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प्रारंभिक परीक्षा

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 27 मई, 2020

  • 27 May 2020
  • 9 min read

सिकाडा

Cicadas

सिकाडा (Cicadas) एक प्रकार के कीड़े हैं जो अपने जीवन का अधिकांश समय भूमिगत रूप से बिताते हैं और 13-17 वर्षों के बाद ये कीट मिट्टी से बाहर निकलते हैं।

  • एक बार मिट्टी से बाहर निकलने के बाद इनका जीवनकाल अत्यंत छोटा (दो-चार हफ्तों के बीच) होता है।

Cicadas

प्रमुख बिंदु: 

  • 17 वर्ष के सिकाडा की तीन प्रजातियाँ और 13 वर्ष के सिकाडा की तीन प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका में वर्ष 2020-21 का समय आवधिक सिकाडों के प्रकोप का समय बताया जा रहा है। 
    • गौरतलब है कि पिछली बार वर्ष 2003-04 में उत्तरी अमेरिका के जंगलों में इनकी उपस्थिति दर्ज की गई थी।    
  • ज़मीन से अरबों की संख्या में बाहर निकलने के बाद, सिकाडों अपने पंखों को विकसित करने के लिये ये अपने एक्सोस्कलटन या बाहरी खाल को बाहर निकालते हैं।
  • ये कीट अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा पेड़ों की जड़ों या ज़मीन के नीचे बिताते हैं जहाँ ये ज़ाइलम पर निर्भर होते हैं, जब ये बड़े होते हैं तो एक साथ लाखों की संख्या में प्रजनन के लिये बाहर आते हैं।
  • नर सिकाडा, मादाओं को आकर्षित करने के लिये ‘एक तीव्र ध्वनि’ निकालते हैं, इन नर सिकाडों का सामूहिक कोरस बहुत तीव्र होता है और यह 100 डेसिबल तक पहुँच सकता है जो कि एक लानमौवेर (लॉन की घास काटने वाली मशीन) की ध्वनि से भी ज्यादा होता है।
  • एक मादा सिकाडो 40-50 अलग-अलग स्थानों में 400 से अधिक अंडे देने में सक्षम होती है। ये अपने अंडे टहनियों पर रखती हैं जिनका व्यास 1/2 से 1/4 होता है। अंडे टहनियों पर 6-10 सप्ताह तक बने रहते हैं, इनसे कीट के बाहर निकल कर ज़मीन पर गिर जाते हैं और अपने भोजन के लिये जमीन के अंदर 6-18 इंच तक नीचे चले जाते हैं और 13 या 17 वर्ष बाद ज़मीन से बाहर निकलते हैं।

लाभ: 

  • वैज्ञानिक बताते हैं कि जमीन से बाहर आने के बाद इन कीटों के मर कर मिट्टी में मिलने से मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है। नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ने से आसपास के पेड़ों को तेज़ी से बढ़ने में मदद मिलती है।

चिंताएँ:

  • सिकाडों द्वारा अंडे देने से छोटी टहनियों को काफी नुकसान होता है। ये कई सजावटी एवं कठोर लकड़ी वाले पेड़ों विशेष रूप से नए लगाए गए फल वाले पेड़ एवं सजावटी पेड़ जैसे- सेब, डॉगवुड, आड़ू, चेरी एवं नाशपाती को नुकसान पहुँचाते हैं। 

एडेनोवायरस COVID-19 टीका

Adenovirus COVID-19 Vaccine

एडेनोवायरस COVID-19 टीके (Adenovirus COVID-19 Vaccine) का चरण-1 परीक्षण सुरक्षित है और इसे वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करने में सक्षम पाया गया है।

  • गौरतलब है कि इसका चरण-2 परीक्षण एक यादृच्छिक, डबल-ब्लाइंड और प्लेसबो-नियंत्रित परीक्षण होगा।

प्रमुख बिंदु: 

