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प्रारंभिक परीक्षा

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 13- 08- 2019

  • 13 Aug 2019
  • 14 min read

पर्सेइड उल्कापिंडों की बौछार

पर्सेइड उल्कापिंडों की बौछार (Perseid Meteor Shower) 17 जुलाई, 2019 से सक्रिय है, इसे 26 अगस्त, 2019 तक देखा जा सकता है। प्रत्येक वर्ष 17 जुलाई से 24 अगस्त के दौरान हमारी पृथ्वी स्विफ़्ट टटल धूमकेतु के पास से गुज़रती है।

  • स्विफ़्ट टटल धूमकेतु ही पर्सेइड उल्कापिंडों की बौछार का प्रमुख कारण है।
  • स्विफ्ट टटल धूमकेतु के छोटे अंश/भाग तेज़ी से घूमते पर्सेइड उल्का के रूप में पृथ्वी के ऊपरी वातावरण में 2 लाख, 10 हज़ार किलोमीटर प्रति घंटे की गति से घूमते हैं जो रात्रि के समय आकाश में तीव्र चमक के साथ बौछार करते नज़र आते हैं।
  • स्विफ़्ट टटल धूमकेतु एक विकेंद्री (अव्यवस्थित केंद्रक के साथ) अंडाकार कक्षा में परिक्रमा करता है जो लगभग 27 किलोमीटर चौड़ी होती है।
  • जब यह सूर्य से अधिकतम दूरी पर होता है तो प्लूटो की कक्षा के बाहर होता है तथा जब सूर्य के बहुत नज़दीक होता है तो पृथ्वी की कक्षा के अंदर होता है।
  • यह 133 वर्षों में सूर्य की परिक्रमा करता है।

उल्कापात

  • आकाश में कभी-कभी एक ओर से दूसरी ओर अत्यंत वेग से जाते हुए अथवा पृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई देते हैं उन्हें उल्का (meteor) या 'टूटते हुए तारे' कहते हैं।
  • उल्काओं का जो अंश/भाग वायुमंडल में जलने से बचकर पृथ्वी तक पहुँचता है उसे उल्कापिंड (meteorite) कहते हैं।
  • प्रायः प्रत्येक रात्रि को उल्काएँ अनगिनत संख्या में देखी जा सकती हैं, किंतु इनमें से पृथ्वी पर गिरनेवाले पिंडों की संख्या काफी कम होती है।
  • हालाँकि वैज्ञानिक दृष्टि से ये उल्कापिंड काफी महत्त्वपूर्ण होते हैं। अति दुर्लभ होने के साथ-साथ आकाश में विचरते हुए विभिन्न ग्रहों इत्यादि के संगठन एवं संरचना के ज्ञान के प्रत्यक्ष स्रोत भी केवल ये ही पिंड हैं।
  • इस प्रकार ये पिंड ब्रह्माण्ड विद्या तथा भू-विज्ञान के बीच संपर्क स्थापित करने में सहायक हो सकते हैं।

विश्व हाथी दिवस

दुनिया भर में हाथियों की रक्षा व सम्मान करने तथा उनके सामने आने वाले महत्त्वपूर्ण खतरों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिये प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को विश्व हाथी दिवस (World Elephant Day) मनाया जाता है।

  • इस दिवस को मनाने का प्रमुख उद्देश्य हाथियों का संरक्षण करना, जंगली हाथियों की संख्या, उनकी स्थिति एवं प्रबंधन के बारे में जानकारी मुहैया कराना है।
  • हाथियों का अवैध शिकार, आवास की हानि, मानव-हाथी संघर्ष तथा कैद में रखकर उनके साथ दुर्व्यवहार अफ्रीकी और एशियाई दोनों देशों में हाथियों के लिये सामान्य खतरों के तहत आते हैं।

हाथियों के संदर्भ में

  • एशियाई हाथी की तीन उप-प्रजातियाँ हैं: भारतीय, सुमात्रन तथा श्रीलंकन।
  • IUCN के रेड लिस्ट में अफ्रीकी हाथियों को सुभेद्य (vulnerable) तथा एशियाई हाथियों को संकटापन्न (Endangered) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • भारत में हाथी को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife (Protection) Act, 1972) की अनुसूची I में शामिल करते हुए भारतीय वन्यजीव कानून के तहत उच्चतम संभव संरक्षण प्रदान किया गया है।
  • भारत सरकार ने हाथियों के संरक्षण के लिये कई पहलें शुरू की हैं।

