष्ट्रपति का पुलिस पदक भी दिया गया था। उन्हें 1999 में ब्रिटिश शेवनिंग गुरुकुल छात्रवृत्ति से सम्मानित किया गया था।

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