  • यह एक ‘पुनः संयोजक एडेनोवायरस टाइप -5 वेक्टर’ का उपयोग करता है जो आनुवंशिक सामग्री को वहन करता है। ‘आनुवंशिक सामग्री’ नोवेल कोरोनोवायरस के ‘स्पाइक ग्लाइकोप्रोटीन’ के लिये प्रतिबिंबित की जाती है।
  • एडेनोवायरस एक कमज़ोर सामान्य कोल्ड वायरस (Cold Virus) है। यह सामान्य वायरस का एक समूह है जो मनुष्य की आँखों, वायुमार्ग एवं फेफड़ों, आँतों, मूत्रपथ और तंत्रिका तंत्र को संक्रमित करता है।

चंबा सुरंग

Chamba Tunnel

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने 26 मई, 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चारधाम परियोजना (Chardham Pariyojana) के तहत ‘चंबा सुरंग’ (Chamba Tunnel) से वाहन रवानगी आयोजन का उद्घाटन किया। 

Chamba-Tunnel

प्रमुख बिंदु: 

  • सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation- BRO) ने ऋषिकेश-धरासू राजमार्ग (NH-94) पर व्यस्त चंबा शहर के नीचे 440 मीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया है।
  • BRO प्रतिष्ठित चारधाम परियोजना में एक महत्त्वपूर्ण हितधारक है और ‘टीम शिवालिक’ ने इस सुरंग के निर्माण में सफलता हासिल की है। 
  • इसके निर्माण में नवीनतम ऑस्ट्रियाई प्रौद्योगिकी का उपयोग किया गया है। यह सुरंग पूर्ण होने की निर्धारित तिथि से लगभग तीन महीने पहले ही इस वर्ष अक्तूबर तक यातायात के लिये खोल दी जाएगी।  

चारधाम परियोजना:

  • चारधाम परियोजना में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को जाने वाले 889 किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण एवं मरम्मत कार्य शामिल है।
  • लगभग 12,000 करोड़ रुपए की लागत एवं तकरीबन 889 किमी. की अनुमानित लंबाई वाली प्रतिष्ठित ‘चारधाम परियोजना’ के तहत BRO, 250 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कर रहा है जो पवित्र तीर्थस्थल गंगोत्री और बद्रीनाथ की ओर जाएगा।
  • BRO को लगभग 3000 करोड़ रुपए की लागत वाले 251 किलोमीटर लंबे खंड सौंपे गए हैं जिनमें 28 किमी. से 99 किलोमीटर तक की लंबाई वाले ऋषिकेश-धरासू राजमार्ग (NH-94), 110 किलोमीटर की लंबाई वाले धरासू-गंगोत्री राजमार्ग (NH-108) और 42 किलोमीटर की लंबाई वाले जोशीमठ से ‘माना राजमार्ग’ (NH-58) पर 17 परियोजनाएँ शामिल हैं।

जैव विविधता संरक्षण इंटर्नशिप कार्यक्रम

Biodiversity Samrakshan Internship Programme

22 मई, 2020 को  केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय  (Union Ministry of Environment, Forest and Climate Change) ने जैव विविधता के संरक्षण के लिये ‘जैव विविधता संरक्षण इंटर्नशिप कार्यक्रम’ (Biodiversity Samrakshan Internship Programme) शुरू किया।

प्रमुख बिंदु: 

  • इस कार्यक्रम में एक खुली, पारदर्शी, ऑनलाइन प्रतिस्पर्द्धी प्रक्रिया के माध्यम से एक वर्ष की अवधि के लिये 20 छात्रों को स्नातकोत्तर डिग्री के साथ संलग्न करने का प्रस्ताव है।
  • इस कार्यक्रम में ‘राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण’ (National Biodiversity Authority- NBA) और ‘संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम’ (UN Development Programme- UNDP) एक नोडल एजेंसी के रूप में शामिल हैं।
  • यह कार्यक्रम गतिशील एवं रचनात्मक छात्रों को संलग्न करना चाहता है जो प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन एवं जैव विविधता संरक्षण के बारे में जानने और विभिन्न राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों में NBA की परियोजनाओं का समर्थन करने के लिये तथा तकनीकी रूप से ‘राज्य जैव विविधता बोर्ड’/’संघ राज्य क्षेत्र जैव विविधता परिषद’ को उनके अधिदेशों के निर्वहन में सहायता प्रदान करने के इच्छुक हैं।
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