अंतर्राष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम, 2021

एक दशक से अधिक के अंतराल के बाद भारत अंतर्राष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम, 2021 (Programme for International Student Assessment- PISA) में भाग लेने के लिये पूरी तरह से तैयार है।

  • आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) द्वारा वर्ष 2021 में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम में भारत की तरफ से केंद्रीय विद्यालय संगठन, नवोदय विद्यालय समिति द्वारा संचालित विद्यालय तथा केंद्रशासित क्षेत्र चंडीगढ़ के विद्यालय भाग लेंगे।
  • इस कार्यक्रम के अंतर्गत मूल्यांकन हेतु किसी देश (बड़े देशों के मामले में विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र) के 15 वर्ष की आयु वाले छात्रों को सम्मिलित किया जाएगा जो स्कूली शिक्षा के सभी रूपों जैसे- सार्वजनिक, निजी, निजी सहायता प्राप्त स्कूलों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम (Programme for International Student Assessment- PISA) 73 देशों में शिक्षा प्रणाली का एक अंतर्राष्ट्रीय मूल्यांकन कार्यक्रम है।
  • पिछली बार भारत ने वर्ष 2009 में PISA में भाग लिया था उस समय 73 देशों में भारत को 72वाँ स्थान प्राप्त हुआ था।

अंतर्राष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम

Programme for International Student Assessment- PISA

  • इस कार्यक्रम का पहली बार आयोजन वर्ष 2000 में किया गया था।
  • यह कार्यक्रम आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) द्वारा समन्वित एक त्रैवार्षिक अंतर्राष्ट्रीय सर्वेक्षण है।
  • इसके अंतर्गत वैश्विक स्तर पर छात्रों का मूल्यांकन दुनिया भर की शैक्षिक प्रणाली की गुणवत्ता, विज्ञान, गणित तथा पठन संबंधी क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है।
  • PISA गणित, विज्ञान एवं पढ़ने में 15 वर्षीय छात्रों के शैक्षिक प्रदर्शन को मापता है।

राष्ट्रीय युवा पुरस्कार

12 अगस्त, 2019 को केंद्रीय खेल मामले एवं कार्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने एक समारोह के तहत एकल (15-29 वर्ष की आयु के बीच) एवं संगठनों को वर्ष 2016-17 का राष्ट्रीय युवा पुरस्कार (National Youth Award) प्रदान किया।

  • यह पुरस्कार विकास तथा स्वास्थ्य, मानवाधिकार संवर्द्धन, सक्रिय नागरिकता, समुदायिक सेवा इत्यादि जैसे समाज सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य तथा योगदान के लिये प्रदान किया जाता है।
  • युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के युवा मामलों के विभाग द्वारा दिये गए पुरस्कारों का प्रमुख उद्देश्य युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय विकास एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्टता अर्जित करने के लिये प्रेरित करना तथा युवाओं में समुदाय के प्रति ज़िम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिये उन्हें प्रोत्साहित करना है।
  • राष्ट्रीय युवा पुरस्कार समारोह के दौरान ‘भारतीय युवाओं की दृष्टि से चीन-2019’ पर एक फोटो प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया। यह उन युवा प्रतिनिधियों द्वारा लिये गए चित्रों की प्रदर्शनी थी जिन्होंने हाल ही में चीन में युवा विनिमय कार्यक्रम में भाग लिया था।
  • एकल पुरस्कार के तहत एक पदक, एक प्रमाणपत्र तथा 50 हज़ार रुपए की नकद राशि प्रदान की जाती है, जबकि युवा संगठन के तहत दिये जाने वाले पुरस्कार में एक पदक, एक प्रमाणपत्र एवं 2 लाख रुपए की नकद राशि शामिल होती है।
  • ‘भारतीय युवाओं की दृष्टि से चीन-2019’ पर फोटो प्रदर्शनी के लिये भी तीन एकल पुरस्कार दिये गए।
  • राष्ट्रीय युवा पुरस्कार 2016-17 निम्नलिखित 20 खिलाड़ियों एवं तीन संगठनों को प्रदान किया गया

एकल वर्ग में राष्ट्रीय युवा पुरस्कार 2016-17 प्राप्त करने वाले खिलाड़ी:

