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Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 13 जुलाई, 2021

  • 13 Jul 2021
  • 8 min read

कोंगु नाडू: तमिलनाडु

हाल ही में तमिलनाडु में ‘कोंगु नाडू’ क्षेत्र को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। विदित हो कि 'कोंगु नाडु' न तो पिन कोड वाला कोई स्थान है और न ही किसी क्षेत्र को औपचारिक रूप से दिया गया कोई नाम है। इसे प्रायः पश्चिमी तमिलनाडु के हिस्से को इंगित करने के लिये प्रयोग किया जाता है। तमिल साहित्य में इसे प्राचीन तमिलनाडु के पाँच क्षेत्रों में से एक के रूप में संदर्भित किया गया था। साथ ही संगम साहित्य में भी एक अलग क्षेत्र के रूप में 'कोंगु नाडु' का उल्लेख मिलता है। वर्तमान तमिलनाडु राज्य में इस नाम का उपयोग अनौपचारिक रूप से एक ऐसे क्षेत्र को संदर्भित करने के लिये किया जाता है जिसमें नीलगिरि, कोयंबटूर, तिरुपुर, इरोड, करूर, नमक्कल और सलेम ज़िले शामिल हैं, साथ ही इसमें डिंडगुल ज़िले के ओड्डनछत्रम एवं वेदसंदूर क्षेत्र तथा धर्मपुरी ज़िले में पप्पीरेड्डीपट्टी क्षेत्र भी शामिल हैं। यह नाम ओबीसी समुदाय’ कोंगु वेल्लालर गौंडर’ से लिया गया है, जिनकी इन ज़िलों में महत्त्वपूर्ण उपस्थिति है। इस क्षेत्र में नमक्कल, सलेम, तिरुपुर और कोयंबटूर जैसे प्रमुख व्यावसायिक व औद्योगिक केंद्र भी शामिल हैं। हाल ही में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान जिन नए मंत्रियों के नाम की सूची जारी की गई है, उसमें तमिलनाडु से आने वाले मंत्रियों के नाम के साथ ज़िले के स्थान पर 'कोंगु नाडु' नाम दिया गया है, जो कि स्वयं में एक ज़िला नहीं है। ऐसे में सरकार पर तमिलनाडु में क्षेत्रवाद को बढ़ावा देने और राज्य को दो हिस्सों में विभाजित करने का आरोप लगाया जा रहा है।

राष्ट्रीय डॉल्फिन अनुसंधान केंद्र

इस वर्ष मानसून के पश्चात् लुप्तप्राय गंगा डॉल्फिन के संरक्षण के लिये एक महत्त्वपूर्ण कदम के रूप में बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय डॉल्फिन अनुसंधान केंद्र (NDRC) के निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा। ज्ञात हो कि बिहार शहरी विकास विभाग ने गंगा से लगभग 200 मीटर की दूरी पर NDRC के भवन के निर्माण की मंज़ूरी दी है। गौरतलब है कि बिहार में इस अनुसंधान केंद्र का निर्माण इस लिहाज़ से भी महत्त्वपूर्ण है कि बिहार में विश्व की गंगा डॉल्फिन आबादी का 50 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है। यह केंद्र डॉल्फिन के संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देने के साथ-साथ उसके बदलते व्यवहार, उत्तरजीविता कौशल, भोजन की आदतों, मृत्यु के कारणों और अन्य विभिन्न पहलुओं पर गहन शोध का अवसर प्रदान करेगा। गंगा डॉल्फिन को वर्ष 2009 में भारत सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय जलीय जीव’ के रूप में मान्यता दी गई थी। इसे ‘वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम’ के तहत अनुसूची-I में शामिल किया गया है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंज़र्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) द्वारा इसे लुप्तप्राय प्रजाति घोषित किया गया है। गंगा डॉल्फिन दुनिया की चार ‘फ्रेश वाटर’ डॉल्फिन प्रजातियों में से एक है। अन्य तीन प्रजातियाँ चीन की यांग्त्ज़ी नदी (अब विलुप्त), पाकिस्तान में सिंधु नदी और दक्षिण अमेरिका में अमेज़न नदी में पाई जाती हैं। 

नेपाल के नए प्रधानमंत्री: शेर बहादुर देउबा

हाल ही में नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा को बहाल कर दिया है और राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी को नेपाली काॅन्ग्रेस के प्रमुख ‘शेर बहादुर देउबा’ को देश का प्रधानमंत्री नियुक्त करने का आदेश दिया है। आदेश के मुताबिक, शेर बहादुर देउबा को अपनी नियुक्ति के एक माह के भीतर सदन में विश्वास मत हासिल करना होगा। बीते पाँच माह में यह दूसरी बार है जब न्यायालय ने सदन को बहाल किया है। फरवरी माह में भी न्यायालय द्वारा इसी प्रकार की कार्रवाई की गई थी। गौरतलब है कि बीते दिनों 21 मई को प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की सिफारिश पर संसद भंग कर दी गई थी और छह महीने में नए चुनाव कराने का आदेश दिया था। इसके पश्चात् नई सरकार के गठन के लिये न तो के.पी. शर्मा ओली और न ही विपक्ष बहुमत प्रदर्शित करने में सफल हो पाए थे। नेपाली काॅन्ग्रेस के प्रमुख शेर बहादुर देउबा का जन्म 13 जून, 1946 को नेपाल के सुदूर पश्चिमी क्षेत्र के दडेलहुरा ज़िले में हुआ था। वर्ष 1971 में उन्होंने नेपाल छात्र संघ की स्थापना की और उसके अध्यक्ष बने तथा वर्ष 1980 तक इस पद पर रहे। वर्ष 1896 में उन्होंने ‘नेपाली काॅन्ग्रेस डेमोक्रेटिक पार्टी’ का गठन किया। शेर बहादुर देउबा के पास बेहतरीन राजनीतिक अनुभव है और इस बार वे पाँचवीं बार प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे।

यूरो कप 2020

हाल ही में इटली ने इंग्लैंड को हराकर दूसरी बार यूरोपीय चैंपियनशिप जीत ली है। इससे पहले इटली की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने वर्ष 1968 में यूगोस्लाविया को हराकर यूरोपीय चैंपियनशिप का खिताब जीता था। इसके अलावा इटली ने वर्ष 2000 और वर्ष 2012 में भी यूरोपियन चैंपियनशिप के फाइनल में क्वालीफाई किया था, किंतु वह फाइनल मुकाबले में जीत हासिल नहीं कर पाई थी। वहीं इंग्लैंड बीते 55 वर्षों में अपना पहला फाइनल मुकाबला खेल रहा था। यूरोपीय चैंपियनशिप (जिसे ‘यूरो कप’ के रूप में भी जाना जाता है) ‘यूरोपीय फुटबॉल संघ समूह’ के सदस्य देशों के बीच आयोजित एक चतुर्भुज फुटबॉल (सॉकर) टूर्नामेंट है। ‘यूरो कप’ अथवा ‘यूरोपीय चैंपियनशिप’ को ‘फीफा विश्व कप’ के बाद विश्व के दूसरे सबसे महत्त्वपूर्ण फुटबॉल टूर्नामेंट के रूप में जाना जाता है। यूरोपीय चैंपियनशिप (जिसे तब ‘यूरोपीय राष्ट्र कप’ के रूप में जाना जाता था) का आयोजन पहली बार वर्ष 1960 में किया गया था।

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