1. रोहित कुमार कश्यप (उत्तर प्रदेश) 11. केएच कृष्णा मोहन सिंघा (असम)
2. विनित देवीदास मालपुरे (महाराष्ट्र) 12. प्रुधवी गोल्ला (आंध्र प्रदेश)
3. मोमोता थाउनाओजाम (मणिपुर) 13. राजू गोरई (पश्चिम बंगाल)
4. नितेश कुमार शाहु (छत्तीसगढ़) 14. राहुल डाबर (हरियाणा)
5. ओद्दिराजू वामशिकृष्णा (तेलंगाना) 15. हंसराज खाटावलिया (राजस्थान)
6. प्रिंस सिंघल (झारखंड) 16. प्रितीश कुमार (उत्तर प्रदेश)
7. अपूर्व ओम (दिल्ली) 17. मृत्युंजय द्विवेदी (उत्तर प्रदेश)
8. ए.जी. पद्मनाभन (तमिलनाडु) 18. मितेश गज्जर (गुजरात)
9. ओंकार राजीव नवलीहलकार (महाराष्ट्र) 19. सुब्रत कुमार दास (ओडिशा)
10. गेटेम वेंकटेश (आंध्र प्रदेश) 20. मन्नु काम्बोज (राजस्थान)

राष्ट्रीय युवा पुरस्कार 2016-17 प्राप्तकर्त्ता संगठन वर्ग:

  1. ईको-प्रो बहुउद्देशियी संस्था (महाराष्ट्र)
  2. केयर एंड शेयर फाउंडेशन (मणिपुर)
  3. समुत्कर्ष युवा विकास नवयुवक मंडल (राजस्थान)

जंगली भैंसे

इस वर्ष अक्तूबर में (मॉनसून के अंत तक) छतीसगढ़ राज्य के उदंती वन्यजीव अभयारण्य में असम से पाँच मादा जंगली भैंसों (Wild Buffaloes) को लाया जाना सुनिश्चित किया गया है।

  • उदंती वन्यजीव अभयारण्य में पाँच राज्यों से गुजरते हुए असम के मानस नेशनल पार्क से लाई जाने वाली ये जंगली भैंसें लगभग 1,500 किमी. की दूरी तय करेंगी।
  • पिछली जनगणना के अनुसार, उदंती वन्यजीव अभयारण्य (Udanti Wildlife Sanctuary) में केवल 10 जंगली भैंसे शेष पाई गईं, जिनमें से आठ नर तथा 2 मादा भैसें हैं।
  • इतनी कम संख्या में जंगली भैंसों के पाए जाने का कारण उनके प्रजनन एवं वृद्धि में समस्या हो सकती है
  • वन्यजीव वैज्ञानिकों के अनुसार, असम से आने वाली मादा जंगली भैंसें छत्तीसगढ़ में प्रजनन कर यहाँ के नर-मादा अनुपात को संतुलित कर सकती हैं।
  • उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु जंगली भैंसा है जो विलुप्त होने की कगार पर है।
  • पूर्वोत्तर में जंगली भैंसों (Bubalus arnee) की अनुमानित आबादी लगभग 3,000-4,000 है, जो देश में सबसे ज़्यादा है, यह दुनिया भर के भैंसों की आबादी का 92% है।
  • चरने वाले (Grazers) ये जीव न केवल पारिस्थितिक तंत्र को व्यवस्थित बनाए रखने में सहायता प्रदान करते हैं बल्कि इनका आर्थिक महत्त्व भी है|
  • भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट (Wildlife Trust of India- WTI) के अनुसार, इसे वाइल्ड लाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 की अनुसूची 1 के तहत सूचीबद्ध किया गया है तथा अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature- IUCN) की रेड लिस्ट में विलुप्त हो रही (Endangered) प्रजातियों की सूची में शामिल किया गया है।

उदंती वन्यजीव अभयारण्य

  • उदंती वन्यजीव अभयारण्य छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर ज़िले में अवस्थित है। इस अभयारण्य की स्थापना “वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972” के तहत वर्ष 1983 में की गई थी।
  • यह अभयारण्य तकरीबन 232 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है।
  • यह अभयारण्य जंगली भैंसों की बहुतायत के लिये प्रसिद्ध था ये भैंसें वर्तमान में विलुप्ति के कगार पर हैं।
  • इस अभयारण्य में मानव निर्मित अनेक तालाब भी अवस्थित हैं।
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